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अपने युग के कबीर थे आचार्य महाप्रज्ञ

तमिलनाडु हिंदी अकादमी की ओर से शनिवार को साहुकारपेट स्थित तेरापंथ सभा भवन में आचार्य महाप्रज्ञ का हिन्दी भाषा और साहित्य को योगदान विषय पर...
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चेन्नई

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Mukesh Kumar Sharma

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Updated: 30 Jun 2019, 11:33 PM IST

Kabir of his era was Acharya Mahapragya

Kabir of his era was Acharya Mahapragya

चेन्नई।तमिलनाडु हिंदी अकादमी की ओर से शनिवार को साहुकारपेट स्थित तेरापंथ सभा भवन में आचार्य महाप्रज्ञ का हिन्दी भाषा और साहित्य को योगदान विषय पर व्याख्यान हुआ। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा चेन्नई के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार बी.एल. आच्छा ने कहा आचार्य महाप्रज्ञ ने सुदूर अतीत को पढ़ा, वर्तमान में जीए और बेहतर भविष्य का मार्गदर्शन देकर गए।

भवानीप्रसाद मिश्र ने महाप्रज्ञ को ‘अपने जमाने के कबीर’ कहा तो इसमें महाप्रज्ञ के हिन्दी साहित्य को क्रांतधर्मी योगदान झलकता है। जैन संतों की जीवनचर्या में घुमक्कड़ी सहज रूप से जुड़ी होती है, यही बात महाप्रज्ञ के जीवन में भी थी, इसी वजह से उनके ‘यात्रा-साहित्य’ में लोक जीवन की अनेक छटाएं विद्यमान हैं। आच्छा ने कहा महाप्रज्ञ के व्याख्या साहित्य में वे उनकी भक्तामर व्याख्या से काफी प्रभावित हुए। आचार्य महाप्रज्ञ ने आंतरिक रूपान्तरण के साहित्य का निर्माण किया।

तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विमलचंद चिप्पड़ ने कहा महाप्रज्ञ का महाकाव्य ‘ऋषभायण’ हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण काव्यकृति है। अकादमी अध्यक्ष डॉ. सु. कृष्णचंद चोरडिय़ा ने कहा हिन्दी भारतीय भूभाग पर सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिन्दी के विकास में महाप्रज्ञ जैसे संतों के योगदान पर चर्चा गतिमान रहना जरूरी है। राजेन्द्र भंडारी के मंगलाचरण के शुरू हुए कार्यक्रम में तेरापंथ न्यास के प्रबंध न्यासी इन्दरचन्द डूंगरवाल ने महाप्रज्ञ का योगदान रेखांकित करते हुए मुख्यवक्ता का परिचय दिया।

संचालन अणुव्रत लेखक मंच के परामर्शक साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने किया। कार्यक्रम में पुखराज बड़ोला, संपतराज चोरडिय़ा, अनिल सेठिया, अमृतलाल डागा, संपत बागमार, सुरेश रांका, प्रहलाद श्रीमाली, शशिलेन्द्र गुप्ता, अजीत तातेड़, कंचन जैन समेत अनेक हिन्दी सेवी और हिन्दी प्रेमी मौजूद थे।

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