
The person who believes in religion is secular: the owner
चेन्नई।भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि हमारे देश में विकसित धर्म सेवा, त्याग और ज्ञान से पोषित होता है। सभी धर्म आपको ईश्वर व ज्ञान प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। इसलिए जो कोई भी व्यक्ति अपने धर्म में विश्वास रखता है वह धर्मनिरपेक्ष होता है। यहां कीलपॉक स्थित भवन्स राजाजी विद्याश्रम में शुक्रवार को भगवान महावीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित २०वें महावीर अवार्ड वितरण कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने यह बात कही। स्वामी ने कहा कि जिन लोगों को अपने धर्म में विश्वास नहीं होता वे द्वेष, आतंक और हिंसा फैलाते हैं। इन्हीं कारकों को दूर करने के लिए यह जरूरी है कि धर्म का आधुनिकीकरण हो।
सेबी के पूर्व चेयरमैन डी. आर. मेहता ने अच्छे कार्यों को आलोक में लाने की मीडिया से अपील की। उनका कहना था कि इस तरह के अवार्ड समारोह से लोगों में सद्कार्यों की ओर रुझान बढ़ेगा। इससे पहले फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रसन्नचंद जैन ने स्वागत भाषण और विनोद कुमार ने आभार प्रदर्शित किया। समारोह में फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी एन. सुगालचंद जैन और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। पुरस्कार में दस लाख रुपए का नकद एवं शॉल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा : स्वामी
चेन्नई. उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी जिसे रामलला के जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है उस नगरी में स्थित विवादित ढ़ांचे की जगह राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। आगामी पांच दिसम्बर से सर्वोच्च न्यायालय में इस विषय पर सुनवाई होगी और फैसला हमारे पक्ष में आएगा। यह कहना है भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का जो शुक्रवार को चेन्नई में भगवान महावीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित महावीर अवार्ड कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। स्वामी ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे को एनडीए की सरकार से जोडऩे से कई अन्य राजनैतिक पार्टियां इसका गलत इस्तेमाल देश के अन्य संप्रदाय के लोगों को भ्रमित करने में कर रही हंै।
राम मंदिर अयोध्या में बनेगा इससे यह कतई स्पष्ट नहीं होता कि भाजपा सरकार मुस्लिम संप्रदाय के विरोध में काम करती है। हाल ही में तीन तलाक के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का जो फैसला आया है उसमें केंद्र सरकार की अहम भूमिका रही है। स्वामी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि भारत देश में सभी धर्म के लोगों को अपने धर्म मानने की खुली छूट है। देश के संविधान की धारा 25 के अनुसाार अगर किसी समुदाय विशेष का धर्म नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है तो ऐसे में यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसमें हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश करे। सभी धर्मों को एक व्यवस्था के अंतर्गत लाने की जरूरत है। अब तक केवल हिंदू धर्म संस्थानों को सरकारी तंत्र की निगरानी में लाया गया है। जैसे-जैसे देश में कई अन्य धर्मों की सक्रियता व वर्चस्व बढ़ रहा है वैसे में जरूरी है कि हम अन्य धर्म को भी सरकारी तंत्र की निगरानी में लाएं। इसकी शुरुआत उत्तरप्रदेश से हो चुकी है अब जरूरी है कि इसे देशभर में लागू किया जाए।
इनको मिला अवार्ड
श्रेणी अवार्ड विजेता
अहिंसा और शाकाहार श्रेणी एनिमल ऐड चैरिटेबल ट्रस्ट, उदयपुर
शिक्षा ऐम फॉर सेवा, चेन्नई
चिकित्सा डा. एम. सी. नाहटा, इंदौर
समुदाय और सामाजिक सेवा अर्पणा रिसर्च एंड चैरिटीज ट्रस्ट, हरियाणा
Published on:
09 Sept 2017 09:39 pm
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