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इन 4 कारणों से सब्सिडी मिलने के बाद भी नहीं बिक रहीं इलेक्ट्रिक कारें

इलेक्ट्रिक कारों को नहीं मिल रहे हैं खरीदार सरकार की तरफ से दी जा रही है भारी सब्सिडी इस सब्सिडी के बावजूद भी नहीं इलेक्ट्रिक कारों को खरीदने को तैयार नहीं है ग्राहक

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Vineet Singh

Oct 30, 2019

electric car sale slow

नई दिली: साल 2019 भारत में इलेक्ट्रिक कारों के लिए काफी अच्छा रहा है दरअसल इस साल कई नामी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने मार्केट में अपनी इलेक्ट्रिक कारों को लॉन्च किया है। इतना ही नहीं इन कारों पर डिस्काउंट के साथ ही सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है। भारी सब्सिडी के बावजूद आलम ये है कि लोग इन कारों को खरीदना पसंद नहीं कर रहे हैं। तो इस खबर में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन से हैं वो कारण जिनकी वजह से इलेक्ट्रिक कारें खरीदने से बच रहे हैं ग्राहक।

चार्जिंग में लगने वाला वक्त

जितनी भी इलेक्ट्रिक कारें भारत में लॉन्च हुई हैं उनमें से ज्यादातर की रेंज 150 से 250 किमी है इसके बावजूद जब इन कारों की बैटरी खत्म हो जाती है तो इन्हें दुबारा चार्ज करने में 6 से लेकर 12 घंटे का समय लगता है। यही वजह है कि लोग इन कारों पर भरोसा नहीं दिखा पा रहे हैं।

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महंगे पार्ट्स

इलेक्ट्रिक कारों में लगने वाले ज्यादातर पार्ट्स इलेक्ट्रॉनिक होते हैं, ऐसे में अगर इन कारों का कोई भी पार्ट खराब होता है तो आपको अच्छी खासी चपत लग सकती है।

महंगी सर्विसिंग

आम पेट्रोल डीजल कारों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारों की सर्विसिंग काफी महंगी होती है जिसकी वजह से लोग इलेक्ट्रिक कारों में पैसे इन्वेस्ट करने से बच रहे हैं।

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ज्यादा कीमत

आम सेडान या हैचबैक कारों की कीमत 4 से 6 लाख के बीच होती है लेकिन इलेक्ट्रिक कारों की कीमत आम कारों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है जिसकी वजह से इन्हें खरीदना आसान नहीं होता है और लोगों की जेब पर ज्यादा बोझ भी पड़ता है।