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केमिकल युक्त पानी कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट से दुबारा होगा इस्तेमाल

जल संकट की समस्या से निपटने के लिए कारखानों और दूसरे स्रोतों के कैमिकल युक्त पानी का परिशोधन के बाद दोबारा इसे उपयोग करने लायक बनाना

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Chemical-treated water will be reused from Common Fluent Treatment Plant

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चेन्नई।जल संकट की समस्या से निपटने के लिए कारखानों और दूसरे स्रोतों के कैमिकल युक्त पानी का परिशोधन के बाद दोबारा इसे उपयोग करने लायक बनाना होगा। यह तभी संभव हो पाएगा जब सरकार कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीइटीपी) लगाने का निर्णय लेगी। यह कहना है द तमिलनाडु स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित कुमार जैन का। कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीइटीपी) के जरिए महानगर के उद्योग और कारखानों से निकले गंदे पानी को दोबारा फैक्ट्रियों में पहुंचाया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए लेकिन दुर्भाग्यवश सरकार इसके बारे में कोई विचार नहीं कर रही है। इससे पेयजल बचेगा। साथ ही नालों में बह रहे परिशोधित पानी का उपयोग हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि इससे रोजाना का लाखों लीटर पानी दोबारा इस्तेमाल करने के लायक बन जाएगा। राज्य इंडस्ट्री का गढ़ है और इसमें कई ऐसे उद्योग हैं जिनमें सबसे अहम काम पानी का है। ललित कुमार जैन ने कहा गुजरात में कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा है केमिकल युक्त पानी का दोबारा इस्तेमाल होता है।

ऐसी ही कई सुविधाओं के चलते गुजरात में उद्योग तेजी से फल-फूल रहे हैं। सरकार के लचर रवैये के चलते तमिलनाडु के कई कारखाने गुजरात शिफ्ट हो गए। पानी के महत्व को समझते हुए सरकार को शीघ्र ही सीईटीपी प्लांट आरंभ करने पर तेजी से काम करना चाहिए। ललित कुमार जैन स्टेनलैस स्टील बिजनेस से जुड़े हैं और उनके एसोसिएशन में बारह सौ से अधिक सदस्य हैं जिनमें कइयों के उद्योग हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्से में वे स्टेनलेस स्टील का कारखाना चलाते हैं। ऐसे में पानी के साथ केमिकल भी इस्तेमाल होता है जिससे केमिकल युक्त पानी बर्बाद होता है जिसे नाले या दूसरे जल स्रोत में गिराया जाता है। अगर कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा होती तो इससे रोजाना लाखों लीटर पानी को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया जा सकता है।