छतरपुर. शहर में करीब 100 परिवार हैं, जो 43 साल से सडक़ किनारे अस्थाई मकान बनाकर रह रहे हैं। इनके विस्थापन के लिए नपा प्रशासन ने 7 साल पहले मकान दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक वह सिर्फ कागजों में ही सीमित है। मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर जन सुनवाई में 115 आवेदन दे चुके हैं। अधिकारी हर बार आश्वासन देते हैं। मगर होता कुछ नहीं है। नगर पालिका में सीएमओ के पास जाओ तो वहां भी अश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। घर न होने से इस समाज के सामने सबसे बड़ी समस्या बेटे-बेटियों के विवाह की आ रही है।

सात साल पहले आश्वासन देकर हटाया
सात साल पहले नरसिंह मंदिर के पास रहते थे लेकिन यहां से नगर पालिका ने हटा दिया। उस समय भरोसा दिया था, कि आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी उम्मीद में वहां कच्चे घर उजाडक़र रोड पर कच्चे मकान तानकर रहने लगे। तब से लेकर अभी तक नपा के चक्कर काट रहे हैं। न तो आवास मिल रहा है और न हीं अन्य सरकारी सुविधाएं। कुछ परिवार तितर-बितर होकर शहर के अन्य हिस्सों में रहने लगे हैं।

ये कहना है लोगों का
समाज के मुखिया मन सिंह बताते है कि इस शहर के लिए नए नहीं हैं। अन्य जिलों में पट्टे और आवास दिए गए हैं। छतरपुर की ऐसी जगह है, जहां हम लोगों को न तो रहने के लिए पट्टे दिए जा रहे हैं और न ही पीएम आवास का लाभ मिल पाया है। पत्ना रोड पर निवास करने वाले लोहकार जाति के संजय ने बताया कि इस काम को हमारे पूर्वज भी करते थे। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ 20 साल से यहां रह रहा है। पत्नी भी अपने पति के साथ काम ने हाथ बटाती है। संजय ने बताया कि राशन कार्ड, आधार कार्ड सब बन गया है, लेकिन फायदा कभी नहीं मिला। हमारे समुदाय के सिर्फ दो परिवार को राशन मिलता है। हम लोगों को राशन नहीं मिला, जबकि कार्ड बन गया था। आज शहर में लगभग 100 परिवार होंगे। सुनीता का कहना है कि दर-दर की ठोकरें खाने के बाद सोचा था कि पीएम आवास का लाभ मिलेगा, मगर इससे भी वंचित कर दिया गया है। नाथूराम का कहना है कि हम गरीब परिवारों के बिजली पानी और मकान जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। आशारानी ने कहा कि घर नहीं होने से बेटे- बेटियों के विवाह नहीं हो पा रहे हैं।

इनका कहना है
घुमंतू समाज की समस्याओं का मामला संज्ञान में नहीं था। शीघ्र ही संबंधित विभागों को निर्देशित कर रामाधान सुनिश्चित करेंगे।
नम: शिवाय अरजरिया, एडीएम
