
गुरु में सभी 36 गुणों का समावेश- प्रवीणऋषि
चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा जो सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है और नेतृत्व का कौशल जिसके पास हो, हजारों लोगों के मन पर राज कर सकता है वही गुरु बनने योग्य है। गुरु में सभी 36 गुणों का समावेश होता है। अपने जीवन में गुरु का नेतृत्व स्वीकार करें। सम्यकत्व की साधना का पहला पड़ाव ही गुरु के नेतृत्व को स्वीकार करना है। समकित में श्रद्धा होती है बुद्धि का काम नहीं होता। परमात्मा के पास केवल वर्तमान काल होता है, वे मात्र आज की बात करते हैं जबकि संसार के पास भूत और भविष्य की इच्छाएं और बातें होती हैं। हे परमात्मा आप शांत, निर्मल और शांति के सागर हैं।
तीर्थकर के तीन शरीर बताए हैं-भौतिक, कारणम और तेजो। कारणम और तेजो शरीर का संबंध परस्पर है। परमात्मा के शुभ परमाणुओं से तीर्थंकर नामकर्म का शरीर जो यहीं पर विद्यमान है, वह पूरे त्रिजगत के ललाट के समान है। उसे कोई आघात नहीं कर सकता जिसको देखने की शक्ति केवल परमात्मा की भक्ति और अन्तर्मन में है। उनके गुणों को ग्रहण करने उनकी भक्ति से किया जा सकता है। जो परमात्मा के शुभ और सुंन्दर उस रूप का पान करता है उसका कल्याण हो जाता है।
आचार्य मानतुंग कहते हैं सपनों को देखने वाला इस भव में डूबा रह जाता है और भक्ति की आंखों से देखने वाला जन्म-जन्मांतर को पार पा जाता है। नरक में जाने वाला भी तीर्थंकर नामकर्म का बंध कर सकता है इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। समर्पण करने वाले को ही प्रभु के तेजो शरीर का पुण्य प्राप्त होता है। प्रभु के इस शरीर की लेश्या परम शुभ है जिससे प्रसन्नता और शुभता आती है। जैसे-जैसे व्यक्ति ग्रहण करता जाता है उसमें परिवर्तन होता जाता है।
उपाध्याय प्रवर ने कहा- सबसे पहले स्वयं की कमजोरियों और कमियों को खोजें और उन्हें सुधारें। आसक्ति बांधती है और भक्ति बेडिय़ों को तोड़ती है, आसक्ति कमजोर करती है और भक्ति मजबूत बनाती है। सीयू शाह भवन में तीन दिवसीय डिस्कवरी योर सेल्फ शिविर की शुरुआत हुई। इएके अलावा एएमकेएम में पुरुषाकार पराक्रम का ध्यान शिविर तथा अर्हम गर्भ संस्कार के टीचर्स का प्रशिक्षण शिविर आयोजित हो रहा है।
Published on:
18 Aug 2018 11:43 am
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