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चेन्नई

TN: 50 फीसदी आरक्षण से निकायों में अधिक संख्या में दिखेंगी आधी आबादी

- सरकार की लोकप्रियता की कसौटी साबित होंगे निकाय चुनाव   - डीएमके और अन्नाद्रमुक गठबंधन के बीच सीधी टक्कर

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चेन्नई. शहरी निकाय चुनाव का शंखनाद हो चुका है। दस साल बाद स्थानीय स्तर की सरकारें बनेंगी। वार्ड स्तर पर रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी। इस गति को बढ़ाने में आधी आबादी का योगदान महत्वपूर्ण होगा। राज्य चुनाव आयोग ने महिलाओं के लिए ५० प्रतिशत पद आरक्षित किए हैं। इस तरह पंचायतीराज संस्थानों में महिलाओं की आवाज गूंजेगी।

चेन्नई कार्पोरेशन का मेयर जो किसी मंत्री पद से कम नहीं है का पद दलित महिला के लिए आरक्षित कर डीएमके ने तो तुरूप का पत्ता खेल दिया है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन शहरी निकाय चुनाव के जरिए अपने शासन की लोकप्रियता को आंक पाएंगे।


तमिलनाडु ने २०१६ में पंचायतीराज संस्थानों में ५० प्रतिशत पद महिलाओं को आरक्षित करने का कानून बनाया था। बहरहाल, उसके बाद निकायों के चुनाव ही नहीं हुए। अंत में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद चुनाव कराए जा रहे हैं।


२० राज्यों में ५० प्रतिशत आरक्षण
तमिलनाडु के अलावा देश के २० राज्यों ने पंचायतीराज संस्थानों में महिलाओं के लिए ५० प्रतिशत का रिजर्वेशन कर रखा है। इनमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल के अलावा कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, केरल व तेलंगाना भी शामिल हैं।
राज्य कुल प्रति. महिला प्रति.
गुजरात १४४०८० ७१९८८
कर्नाटक १०१९५४ ५१०३०
मध्यप्रदेश ३९२९८१ १९६४९०
राजस्थान १२६२७१ ६४८०२
तमिलनाडु १०६४५० ५६४०७
(स्रोत : कुल व महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या केंद्रीय पंचायत राज मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर)

द्रविड़ दलों के बीच टक्कर
इस चुनाव में जहां सत्तारूढ़ डीएमके को अपनी साख बचानी है तो अन्नाद्रमुक को खोया जनमत हासिल करना है। बड़ा खेल २१ नगर निगमों का है। शहरों में हमेशा डीएमके का दबदबा रहा है। वहीं, जयललिता के जाने के बाद लोकसभा और विधानसभा चुनाव हार चुकी प्रमुख विपक्षी पार्टी के समन्वयक ओ. पन्नीरसेल्वम और सह-समन्वयक ईके पलनीस्वामी को साबित करना होगा कि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का उन पर विश्वास कायम है।



भाजपा अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में
सीट समझौता नहीं होनेे से भाजपा ने शहरी निकाय चुनाव अपने बूते लडऩे का फैसला किया है। उसके लिए अग्नि परीक्षा का समय है। पार्टी को साबित करना होगा कि विधानसभा चुनाव में ४ सीटें जीतने का कारण उसकी भी राज्य में उपस्थिति का होना है। अन्नाद्रमुक से केवल इस चुनाव को लेकर गठबंधन समाप्त करने का दावा किया गया है।

सही मायने में नारी सशक्तीकरण
महिला आरक्षण स्वागत भरा कदम है जिसका श्रेय कांग्रेस को ही जाता है। जयललिता ने २०१६ में पंचायतीराज संस्थान में ५० प्रतिशत आरक्षण के बिल पर मुहर लगाई थी लेकिन इसकी नींव कांग्रेस ने रखी। सही मायने में इससे नारी सशक्तीकरण को नया आयाम मिलेगा। महिलाएं भी इस पहल से खुश हैं। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने महिला प्रत्याशियों की पहचान कर ली हैं जो अब जनता की आवाज उठाने को तैयार हैं।र्
– एस. विजयधारणी, तमिलनाडु कांग्रेस विधायक