
बाजरा एवं उससे बने उत्पाद से सफलता की कहानी लिख रहे स्टार्ट अप
हैदराबाद.
आंध्र प्रदेश के नंदयाल जिले के निवासी केवी रामा सुब्बा रेड्डी ने अपना अधिकांश जीवन दिल्ली के कॉर्पोरेट क्षेत्र में बिताया। अब वह अपनी जड़ों की ओर लौट आए हैं और अपने पैतृक गांव में बाजरा उगाना शुरू किया है। उन्होंने बाजरा को संसाधित करने और खाद्य उत्पाद बनाने के लिए एक कारखाना स्थापित किया है। उन्होंने बताया मैं बिचौलियों को खत्म करके किसान और उपभोक्ता के बीच की खाई को पाटना चाहता था। मैं किसानों से एक निश्चित न्यूनतम मूल्य का आश्वासन देकर उनके साथ समझौता करके बाजरा खरीदता हूं। नतीजतन बाजरा की खेती के तहत क्षेत्र बढ़ रहा है। वह अपने नियमित उत्पादों जैसे लड्डू, चिवड़ा, मुरुकु, बिस्कुट, उपमा रवा, आटा, इडली रवा के अलावा बाजरा आधारित लड्डू, ब्राउनटॉप बिस्किट, ज्वार बिस्किट, ज्वार के लड्डू और रागी लड्डू बेच रहे हैं। सुब्बु रेड्डी की यह कहानी कईयों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
तीन तरह के उपभोक्ता
दरअसल अब कई तरह के लोग हैं जो बाजरा का उपयोग कर रहे हैं। एक तो बीमार व्यक्ति जिसे बाजरे के आहार की सलाह दी गई है इसके साथ ही ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग भी और अब बाजरा की ओर बढ़ रहे हैं। इस संबंध में मिलेट बैंक की संस्थापक प्रियंका कहती हैं अगर मैं अपने बेटे को बाजरे के मिश्रण से बना सूप पीने के लिए कहूं तो वह दौड़ता हुआ आता है। वे कहती हैं अधिकांश लोग तैयार बाजरे के सामान की तलाश में हैं जो नियमित भोजन की तुलना में अधिक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक हो। बाजरा बैंक बाजरा आधारित कुकीज़, नूडल्स और कोल्ड प्रेस्ड तेल के विभिन्न प्रकार बेचता है। आज बाजरा आधारित खाद्य उत्पादों का एक विस्तृत मेनू है जो सभी आयु समूहों और विभिन्न आर्थिक स्तरों के लोगों की जरूरतों को पूरा करता है।
बढ़ रहा कारोबार
बाजरे का कारोबार अब अलग-अलग स्तरों पर काम कर रहा है। फार्म-टू-फोर्क उत्पाद, फ्रैंचाइज़ी, व्हाइट-लेबलिंग और अन्य तरीके हैं, जिनके माध्यम से उद्यमी बाजरा उद्योग में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों से लेकर इतालवी, चीनी, महाद्वीपीय या बेकरी तक किसी भी व्यंजन में स्टार्टअप्स ने उनमें से अधिकांश के लिए बाजरा-आधारित संस्करण ढूंढ लिया है।
राज्य सरकारों ने किए कई उपाय
इस प्रयास के लिए राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की सरकारें विभिन्न माध्यमों से बाजरा किसानों का समर्थन कर रही हैं। वर्ष 2021 से छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ लिमिटेड महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किसानों को समर्थन मूल्य का आश्वासन देकर सीधे बाजरे की खरीद कर रहा है। महिलाओं द्वारा उपज को वन धन विकास केंद्रों में संसाधित किया जाता है और फिर गोदामों में भेज दिया जाता है। इस प्रयास से बाजरा की खपत बढ़ी है और खेती का दायरा भी बढ़ा है। कर्नाटक में सरकार तुमकुर जिले में एक सहकारी जैविक किसान संघ के माध्यम से 42 एफपीओ से बाजरा खरीद रही है। ओडिशा सरकार ने न केवल मोटे अनाज पर व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए कदम उठाए हैं, बल्कि आधिकारिक बैठकों के दौरान नाश्ते के रूप में बाजरा का सेवन अनिवार्य कर दिया है।
Published on:
02 Oct 2022 12:51 pm
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