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‘मां के गहने गिरवी रखे स्पाइक शूज के लिए’

रियो ओलम्पिक जाएंगे चेन्नई के आर. मोहनकुमार

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Purushottam Reddy

Jul 16, 2016

chennai man Sports 01

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पी. एस. विजयराघवन
चेन्नई के अम्बत्तूर निवासी आर. मोहनकुमार का उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उसे सूचित किया गया कि वह रियो ओलम्पिक 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। खुशी से उसके आंसू छलक आए तो वो यादें भी ताजा हो गईं जिन्होंने उसे इस दौड़ में बनाए रखा। मोहन कुमार ओलम्पिक में एथलीट की 4 गुणा 400 मीटर की रिले रेस में दौड़ेगा।

उसका सपना ओलम्पिक पदक का है, जिसे संजोए वह फिलहाल बेंगलूरु में चल रहे कैम्प में पसीना बहा रहा है। डी. जी. वैष्णव कॉलेज के तृतीय वर्ष अर्थशास्त्र में अध्ययनरत मोहन कुमार ने राजस्थान पत्रिका से वार्ता कर अपने संघर्ष को साझा किया।
अच्छा एथलीट होने की वजह से उसे स्पोर्ट्स कोटे के तहत डी. जी. वैष्णव कॉलेज में जगह मिली। मोहन कुमार के अनुसार कॉलेज के कोच एन. वी. राजशेखर और प्रबंधन ने उनको अपना कॅरियर बनाने में बहुत मदद की। उसे कॉलेज से ही दिल्ली सीनियर फैडरेशन में अपनी क्षमता के प्रदर्शन के लिए बुलाया गया था।

हालांकि वहां दौड़ में वह सातवें स्थान पर रहा लेकिन चयनकर्ताओं ने महसूस किया कि मोहन कुमार को ओलम्पिक जाने वाले एथलीट की संभावित सूची में शामिल किया जा सकता है। फिर उसे पोलेंड प्रशिक्षण के लिए भेजा गया, जहां उसका प्रदर्शन निखरा और पांच सदस्यीय भारतीय टीम में उसे जगह मिल गई। वह फिलहाल 46.64 सैकण्ड में 400 मीटर की दूरी पूरी कर रहा है और उसका लक्ष्य अपनी गति को और बढ़ाना है।

बेंगलूरु में चल रहे कैम्प में वह सुबह-शाम पांच घंटे पसीना बहा रहा है। उसका कहना है कि मेरा सपना भारत के लिए ओलम्पिक में दौडऩा था। ओलम्पिक में एंट्री मिल चुकी है अब नजर पदक पर है।
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दौड़ से बदली सोच
14 दिसम्बर 1996 को बी. राजा और मीना कुमारी के घर जन्मे मोहन कुमार का बचपन गरीबी में ही बीता। पिता छोटा-मोटा कांटे्रक्ट का काम उठाकर परिवार को पालते हैं। मां गृहिणी हैं जिन पर मोहन कुमार और उसके भाई व बहन की परवरिश का जिम्मा है। अच्छा धावक बनने की ललक मोहन कुमार के मन में उस वक्त पैदा हुई जब उसे छठवीं कक्षा में एसआरएम स्कूल में आयोजित दौड़ में जबरदस्ती हिस्सा लेने को कहा गया। वह अव्वल रहा और उसकी काबिलियत को स्कूल कोच प्रेम कुमार ने पहचाना। उनके जरिए ही वह गुर सिखता चला गया। उसने स्कूल स्तर पर ही रेसिंग क्लब ज्वॉइन किया। उसने ठान ली कि वह अच्छा एथलीट बनेगा और अपने परिवार का नाम रोशन करेगा।

हौसला बढ़ाती यादें
ओलम्पिक का टिकट मिलने से खुश मोहन कुमार ने अपने जीवन से जुड़े उन पहलुओं को साझा किया जो उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती रहती हैं। मोहन कुमार को याद नहीं आता कि पिता ने उसे कभी पढऩे को कहा होगा। वे खेलकूद से जुड़ी उसकी हर ख्वाहिश को पूरा करने में लगे रहते। इसके लिए वे मित्रों व परिजनों से उधार भी मांगते थे। रूंधे गले से उसे वह पल भी याद आया जब उसकी मां ने स्पाइक शूज दिलाने के लिए गहने गिरवी रख दिए थे। मोहन कुमार अपनी सफलता का माता-पिता, कॉलेज और मित्रों को देते हुए कहते हैं कि पदक हासिल करने के लिए जी-जान लगा देगा।

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क्षमता
400 मीटर की दौड़
46.64 सैकण्ड में

हिस्सा लिया
यूथ एशियन गेम्स 2014, चीन
जूनियर एशियन टे्रक एंड फील्ड, चीन

पसंदीदा क्रिकेटर
एम. एस. धोनी