पिछले चुनाव में 67.54 फीसदी हुई वोटिंग, प्रतिशत बढ़ाने वोटिंग से पहले वोटरों को लाने की पहल
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में हजारों लोग काम की तलाश में पलायन कर चुके हैं। ज्यादातर लोग काम के सिलसिले में दिल्ली पंजाब हरियाणा राजस्थान और यूपी जाकर बस गए हैं। छतरपुर के कई गांवों में लोगों के घरों पर ताला लटका हुआ है। हालांकि आयोग उन वोटरों को प्रदेश में वोटिंग के लिए वापस लाने की कोशिशों में जुटा है जिन्होंने पलायन किया है। जिला प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों को वोटिंग के लिए बुलाने के लिए फोन कॉल किए, टीम दिल्ली भेजी और अब प्रवासियों को 1200 चिठ्ठी लिखी गई है।
काम की तलाश में लोगों ने किया पलायन
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होना है। ऐसे में चुनाव आयोग का मुख्य फोकस विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने पर है। हालांकि, लोगों के पलायन से चुनाव आयोग की मुश्किलें बढ गई है, लेकिन इसके बावजूद आयोग उन वोटरों को प्रदेश में वोटिंग के लिए वापस लाने की कोशिशों में जुटा है। इसी क्रम में प्रशासन हर संभव कोशिश करने में जुटा हुआ है।
प्रवासी वापस आने से बढ़ेगा मतदान प्रतिशत
पिछले चुनाव की स्थिति पर नजर डालें 2018 में करीब 67.54 प्रतिशत मतदान था। जिले में छतरपुर विधानसभा में 70.76 प्रतिशत हुआ था जबकि सबसे कम चंदला विधानसभा में 62.19 प्रतिशत हुआ। अगर यह पलायन करने वाले लोग इस बार मतदान करने आएंगे तो मतदान का प्रतिशत और बढ़ सकता है। जिनको बुलाए जाने के प्रयास प्रशासन स्तर पर भी किए जा सकते हैं।
अधिकतर गांवों में 15 से 20 प्रतिशत लोग कर चुके पलायन
जिले में पलायन के हालात सालों पुराने हैं। सरकारें आईं और गईं लेकिन बुंदेलखंड के लोगों को काम धंधा बेहतर रूप से नहीं मिल सका। सूखी जमीनें और प्यासे खेतों के कारण सैकड़ों लोग घर छोडऩे पर मजबूर होते रहे हैं। साल में आठ महीने यह मजदूरी करने चले जाते हैं जहां से मजदूरी कर लौट आते हैं। लेकिन 15 से 20 प्रतिशत पलायन करने वालों में आधे लोग लौटते ही नहीं है।
इनका कहना है
मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रवासी मतदाताओं को फोन कॉल, टीम भेजकर प्रेरित करना और चिठ्ठी लिखकर प्रेरित करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।
संदीप जीआर, जिला निर्वाचन अधिकारी, छतरपुर