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तमिलनाडु का स्वर्णिम सेंगोल स्थापित होगा संसद में

सेंगोल का आशय राजदंड से है

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तमिलनाडु का स्वर्णिम सेंगोल स्थापित होगा संसद में

तमिलनाडु का स्वर्णिम सेंगोल स्थापित होगा संसद में

चेन्नई. यह तमिलनाडु के लिए गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 25 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन में स्पीकर के आसन के पास एक स्वर्णिम राजदंड स्थापित करेंगे। इस स्वर्णिम राजदंड को सेंगोल कहा जाता है जिसका तमिलनाडु से गहरा नाता है।
चोल वंश से जुड़ा इतिहास
चोल वंश के समय से सेंगोल महत्वपूर्ण रहा है। सेंगोल एक तमिल शब्द है जिसका अर्थ "न्याय" है। वर्तमान में यह सेंगोल इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा गया है। चोल राजवंश में नए राजा के सिंहासन पर बैठते समय नए राजा को सेंगोल शासन के प्रतीक के रूप में दिया जाता था। जिस व्यक्ति को यह सेंगोल दिया जाता है, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह बिना किसी पक्षपात और न्यायपूर्ण तरीके से शासन करेगा।

मद्रास में बना सेंगोल

स्वर्णिम सेंगोल का निर्माण तत्कालीन मद्रास के आभूषणकार वुम्मिडी बंगारू चेट्टी ने तिरुवादुरै आदिनम मठाधिपति अम्बलवान देशिकर (१९३७-५१) के आदेश पर बनाया था। पांच फीट लंबे राजदंड के शीर्ष पर एक नंदी का चिन्ह है जो न्याय का प्रतीक है।