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सांस्कृतिक आदान-प्रदान का हिस्सा बने तमिलनाडु के कारीगर और छात्र

Kasi Tamil Sangam

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चेन्नई. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी महाकुंभ का अनुभव करने और इसके आसपास के धार्मिक क्षेत्र के भ्रमण पर आए कारीगर, महिला उद्यमी, केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों से लेकर व्यापारियों, किसानों और स्वयं सहायता समूह के संचालकों सहित तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से 1,200 से अधिक प्रतिनिधि सांस्कृतिक एवं शैक्षिक आदान-प्रदान की यात्रा पर हैं। यह इतिहास की पुस्तकों में दर्ज स्थानों का गवाह बनने से लेकर तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने संबंधों के साक्ष्यों को अपनी आंखों से देखने तक, इस प्रतिनिधिमंडल के यात्रा कार्यक्रम में तीन गंतव्य- कुंभ, अयोध्या और वाराणसी शामिल हैं, जो ‘काशी तमिल संगमम’ के तीसरे संस्करण का हिस्सा हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य मंत्रालयों के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस वार्षिक सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत बंधन का जश्न मनाना और उसे मजबूत करना है। काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यासी के. वेंकट रमण घनपति के अनुसार, यह समागम महज दो सप्ताह का आयोजन नहीं है, बल्कि सदियों तक चलने वाला आयोजन है। उन्होंने कहा, ‘‘हनुमान घाट, केदार घाट और हरिश्चंद्र घाट विभिन्न दक्षिणी राज्यों से आए हजारों परिवारों के निवास स्थान हैं, जो दोनों क्षेत्रों के बीच स्थायी संबंध को दर्शाते हैं। सिर्फ हनुमान घाट पर 150 से अधिक घर तमिल परिवारों के स्वामित्व में हैं और इन्हीं की गलियों में हर दिन काशी तमिल संगमम का आयोजन होता है।

तमिलनाडु के ईरोड में आवश्यक तेलों (प्राकृतिक चिकित्सीय उत्पादों, सौंदर्य प्रसाधन, अरोमाथेरेपी, स्पा, परफ्यूम और खाद्य उत्पादों के रूप में व्यापक रूप से लोकप्रिय) का व्यवसाय करने वाली मुद्रा ऋण लाभार्थी नीलाक्षी ने कहा कि हम अपने कई मंदिरों में शिव की पूजा करते हैं और जब भी कोई परिचित काशी आता है, तो हम उनसे पवित्र जल लाने को कहते हैं। मैं यहां पहली बार आई हूं और काशी विश्वनाथ एवं अयोध्या में भव्य राम मंदिर जैसे मंदिरों में दर्शन करना चाहती हूं जो मेरी यात्रा प्राथमिकता में शामिल हैं।