मद्रास उच्च न्यायालय (Highcourt) ने केन्द्रीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अधीन निर्भया (Nirbhaya) फंड को सुनिश्चित करने एवं महिला सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय अधिकारप्राप्त कमेटी (committee ) का गठन करने व निर्भया फंड का सौ फीसदी उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय ने केन्द्रीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अधीन निर्भया फंड को सुनिश्चित करने एवं महिला सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय अधिकारप्राप्त कमेटी का गठन करने व निर्भया फंड का सौ फीसदी उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
़अधिवक्ता सूर्यप्रकाशम ने जनहित याचिका दायर कर महिलाओं एवं उनकी सुरक्षा के साथ ही त्वरित न्याय देने के लिए अब तक जारी किए गए फंड से कोर्ट को अवगत कराने की मांग की।
याचिका में कहा कि पिछले चार साल में निर्भया फंड के तहत केन्द्र ने तमिलनाडु को 190 करोड़ की राशि स्वीकृत की लेकिन तमिलनाडु सरकार केवल 6 करोड़ ही खर्च कर पाई। शेष राशि फिर से केन्द्र को लौटा दी गई। ऐसे में यह साफ हो रहा है कि महिला सुरक्षा को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अपराध में बढ़ोतरी
याचिका में महिला एवं बच्चियों पर अपराध में बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए तमिलनाडु के गृह सचिव की निष्क्रियता की ओर ध्यान दिलाया गया। तमिलनाडु पुलिस के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए याचिका में बताया गया कि 2016 में तमिलनाडु में 236 बलात्कार की घटनाएं हुई। 2017 में 294, 2018 में 341 तथा 2019 में 31 मई तक 151 ऐसी वारदातें हो चुकी हैं जबकि छेड़छाड़ के मामलों की संख्या तो बहुत ज्यादा है।
महिला उत्पीडऩ के आंकड़े भी पेश
याचिका में ध्यान दिलाया गया कि 2012 में दिल्ली में हुए बलात्कार मामले के बाद महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10 हजार करोड़ का फंड निर्भया फंड के तहत रखा गया। याचिका में महिलाओं एवं बच्चों के अपहरण, महिला उत्पीडऩ के आंकड़े भी पेश किए गए।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता
याचिका में यह भी कहा गया कि केन्द्र के न्याय विभाग की ओर से जारी फंड का भी तमिलनाडु उपयोग नहीं कर सका है। ऐसे में न्यायालय तमिलनाडु सरकार को इस बात के लिए निर्देश दे कि राज्य में महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केन्द्र से मिलने वाले निर्भया फंड का सही दिशा में सौ फीसदी उपयोग किया जाए।