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रोशनी बन रही जीवन का अंधेरा?

बिजली विभाग आमतौर पर शहर में खंभों पर से जाते बिजली के तारों की जांच परख करते रहते हैं। विभागीय कर्मचारी यह भी देखते रहते हैं कि कहीं ऐसी...

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The illumination of the darkness of life?

The illumination of the darkness of life?

नेल्लोर।बिजली विभाग आमतौर पर शहर में खंभों पर से जाते बिजली के तारों की जांच परख करते रहते हैं। विभागीय कर्मचारी यह भी देखते रहते हैं कि कहीं ऐसी समस्या तो नहीं है कि किसी लाइन में खराबी होने पर ठीक होने में लंबा समय लग जाए। परेशानी यह है कि बदलते समय के साथ विद्युत विभाग के कर्मचारी भी आलसी हो गए, वे कभी बाहर शहर की गलियों में जाकर यह देखते ही नहीं है कि लाइनों में कोई समस्या तो नहीं है। इसी का फायदा उठाकर टेलीफोन, डिश एवं इंटरनेट आदि के वायर भी कंपनियों ने इन बिजली के खंभों पर से ही डाल दिए जिस पर बिजली विभाग ने कोई ऐतराज नहीं जताया।

ऐसे में ये तार इतने अधिक हो गए कि कभी लाइट, इंटरनेट या डिश का तार खराब हो जाए तो इनके झुंड में से उसका पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इन तारों ने जितनी लोगों की सुविधा बढ़ाई है उतनी ही दुविधा भी बढ़ा दी है। इन तारों का गुच्छा लोगों के घरों के पास खड़े खंभे पर होने के कारण उनके लिए खतरा बन गए हैं। कभी भी आंधी या तेज हवा आने पर इन तारों के भिडऩे से उनमें निकलने वाली चिंगारियों से घर में आग लगने का खतरा बना रहता है।

इसका पता होने के बावजूद बिजली विभाग इस बारे में कोई कदम नहीं उठाता। इसी का परिणाम है कि इन तारों की संख्या में लगातार बढ़त होती जा रही है।
बिजली विभाग की इस लचर व्यवस्था से शहरवासी परेशान हैं। शहर के बाजारों ही नहीं रहवासी इलाकों में भी न केवल खंभों बल्कि मकानों के बाहर भी बड़ी संख्या में तार लटक रहे हैं। ये लटकते तार व्यवसायियों ही नहीं इलाके के लोगों की परेशानी का सबब बनेे हुए हैं।

तारों के इस झुंड के कारण कभी लो वोल्टेज रहता है तो कभी शॉर्ट सर्किट का खतरा बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कभी बिजली में खराबी होती है तो कई दिन तक खराबी पकड़ में ही नहीं आती है। इतना ही नहीं तेज हवा या आंधी आने पर तार टूटकर गिर जाते हैं जिससे दुर्घटना भी हो जाती है। उनका कहना है कि बिजली विभाग को कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब तक विभाग तार नहीं बदलेगी खतरे से राहत नहीं मिलेगी। उनका यह भी कहना है कि व्यवसायियों के साथ राहगीरों में भी हमेशा भय बना रहता है कि कहीं बिजली का तार टूटकर गिर न जाए जिससे वह दुर्घटना का शिकार हो जाए।

सराफा बाजार का भी है बुरा हाल

शहर में सबसे ज्यादा रद्दी वाले और शहर में आय के मुख्य केंद्र मंडपाल स्ट्रीट, अचारी स्ट्रीट, काकरलवारी स्ट्रीट, गिड़दंगी स्ट्रीट जैसे इलाकों में हिलते-झूलते तारों के झुड से व्यवसायी परेशान हैं। दुकानों के बाहर खड़े बिजली के खंभों पर बंधे विभिन्न कंपनियों के तारों से उनकी दुकानें ही नहीं बल्कि उनके नाम भी ढंक गए हैं। कई बार तो दुकान दारों ने तारों को काट भी दिया पर कोई फर्क नहीं पड़ा। फिर से केबल वाले और तार जोडक़र चले गए।

सरकार नहीं उठाती सख्त कदम

प्रशासन द्वारा इन इंटरनेट, डिश और टेलीफोन कंपनी वालों पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाती। इसी का परिणाम है कि टेलीफोन, इंटरनेट एवं डिश आदि कंपनियां अपनी मनमानी कर बिजली के खम्भों पर तार बांधकर छोड़ कर चले जाते हैं। बिजली क तारों के साथ लगे इन विभिन्न कंपनियों के तारों से आए दिन छोटे-मोटे ब्लास्ट होते रहते हैं। गर्मी के दिनों में ट्रांसफॉर्मर गर्म होकर फटने लगते हैं। इस खतरे को मद्देनजर रखते हुए बिजली विभाग को भी इनके विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। - एवी रमेश बाबू, सर्राफा व्यापारी