
The children saw 'black' in delusion, done a lot of fun
चेन्नई।आरसीसी (राजस्थान कास्मो क्लब) की ओर से हजारों बच्चों को मायाजाल में ‘काला’ फिल्म दिखाई गई। इस मौके पर अध्यक्ष संजय भंसाली, प्रबंध न्यासी श्रीपाल कोठारी, न्यू क्लोथ चेयरमैन अश्विन जांगड़ा, सचिव संदीप भटड तथा फाउंडेशन के सचिव विजय कांकरिया उपस्थित थे।
इस मौके पर 18,000 बच्चों को नए स्कूल यूनिफार्म सेट वितरित किए गए। ये बच्चे साठ सरकारी व निजी स्कूलों के थे। इस कार्यक्रम में करीब 1000 जरूरतमंद बच्चों ने भाग लिया। उन्होंने काला फिल्म देखने के साथ ही कई मनोरंजक कई कार्यक्रम भी देखे। कार्यक्रम में रेवती मेनन ने कहा कि इंसान पढ़ाई करके जो भी पाना चाहता है उसे हासिल कर सकता है। उन्होंने बच्चों को अच्छी पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
खिंवराज चोरडिय़ा ट्रस्ट के ट्रस्टी भरत चोरडिय़ा ने कहा कि बच्चे पढ़ाई करके बड़े बनें और दूसरे जरूरतमंद बच्चों की सहायता करें। कार्यक्रम में नमिता, अरुधंति, संजना सिंह, दीपक दिनकर समेत कई फिल्मी हस्तियों ने भाग लिया।
इन्होंने भी बच्चों का जमकर मनोरंजन किया। नृत्य के भी कार्यक्रम हुए। क्लोथ बैंक प्रोजेक्ट के तहत अबतक 160 लाख क्लोथ का वितरण विभिन्न संस्थाओं के अलावा देश भर में प्राकृतिक आपदाओं के समय पीडि़तों किया जा चुका है। यह संस्था गज भर कपड़ा योजना के तहत पुराने कपड़ों को एकत्रित कराती है। इन कपड़ों को धोने एवं आयरन के बाद बैग में पैक किया जाता है।
फिर उनका वितरण किया जाता है। इसके अलावा नए कपड़े की योजना के तहत नए कपड़ों की सिलाई कराई जाती है। इसके बाद वितरण किया जाता है।
क्लब की ओर से न्यू स्कूल यूनिफार्म योजना के तहत विद्यार्थियों को यूनिफार्म वितरित की जाती है। इस मौके पर पदम तालेड़ा को स्टार ऑफ आरसीसीएफ का अवार्ड दिया गया।
इस दौरान राकेश मोहता, सुरेश गुन्देचा, अजय जालान, कुशाल कांकरिया तथा हेमन्त दुगड़ उपस्थित थे।
जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद को मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाने का विरोध करते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। अधिवक्ता एम. राधाकृष्णन ने अपनी याचिका में कहा है कि न्यायाधीश प्रसाद ने न तो मद्रास हाईकोर्ट में, न ही अधीनस्थ व ट्रिब्यूनल में १० साल की सेवा दी है। संविधान की धारा २१७(२)(बी) के तहत बिना १० साल की सेवा के यह नियुक्ति अमान्य है। मामले पर प्रथम खंडपीठ की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश पीटी आशा ने सोमवार को कहा कि जज बनाने के लिए व्यक्ति की उपयुक्तता को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा गया है। इस दौरान सुप्रीट कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया गया। जिसके बाद मामले को खारिज कर दिया गया। गौरतलब है कि इससे पहले सुब्रमणियम तमिलनाडु सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल थे।
Published on:
12 Jun 2018 05:12 am

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