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जाट आरक्षण आंदोलन: अब तक 300 करोड़ का नुकसान

जाट आरक्षण आंदोलन से करीब 300 करोड़ रुपए की संपत्ति नष्ट हो चुकी है, हालांकि यह अनुमान इससे अधिक हो सकता है लेकिन अभी

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Yuvraj Singh Jadon

Feb 20, 2016

jat reservation

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संजीव शर्मा, चंडीगढ़। हरियाणा में चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन से करीब 300 करोड़ रुपए की संपत्ति नष्ट हो चुकी है। हालांकि यह अनुमान इससे अधिक हो सकता है लेकिन अभी तक पुख्ता जानकारी नहीं आ रही है क्योंकि प्रदेश में आंदोलनकारियों का उपद्रव थमा नहीं है। बहरहाल राज्य सरकार ने नुकसान का आंकलन शुरू करने के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी इस बारे में रिपोर्ट भेज दी है। हरियाणा में यह पहला मौका नहीं है जब जाट आरक्षण आंदोलन हो रहा है। इससे पहले भी हरियाणा प्रदेश में करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हो चुकी है।


24 नवंबर 2006 को शुरू हुई लड़ाई
प्रदेश में जाट आरक्षण की लड़ाई सबसे पहले 24 नवंबर 2006 को शुरू हुई थी। 13 दिसंबर 2010 को जाट आरक्षण समीति ने हिसार जिले में रेलगाडिय़ां रोकी थी। इसके बाद वर्ष 2011 और 2013 में भी जाट आरक्षण आंदोलन हो चुके हैं। आरक्षण के आंदोलनों में हर बार हरियाणा को कटु अनुभव हुआ है।

214 करोड़ रुपए रेलवे का नुकसान
एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व समय के दौरान हुए जाट आरक्षण आंदोलन में हरियाणा व देश की करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति बर्बाद हुई थी। जिसमें केवल 214 करोड़ रुपए रेलवे का नुकसान हुआ था। इसके अलावा आंदोलनकारियों ने आरक्षण की मांग के दौरान हिसार जिले में एक कॉटन मिल, गोपाल घी की फैक्टरी तथा एसबीआई की इमारत को आग के हवाले कर दिया था। जिनकी कीमत क्रमश 19.60 करोड़, 2.20 करोड़ तथा 11.50 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसके अलावा आंदोलनकारियों ने पूर्व समय के दौरान एक न्यायाधीश की कार आग के हवाले कर दी थी। सूत्रों के अनुसार पूर्व समय के दौरान हुए जाट आरक्षण आंदोलनों में केवल हिसार जिले में 160 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था।

पीडि़तों से दावे मांगे जाएंगे
ताजा घटनाक्रम के बाद हरियाणा सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक नुकसान रेलवे तथा परिवहन विभाग का हुआ है। आंदोलनकारी अब तक प्रदेश में दर्जनों की संख्या में बसों को फूंक दिया गया। प्रदर्शनकारियों का उपद्रव लगातार जारी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस आंदोलन के बाद प्रदेश सरकार द्वारा सारे नुकसान की रिपोर्ट तैयार करके पीडि़तों से दावे मांगे जाएंगे। उसके बाद ही उन्हें किसी तरह का मुआवजा दिए जाने पर चर्चा होगी।