
People made the cat live
चेन्नई।बिल्ली को कभी लक्ष्मी के प्रतीक रूप में पूजा जाता था लेकिन जमाने में बदलाव के साथ इसके प्रति लोगों का नजरिया बदल गया है, यह बेगानी सी हो गई है। अब बिल्ली की नकारात्मक छवि होने के बाद भी यह पालतू है। ‘करीब 10 हजार वर्ष पहले अफ्रीकी जंगली बिल्ली को पालतू बनाया गया था। यह शुरुआत मध्य-पूर्व में हुई जो सारी दुनिया में फैल गई और यह बिल्ली घरों में घरेलू बन गई। कहीं इसे देवी की तरह पूजते हैं तो कहीं बुराई का प्रतीक माना जाता है। भारत में इसे घर लक्ष्मी का स्थान दिया जाता है।’
ग्रामीण इलाकों में किसान अपने घर में बिल्ली खासकर पालते थे क्योंकि उनकी खेती और घर में अनाज को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खा जाती थी। हालांकि आज भी कई लोग बिल्ली पालते हैं लेकिन वह केवल शौकिया तौर पर किसी लाभ के लिए नहीं। ऐसा लगता है आज बिल्लियों की महत्ता खत्म सी हो गई है। लोग इनको घर मेंं रखने से चिढऩे लगे हैं वे इसे गंदगी फैलाने एवं रसोई वाला जानवर मारते हैं।
बदलते समय के साथ लोगों ने बिल्लियों का भी शिकार करना शुरू कर दिया है। गत दिनों चेन्नई महानगर में बिल्लियों का शिकार और उसका मांस बेचे जाने की चिंताजनक खबरें सुर्खियां बनी थी। इन घटनाओं से लगने लगा है कि लोगों के घरों में लक्ष्मी का स्थान पाने वाली बिल्लियां अब उनका आहार होने लगी है। इन घटनाओं पर अंकुश लगना चाहिए। संभवत: वल्र्ड कैट डे (८ अगस्त) जैसे आयोजनों के जरिए जनता में इसको लेकर जागृति आए।
जागरूकता जरूरी
बिल्लियों के प्रति क्रूरता के बारे में जागरूकता लाने की खास जरूरत है। अभी तक लोगों को इस बारे में विशेष जानकारी भी नहीं है। जब भी बिल्लियों के प्रति क्रूरता की शिकायत मिलेगी संज्ञान लिया जाएगा।
उनका कहना है कि वैसे मेघालय एवं मणिपुर में कुत्ते का मांस खाया जाता है, लेकिन अन्य राज्यों में कुत्ते-बिल्ली का मांस खाने की कोई जानकारी बोर्ड के पास नहीं है। उन्होंने बताया कि साठ साल में पहली बार भारतीय जीवजंतु कल्याण बोर्ड ने दिसंबर २०१७ में राष्ट्रीय प्राणी हत्या यातायात एवं बलि निरीक्षण समिति गठित की है। यह समिति जीवों पर होने वाली क्रूरता के विरुद्ध कदम उठाकर संज्ञान लेगी।
यह समिति जीवों पर होने वाली क्रूरता रोकने का हरसंभव प्रयास करेगी। हालांकि मित्तल ने यह भी कहा कि समिति किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कतई कोशिश नहीं करेगी। साथ ही बताया कि बोर्ड जीवों की सुरक्षा के लिए और भी नियम बनाने का प्रयास कर रहा है।
श्वानों के समान ही नियम
&एनिमल सेफ्टी लॉ के संयोजक डॉ. श्रीकृष्ण मित्तल का कहना है कि भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा बिल्लियों को भी पेट एनिमल्स में शामिल किया है। कुत्तों के समान ही बिल्लियों के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इनमें बिल्लियों को पकडऩा, उनका एबीपी ऑपरेशन करना प्रमुख है। बोर्ड द्वारा हाल ही राज्य सरकारों को इस तरह का ऑपरेशन चलाने का आदेश जारी किया है, इसका खर्च भी बोर्ड द्वारा ही वहन किया जाएगा। बिल्लियों के शिकार के बारे में उनका कहना था कि यह अवैधानिक कृत्य है। हालांकि बोर्ड को अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि आई तो इससे संबद्ध लोगों के प्रति कार्रवाई की जाएगी। हालांकि बोर्ड के हरियाणा स्थित केन्द्रीय कार्यालय में शिकायत सेल स्थापित की है जिसमें वेबसाइट के जरिये पूरे देश से श्वानों एवं बिल्लियों के बारे में शिकायतें मंगाई जाती हैं। हालांकि प्रतिदिन करीब २५ शिकायतें आती हैं लेकिन उनमें बिल्लियों के बारे में शिकायतें नगण्य ही होती हैं।
जन प्रयास...
जिस तरह लोग कुत्ते पालते हैं उसी तरह बिल्ली भी पालते रहे हैं लेकिन बदलते समय के साथ लोग इसे घर में रखना पसंद नहीं करते क्योंकि यह मांसाहारी जीव है जिससे घर में गंदगी और बदबू फैल जाती है। यही कारण है कि बिल्लियों का शहरों में रहना मुश्किल हो गया है। - मनोहरलाल वैभव, पुरुषवाक्कम
कुत्तों की तरह बिल्ली भी मानव का बहुत मददगार जीव रहा है। यही कारण है कि मैंने अपनी बड़ी पोस्ट की नौकरी को तिलांजलि देकर बिल्ली पालन को अपनाया और अपनी सारी संपत्ति यानी मकान भी इन बिल्लियों के पालन-पोषण के लिए बेच दिया और किराये का मकान लेकर इनका पालन पोषण कर रही हूं। इससे मुझे बड़ा सुकून मिला है। - श्रीवारी, अमंजीकरै
किसी समय लक्ष्मी का रूप मानकर पाली जाने वाली बिल्ली आज बेगानी हो गई है। लोग इनको घर में घुसने तक नहीं देते। इसे गंदगी व बदबू फैलाने वाला जानवर मानने लगे हैं। इसी का परिणाम है कि यह उपयोगी जानवर आज विलुप्त होता जा रहा है। - राजेंद्र लूंकड़, सईदापेट
धन्नालाल शर्मा
Published on:
20 Sept 2018 09:40 pm
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