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सरकार को झटका हाईकोर्ट ने एचआरसीई विभाग को नए कॉलेज शुरू करने से रोका

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग को उसके द्वारा राज्य भर

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सरकार को झटका हाईकोर्ट ने एचआरसीई विभाग को नए कॉलेज शुरू करने से रोका

सरकार को झटका हाईकोर्ट ने एचआरसीई विभाग को नए कॉलेज शुरू करने से रोका


चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग को उसके द्वारा राज्य भर में प्रस्तावित आठ स्थानों पर नए कॉलेज शुरू करने से रोक दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव बैनर्जी और न्यायाधीश पीडी ऑडीकेसवालू की खंडपीठ ने चेन्नई के टीआर रमेश द्वारा दायर एक रिट याचिका पर आदेश जारी किया। याचिका दायर कर याचि ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एचआर एंड सीई विभाग द्वारा कॉलेज की स्थापना की अनुमति देने वाले जीओ को चुनौती दी थी।

याचि ने तर्क दिया कि मंदिर के धन का उपयोग संबंधित मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए किया जाना चाहिए और वित्तीय मामलों पर निर्णय ट्रस्टियों द्वारा लिया जाना चाहिए। याचि ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्र कोलात्तूर में मईलापुर कपालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा एक कॉलेज की स्थापना के लिए कदम उठाए गए और संबंधित मंदिर ट्रस्टियों द्वारा कोई उचित प्रस्ताव या अनुरोध नहीं किया गया। महाधिवक्ता आर. षणमुगसुंदरम ने अदालत को सूचित किया कि चेन्नई के कोलात्तूर, नामक्कल के तिरुचेंनगोड़े, दिंडीगुल के ओडनछत्रम और तुत्तुकुड़ी के विलातिकुलम में चार कॉलेज पहले ही स्थापित हो चुके हैं और प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।

इसके अलावा जल्द ही अन्य चार कॉलेज भी स्थापित होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि एक बार मंदिर निधि का एक हिस्सा मानव संसाधन और सीई के आयुक्त के नियंत्रण में कॉमन गुड फंड के साथ जमा हो जाता है और ऐसे फंड का उपयोग विभाग द्वारा शैक्षणिक संस्थान शुरू करने के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार से एचआरसीई का कॉलेज स्थापित करने का अभ्यास नया नहीं है, बल्कि यह प्रक्रिया 60 साल पहले शुरू हुई थी और उस समय कुट्रालम में परशक्ति कॉलेज की स्थापना की गई थी।


-पहले ट्रस्टी की हो नियुक्ति
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने एचआर सीई विभाग को संबंधित मंदिरों के ट्रस्टी की नियुक्ति किए बिना नए कॉलेज स्थापित करने से रोक दिया। पीठ ने कहा कि केवल ट्रस्टियों को मंदिर की संपत्तियों और प्रसाद के प्रबंधन की शक्तियां सौंपी जाती हैं। फिट व्यक्ति वित्तीय मामलों पर निर्णय नहीं ले सकता, क्योंकि वह एक स्टॉफ गैप व्यवस्था है। एचआर एंड सीई विभाग को यह भी निर्देश दिया कि पहले से स्थापित कॉलेजों में चार महीने के भीतर नियमित स्ट्रीम के आधार पर हिन्दू धर्म पर एक विषय का परिचय सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा वे संचालित नहीं हो सकते।