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कल्लार में नजर आई दुर्लभ तितली

साल 2016 के बाद यह फिर से नजर आई हैं। युवा वन्यजीव फोटोग्राफर लेनिन दानी ने इसे अपने कैमरे में भी कैद करने में सफलता हासिल की है

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कल्लार में नजर आई दुर्लभ तितली

कोयम्बत्तूर. नीलगिरी की दुर्लभ टिट तितली शहर के पास कल्लार में देखी गई। साल 2016 के बाद यह फिर से नजर आई हैं। युवा वन्यजीव फोटोग्राफर लेनिन दानी ने इसे अपने कैमरे में भी कैद करने में सफलता हासिल की है। अंगूठे के नाखून के आकार की यह तितली दुर्लभ होती जा रही है। इसे नीलगिरी टिट (हाइपोलिकेना निलगिरिका) के नाम से जाना जाता है। 20 वर्षीय बीएससी आईटी ग्रेजुएट लेनिन के अनुसार वह कल्लार नदी के किनारे बड़े पैमाने पर प्रवासन के लिए आई तितलियों को देख रहे थे। इसी दौरान उसने पत्थर पर बैठी इस असामान्य तितली को देखा। कैमरा पास ही था , इसलिए फोटो उतार लिए। लेनिन के दावे की तमिलनाडु बटर लाई सोसाइटी (टीएनबीएस) के संस्थापक मोहन प्रसाद ने पुष्टि की है। मोहन ने पहली बार 2013 में कल्लार में यह तितली देखी थी। उन्होंने बताया कि यह बहुत कम ही नीचे आती है। नीलगिरी टिट पश्चिमी घाटों के लिए बहुत ही दुर्लभ तितली है। हालांकि श्रीलंका में यह आम तौर पर दिखाई देने वाली तितली है। पश्चिमी घाट में पिछले कुछ वर्षों में यह तितली बहुत कम दिखी है। इसे पहली बार ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रेडरिक मूर ने 18 8 3 में नीलगिरी की पहाडिय़ों में देखा था ।हाल ही में केरल के चिन्नार वन्यजीव अभयारण्य में भी इसे देखा गया।

संतों का आध्यात्मिक मिलन
कोयम्बत्तूर. मेट्टूपालयम में तेरापंथ धर्म संघ के मुनि प्रशांत कुमारआदि ठाणा२ व श्रमण संघीय संत डॉ.समकित मुनि आदि का आध्यात्मिक मिलन हुआ।डॉ.समकित कोय बत्तूर से विहार कर मेट्टूपालयम पहुंचे जहां संघ ने उनका भाव भीना स्वागत किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपनी सोच अच्छी रखें, तो हमारा बोलना, सुनना और देखना भी अच्छा होगा। बाहर की परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं लेकिन मन को तो हम नियंत्रित कर सकते हैं।मुनि प्रशांत कुमार ने कहा कि जहां संत होते हैं वहां स्वत:ही आध्यात्मिक माहौल बन जाता है।इस मौके पर कोय बत्तूर, चैन्नई, मैसूर,ऊटी से आए श्रावक -श्राविकाएं मौजूद थे। सभी का मेटटूपालयम जैन संघ के अध्यक्ष किशोर कोठारी ने स्वागत किया।