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Tamilnadu: प्रवासियों का योगदान रहा है अहम

सिरोही (Sirohi) जिले के प्रवासियों ने रखी राय, राजस्थान पत्रिका (Rajasthan Patrika) की मेजबानी में चुनावी (Election) परिचर्चा, राजस्थान(Rajasthan) पंचायत राज (Panchayat raj) चुनाव को लेकर

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Sirohi - chennai pravasi rajasthan patrika talk show

Sirohi - chennai pravasi rajasthan patrika talk show

चेन्नई. राजस्थान के लोगों ने तमिलनाडु को भले ही अपनी कर्मभूमि बनाया हो लेकिन उनका अपनी जन्मभूमि राजस्थान से बराबर नाता बना हुआ है। वे अपनी जन्मभूमि के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। कई प्रवासियों ने शिक्षा, चिकित्सा समेत अन्य क्षेत्रों में अपनी जन्मभूमि के लिए अनुकरणीय कार्य किए हैं। कुछ ऐसी ही राय व्यक्त की चेन्नई में निवास कर रहे सिरोही जिले के प्रवासियों ने। राजस्थान पंचायती राज चुनाव को लेकर सोमवार को यहां राजस्थान पत्रिका चेन्नई की मेजबानी में आयोजित चुनावी परिचर्चा में प्रवासियों ने अपनी राय रखी। प्रवासियों का कहना था कि प्रवासी अपनी माटी को कभी भूल नहीं सकते। उनका राजस्थान के प्रति अटूट लगाव है। बिजनेस का कुछ हिस्सा वे आज भी राजस्थान के विकास में लगा रहे हैं। चुनाव के वक्त भी कई बार प्रवासी राजस्थान जाते हैं। कई प्रवासियों के नाम राजस्थान में भी अपने गांव-शहर की मतदाता सूची में दर्ज होने से वे अपने मताधिकार का उपयोग करते रहे हैं। परिचर्चा का संयोजन राजस्थान पत्रिका चेन्नई के मुख्य उप संपादक अशोकसिंह राजपुरोहित ने किया।
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प्रशासनिक सहयोग से बेहतर विकास
सिरोही जिले के मंडार में प्रवासियों ने विकास के कई कार्य करवाए हैं। आज से कोई तीन दशक पहले गांव में बिजली का प्रबंध किया। तब सोलर लाइटें लगवाईं। इलाके में फ्लोराइड की समस्या अधिक होने की वजह से आरओ प्लान्ट लगवाया। अस्पताल में भी समय-समय पर सुविधाओं को लेकर सहयोग देते रहे हैं। समय-समय पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है। दिव्यागों के सहयोग के लिए भी प्रवासी आगे रहे हैं। यदि प्रवासियों को प्रशासन एवं सरकार का समुचित सहयोग मिले तो वे और बेहतर ढंग से ग्रामों एवं शहरों के विकास के काम करा सकते हैं।
-हुकमीचद शाह जैन, मंडार निवासी।
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आमजन की भागीदारी
पंचायती राज व्यवस्था में आमजन की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। आज गावों में विकास के काम तो हुए है लेकिन मौजूदा तकनीकी के युग में गांवों को और आगे ले जाने की दरकार है। आज मतदाता भी पहले की तुलना में अधिक जागरूक हुआ है। जरूरत इस बात की है कि सभी मिलकर गांवों के विकास में सहभागी बनें तो गांव का विकास और तेज गति के साथ हो सकता है। सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तभी ग्राम स्वराज की भावना को बल मिल सकेगा।
-जीतू लोहार, रायपुर निवासी।
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बेहिसाब खर्च पर लगे अंकुश
सरपंच के चुनाव में इस साल से प्रचार-प्रसार के लिए खर्च की सीमा को बढ़ाकर पचास हजार किया है। पहले यह सीमा 20 हजार थी, लेकिन मौजूदा समय में देखा जाए तो सरपंच के चुनाव में कई जगह बेहिसाब खर्च होता है। जरूरत इस बात की है कि इन अनावश्यक खर्च परक अंकुश लगाया जाए। प्रशासन को इस दिशा में सोचना चाहिए।
-वालाराम पटेल, सुनानी निवासी।
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मिलेगा समझने का मौका
इस बार सरपंच के चुनाव में नामांकन पत्र भरने के बाद प्रचार केे लिए एक सप्ताह से अधिक का समय मिल रहा है। यह एक अच्छा एवं सराहनीय कदम है। इससे मतदाता को प्रत्याशी को समझने का अवसर मिल जाता है। पहले अब तक चुनाव से मात्र एक दिन पहले ही नामांकन पत्र भरे जाते थे, उसी दिन नामांकन पत्रों की जांच होती थी, उसी दिन वापसी के बाद अंतिम सूची तैयार हो जाती थी। यानी सारा काम एक ही दिन में होने से मतदाताओं को यह पता ही नहीं चल पाता था कि चुनाव में खड़ा कौन है।
-किशोरसिंह राजपूत, कालन्द्री निवासी।
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पढ़े-लिखों से बेहतर विकास
इस बार के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान हटा दिया है। पिछले चुनाव में सरपंच के लिए आठवीं पास की योग्यता को लागू किया था। एक तरह से देखा जाए तो यदि पढ़ा-लिखा व्यक्ति जीतकर सरपंच बनता है तो गांव का विकास बेहतर तरीके से कर पाएगा। सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक लोगों तक पहुंच पाएगा। दूसरा पहलू यह भी है कि कई पुराने लोग अनुभवी होते हैं चाहे वे कभी स्कूल न गए हैं। ऐसे में यदि अनुभवी व्यक्ति भी चुनकर आते हैं तो निसंदेह गांव का विकास हो सकेगा।
-किशन पुरोहित, मनोरा निवासी।