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Happy Birthday Chennai: चेन्नई बदला, सांस्कृतिक जड़ें अभी भी गहरी

चेन्नई ने मनाया 377वां हैप्पी बर्थ डे 

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Purushottam Reddy

Aug 22, 2016

Chennai

Chennai

चेन्नई.
महानगर चेन्नई ने सोमवार को अपना 377वां स्थापना दिवस बनाया। इन सालों में चेन्नई में काफी बदलाव आया। यहां तक कि इसका नाम भी मद्रास से बदलकर चेन्नई हो गया। एक छोटे से गांव ने महानगर का रूप लिया, लेकिन एक चीज जो नहीं बदली वह है यहां की सभ्यता एवं संस्कृति। घरों के आगे रंगोली, माथे पर चंदन का टीका, बालों में गजरा एवं पारंपरिक धोती साड़ी पहने स्त्री पुरुष उसी श्रद्धा और उत्साह से मंदिरों में जाते हैं जो प्राचीन काल में देखने को मिलता था। वही आस्था, वहीं विश्वास और वही शांति कहीं भी देखी जा सकती है।


इतिहास के आइने में चेन्नई
भारत में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई भारत का चौथा बड़ा नगर तथा तीसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। यह महानगर अपनी संस्कृति एवं परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। ब्रिटिश लोगों ने 17वीं शताब्दी में एक छोटी-सी बस्ती मद्रासपट्टिनम का विस्तार करके इस शहर की स्थापना की थी। उन्होंने इसे एक प्रधान शहर एवं नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया। बीसवीं शताब्दी तक यह मद्रास प्रेसिडेंसी की राजधानी एवं एक प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र बन चुका था।

शहर का नामकरण
मद्रास नाम मद्रासपट्टिनम से लिया गया है। मद्रासपट्टिनम ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा 22 अगस्त 1639 में चुना गया स्थायी निवास स्थल है। इसके दक्षिण में चेन्नपट्टिनम नामक गांव स्थित था। कुछ समय बाद इन दोनों गांवों के संयोग से मिलकर बने शहर को 'मद्रासÓ नाम दिया गया, परन्तु उसी जगह के निवासी इसे 'चेन्नपट्नमÓ या 'चेन्नपुरीÓ कहते थे। सन् 1996 में शहर का नाम बदल कर 'चेन्नईÓ कर दिया गया क्योंकि 'मद्रासÓ शब्द को पुर्तगी नाम माना जाता था।

यह भी माना जाता है कि इस शहर का पुर्तगी नाम 'माद्रे-डि-सॉइसÓ नामक पुर्तगी सरकारी अफसर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन 1550 में इस जगह को अपना स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। लेकिन कुछ लोग यह मानते हैं कि 'मद्रासÓ शब्द ही तमिल मूल का है, तथा 'चेन्नईÓ शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है। महानगर में विभिन्न संस्थानों की ओर से विभिन्न आयोजन किए गए। इनमें फेस्टिवल जैसा माहौल देखने को मिला।

चेन्नई एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह दक्षिण भारत के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, पल्लव, चोल, पांड्य एवं विजयनगर इत्यादि का केन्द्रबिन्दु रहा है। मईलापुर शहर जो अब चेन्नई का ही हिस्सा है, पल्लवों के जमाने में एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह हुआ करता था।

पुर्तगालियों ने 1522 में यहां आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे साओ तोमे कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नई के उत्तर में पुलीकट नामक स्थान पर बनाया और वहीं डच ईस्ट इंडिया कंपनी की नींव रखी।
22 अगस्त 1639 को संत फ्रांसीसी दिवस के मौके पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से कोरोमंडल तट पर चंद्रगिरी में कुछ जमीन खरीदी। इस इलाके में दमरेला वेंकटपति जो यहां के नायक थे, का शासन था।

उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहां एक फैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष बाद ब्रितानी व्यापारियों ने सेंट जॉर्ज किला बनवाया जो बाद में औपनिवेशिक गतिविधियों का केन्द्रबिन्दु बन गया। 1746 में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर फ्रांसीसी फौजों ने अपना कब्जा जमा लिया। बाद में ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुन: 1749 में एक्स ला चैपल संधि (1748) की बदौलत हुआ।

इस क्षेत्र को फ्र्रांसीसियों एवं मैसूर के सुल्तान हैदर अली के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गई। अठारहवीं सदी का अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया और मद्रास प्रेसिडेंसी की स्थापना की जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गई। ब्रिटिशों की हुकूमत के अधीन चेन्नई शहर एक महत्त्वपूर्ण आधुनिक शहरी क्षेत्र एवं जलसेना केन्द्र बनकर उभरा।

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संस्कृति
चेन्नई भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है। शहर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष इस शहर में पंच-सप्ताह मद्रास म्यूजिक सीजन कार्यक्रम होता है जो 1927 में मद्रास संगीत अकादमी की स्थापना की वर्षगांठ मनाने के साथ आयोजित होता है। इसमें शहर और निकट के सैकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय कर्नाटक संगीत के कार्यक्रम होते हैं। एक अन्य उत्सव चेन्नई संगमम प्रत्येक वर्ष जनवरी में तमिलनाडु राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नई को भरतनाट्यम के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। शहर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान भरतनाट्यम का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है। मद्रास म्यूिजकल एसोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संगठन है जिसने विश्वभर में कार्यक्रम दिए हैं।

चेन्नई तमिल चलचित्र उद्योग जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, का आधार शहर है। यह उद्योग कोडम्बाक्कम में स्थित है जहां अधिकांश फिल्म स्टूडियो हैं। इस उद्योग से आजकल 150 से अधिक फिल्में वार्षिक बनाई जाती हैं और इनके साउण्डट्रैक के एलबम भी शहर को संगीतमय करते हैं।

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ए.आर. रहमान ने चेन्नई को अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलाई है। रहमान को 2009 में स्लमडॉग मिलेनियम के लिए दो ऑस्कर सम्मान मिले थे। चेन्नई में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किए जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है। इनके अलावा अंग्रेजी नाटकों का भी मंचन किया जाता है। शहर के उत्सवों में जनवरी माह में आने वाला पंच-दिवसीय पोंगल प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे दीपावली, ईद, क्रिसमस आदि भी हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। शहर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफिन भी उपलब्ध है, जिनमें पोंगल, डोसा, इडली, वड़ा आदि मिलते हैं।