
चेन्नई. तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने रविवार को केंद्र और राज्य की पिछली सरकारों पर तमिलनाडु के मछुआरों को उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया। आरएन रवि ने राजभवन के एक्स हैंडल पर रामेश्वरम में प्रदर्शनकारी मछुआरों के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा तत्कालीन सरकारों ने कच्चतीवु द्वीप के आसपास के समुद्र में मछुआरों को उनके पारंपरिक मछली पकडऩे के अधिकारों से वंचित कर गंभीर पाप किया है।
तब से हमारा मछुआरा समुदाय कठिनाई झेल रहा है। उन्होंने कहा, मछुआरे 1974 के एक अन्यायपूर्ण समझौते का शिकार हैं, जो हमारे गरीब मछुआरों की आजीविका की चिंताओं के प्रति बेहद असंवेदनशील था। उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से मुद्दों का राजनीतिकरण करने के बजाय मिलकर समाधान निकालने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार द्वारा रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने से बहुत मदद मिलेगी। आखिरकार आज राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी तत्कालीन केंद्र सरकार की सहयोगी के रूप में 1974 में हुई गलतियों के लिए समान रूप से जिम्मेदार है।
राज्यपाल ने कहा रामेश्वरम में मछुआरा संघ लगातार तीसरे दिन तंगाचिमदम में विरोध प्रदर्शन कर रहा है। वे गिरफ्तार मछुआरों की रिहाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं। वे केंद्र सरकार से मछुआरों के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता करने का भी आग्रह कर रहे हैं। 300 से अधिक मछुआरे अपने परिवारों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल को याचिकाएं भी सौंपी हैं। रामनाथपुरम जिले में मछुआरों ने श्रीलंका में हिरासत में लिए गए भारतीय मछुआरों की रिहाई और उनकी जब्त की गई नौकाओं को वापस करने की मांग को लेकर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तेज कर दी है।
28 फरवरी को तंगाचिमदम में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन भारी बारिश के बावजूद जारी है, जिसमें करीब 300 मछुआरे और उनके परिवार शामिल हैं। हड़ताल के सातवें दिन भी 700 से अधिक नौकाएं खड़ी हैं, जिससे स्थानीय मछली पकडऩे की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है और रोजाना 1 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और करीब 10,000 से अधिक श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं।
Published on:
03 Mar 2025 06:46 pm

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