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फसल नुकसान पर सरकार की घोषणा से नाखुश हैं तमिलनाडु के किसान

-क्षति का उचित का आकलन कर दिया जाए मुआवजा

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फसल नुकसान पर सरकार की घोषणा से नाखुश हैं तमिलनाडु के किसान

फसल नुकसान पर सरकार की घोषणा से नाखुश हैं तमिलनाडु के किसान


विशाल केशरवानी
चेन्नई. पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश ने राज्य भर के किसानों को एक बार फिर से रुला दिया है। हालांकि सरकार ने नुकसान की भरपाई की घोषणा की है, लेकिन किसानों के लिए यह पर्याप्त नहीं है। सरकार की घोषणा पर नाखुश होकर डेल्टाई जिलों के किसानों ने सरकार से मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा घोषित फसल नुकसान के मुआवजे को बढ़ाने की अपील की है। किसानों का कहना है कि एक फसल उगाने के लिए कम से कम 40 हजार ्रप्रति एकड़ तक खर्च होता है और सरकार ने 8 हजार प्रति एकड़ देने की घोषणा की है और इससे हुए नुकसान की किसी तरह से भरपाई नहीं हो पाएगी।

घोषित मुआवजे में वस्तुओं की मौजूदी कीमतों में बढ़ोतरी का कारक होना चाहिए। इस तरह की घोषणा करने के बजाय मुख्यमंत्री को पिछले साल जारी फसल मुआवजे के लिए पिछली एआईएडीएमके सरकार के जीओ को ही दोहराना चाहिए था। इसके अलावा फसल नुकसान के आकलन का तरीका भी वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए, क्योंकि नुकसान की सीमा एक गांव से दूसरे गांव में भिन्न होती है। इसलिए मुआवजा भी हुए नुकसान के प्रतिशत के आधार पर होना चाहिए। किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित मुआवजे और इनपुट को प्रभावित किसानों को नकद में वितरित किया जाना चाहिए।

अगर सरकार धान के बीज और उर्वरक जैसे इनपुट के बजाय नकद वितरित करेगी तो वे उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से खरीद लेंगे। मुख्यमंत्री ने 20 हजार प्रति हेक्टेयर यानी महज 8 हजार रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा की है। यह 74,100 रुपए (30 हजार रुपए प्रति एकड़) के एक तिहाई से भी कम है, जोकि स्वीकार्य नहीं है। ज्ञातव्य है कि भारी बारिश से फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए कावेरी डेल्टा जिलों का दौरा करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा गठित मंत्रियों की एक टीम ने हाल ही में राज्य सचिवालय में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। सहकारिता मंत्री आई पेरियासामी ने गठित टीम का नेतृत्व किया था। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने उन किसानों के लिए 20 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की घोषणा की थी जिनकी फसल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। साथ ही प्रति हेक्टेयर 6,038 रुपए मूल्य के कृषि इनपुट देने की भी घोषणा की गई थी।


इनका कहना है

फोटो. वीरप्रभास
किसानों द्वारा प्रति एकड़ के लिए कम से कम 30 से 40 हजार खर्च करना पड़ता है। लेकिन सरकार द्वारा 8 हजार देने की घोषणा की गई है, जोकि पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में किसानों का कर्ज और भी अधिक हो जाएगा। सरकार को मुआवजे की राशि को नुकसान का उचित आकलन कर करना चाहिए।
सी. वीरप्रभास, राज्य प्रवक्ता, नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन


फोटो विनोज
विपक्षी दल के नेता होने के रूप में मुख्यमंत्री क्षतिग्रस्त फसलों की भरपाई के लिए 30 हजार से अधिक प्रति एकड़ देने की मांग करते थे और किसानों को अपना हितैसी बोलते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद किसानों की पेरशनियों को भुल गए। सही से मूल्यांकन कर किसानों को उचित मुआवज देना चाहिए।
-विनोज पी. सेल्वम, अध्यक्ष, वीजेवाईएम

फोटो जयकुमार
अन्नदाता से किया गया वादा पूरा नहीं किया जा रहा है। सत्ता में आने से पहले डीएमके ने कई वादे किए, लेकिन सत्ता आते ही सब भुल गए। इस मुसिबत की घड़ी में किसानों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए। अन्यथा इसका खामियाजा आम जन को भरना पड़ सकता है।
-डी. जयकुमार, पूर्व मंत्री

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