
Food Waste : हम खा रहे फैला रहे, वो भूखे सो जा रहे
अरुण कुमार
भारत में लोग शादियों या अन्य आयोजनों में शान-शौकत और हैसियत दिखाना पसंद करते हैं। उन्हें मतलब नहीं कि भोजन कितना बर्बाद हुआ... उन्हें मतलब है कि कितने लोगों में उनकी चर्चा हुई। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों में अमीरों की शादियों में 200 से भी ज्यादा खाने के आइटम परोसे जाते हैं। मेजबान भूल जाते हैं कि पेट की भी एक सीमा है! कोई सभी आइटम चखना भी चाहे तो भी आधे पकवान छूट जाएंगे। महज इसी पूंजीवादी सोच के कारण देश के 20 करोड़ से अधिक लोग हर रात भूखे सो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम २०२१ के अनुसार भारत में हर साल 40 फीसदी भोजन शादियों, घरों में लापरवाही, खराब आपूर्ति और अव्यवस्था के कारण बर्बाद हो जाता है। सुनकर अजीब लगता है कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भोजन बर्बाद करने में दूसरे नंबर पर है। यहां हर साल 90 हजार करोड़ का 6.8 करोड़ टन खाना बर्बाद होता है जो औसतन प्रति व्यक्ति 50 किलो है। सिर्फ इतने रुपयों से अगर कोल्ड स्टोरेज और फूड चेन की व्यवस्था हो जाए तो देश में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा। दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में 62 फीसदी भोजन घरों की किचन में बर्बाद होता है। गाय और कुत्ते के लिए निकाली गई रोटी शायद ही उस दिन उस तक पहुंच पाती है।
भारत में हर साल करीब 2100 करोड़ किलो गेंहू खराब हो जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया हर साल इतना ही गेहूं पैदा करता है। मुंबई में हर दिन करीब 69 लाख किलो खाद्य सामग्री कचरे में फेकी जाती है। इससे आधी मुंबई का हर दिन पेट भरा जा सकता है। अफसोस... सिस्टम की खामियां और हमारी लापवाही करोड़ों लोगों की जान ले रही है।
आंकड़ों से समझें भोजन की भयावहता
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में एक तरफ 2.6 खरब डॉलर का 93 करोड़ टन भोजन हर साल बर्बाद हो रहा वहीं, दूसरी तरफ 69 करोड़ लोग हर दिन भूखे सोने को मजबूर हैं। इतने रुपयो से दुनिया के गरीब देशों के लिए भोजन और शिक्षा की व्यवस्था की की जा सकती है। 2030 तक यह संख्या 84 करोड़ पार हो जाएगी और भोजन की बर्बादी दोगुना होने की आशंका है। 2050 तक दुनियाभर के 2 अरब अतिरिक्त लोगों के भोजन के लिए गंभरता से सोचना जरूरी है अन्यथा स्थितियां विकराल होंगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाया सुनियोजित संकट
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया के लोग इन दिनों खाने-पीने की चीजों की रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रहे हैं। इंटरनेशनल पैनल ऑफ एक्सपट्र्स ऑन सस्टेनेबल फूड सिस्टम (आईपीईएस) २०२२ की रिपोर्ट के अनुसार अगर खतरों को रोका नहीं गया तो ऊंची कीमतें हमेशा के लिए हो जाएंगी और दुनिया के आधे देश "विनाशकारी सुनियोजित भोजन संकट की चपेट में आ सकते हैं। भारते ने खतरे को देखते हुए गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी है। चीनी और चावल पर भी जल्द ही रोक लग सकती है।
भोजन की बर्बादी रोकने में दिखाई हिम्मत
- राजस्थान ब्रह्मभोज तो बिहार में समाज के बड़े भंडारों पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी।
- जोधपुर में जैन, माहेश्वरी और घांची समाज ने थालियों में 'जूठा न छोड़ेंÓ संदेश लिखवाए।
- राजस्थान की प्रयास संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव पाल भोजन बचाने को मिशन चाला रहे।
- आईएएस अवनीश शरण ने 18 फरवरी 2022 को एक शादी में भोजन की बर्बादी की फोटो ट्विीट की।
- कोलकाता की एक महिला भाई की शादी में बचा भोजन बांटने रात में ही स्टेशन पहुंच गई।
- कोयम्बटूर में कई संस्थाएं जूठा भोजन न छोडऩे को लेकर अभियान चला रही हैं।
Published on:
30 May 2022 09:27 pm
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