चेन्नई

कोल्ड वॉर की धुरी रहे रूस की ‘वैक्सीन’ का कोल्ड स्टोरेज ने निकाला पसीना

- तमिलनाडु में स्पूतनिक-वी की अब तक केवल दस हजार खुराक दी गई   - कोविशील्ड और कोवैक्सीन ही काम आई  

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Feb 26, 2022
कोल्ड वॉर की धुरी रहे रूस की 'वैक्सीन' का कोल्ड स्टोरेज ने निकाला पसीना

पुरुषोत्तम रेड्डी @ चेन्नई.

यूक्रेन पर हमले से विश्व युद्ध के हालात पैदा करने वाले रूस ने कोविड-१९ से लड़ाई में जब सबसे पहले स्पूतनिक-वी ईजाद कर दुनिया को चौंकाया था, वह टीका तमिलनाडु में दोयम साबित हो रहा है। इस टीके को लगाने में लोगों की दिलचस्पी नहीं होने से अस्पताल इसका ऑर्डर भी निरस्त कर रहे हैं। ुकुछ महीने पहले तक स्पूतनिक-वी को सबसे बड़ी कोविड रोधी वैक्सीन माना जा रहा था, लेकिन आज हालत यह हो गई है कि निजी अस्पतालों में करोड़ों रुपए की वैक्सीन बेकार पड़ी है।

तमिलनाडु के लोक स्वास्थ्य निदेशालय के अनुसार, राज्यभर के निजी अस्पतालों ने केवल 10 हजार स्पूतनिक-वी दी गई हैं। वहीं 8.2 करोड़ कोविशील्ड और 1.5 करोड़ कोवैक्सीन लगाई गई है।

ऑर्डर रद्द कर रहे अस्पताल
चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर पल्मोनोलॉजिस्ट डा. सौमित्रा सिन्हा रॉय ने बताया कि कीमत, रखरखाव और ठंडे भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) के अभाव के चलते हमने शुरुआत से ही रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को नहीं खरीदा। हम कोविशील्ड और कोवैक्सीन की खुराक दे रहे है। कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने रूस के स्पूतनिक- वी वैक्सीन का ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। अस्पतालों की ओर से टीके के ऑर्डर रद्द किए जाने के पीछे की वजह सरकार की ओर से दी जाने वाली अन्य टीकों की मुफ्त खुराक की आपूर्ति में वृद्धि को बताया जा रहा है।

कोल्ड स्टोरेज बड़ी वजह
नाम न छपने के शर्त पर एक अन्य अस्पताल के अधिकारी ने बताया कि कम मांग और वैक्सीन को स्टोर करने के लिए अत्यधिक ठंडे भंडारण की वजह से स्पूतनिक वी के ऑर्डर रद्द कर दिए गए।

टीका भी महंगा
माधवरम स्थित अस्पताल में कोरोना रोधी टीका लगाने आए रमेश कुमार ने बताया कि डॉ रेड्डीज लैब द्वारा आपूर्ति की जा रही वैक्सीन की कीमत 995 रुपए है और 150 रुपए सेवा शुल्क अलग से चुकाना पड़ रहा है। जबकि दूसरी ओर सरकार की ओर से दी जाने वाली अन्य टीकों की खुराक मुफ्त है।

केवल 1 प्रतिशत ग्राहक
मांग में कमी के चलते हमने रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी की 7-8 हजार खुराक ही खरीदी थी। हमारे पास 500 खुराक अभी भी बची है। 8 हजार टीके खपाने में भी लम्बा समय लग गया। उम्मीद है कि मार्च के अंत तक यह भी समाप्त हो जाएगा। लोगों का बमुश्किल १ फीसदी वर्ग ऐसा है जो स्पूतनिक-वी लगाना चाहता है।
- संजय पांडे, जोनल निदेशक फोर्टिस अस्पताल वडपलनी

Published on:
26 Feb 2022 03:21 pm
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