
राज्य सरकार स्तर से हुआ टेंडर
छतरपुर. खून से प्लेटलेट्स को अलग करने वाली ब्लड सेपरेशन मशीन वर्ष 2016-17 में खरीदी गई, लेकिन यह मशीन अब तक उपयोग में नहीं आ सकी है। लेकिन अब मशीन को जनवरी में पीपीपी मोड पर शुरु किया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। 9 जनवरी को टीम निरीक्षण के लिए आ रही है। जो मशीन के जरूरी पार्ट्स व फंक्शन शुरु करने की व्यवस्था कराएगी। मशीन शुरु होने से मरीजों को भोपाल, झांसी और ग्वालियर हर महीने नहीं जाना पड़ेगा।
राज्य सरकार स्तर से हुआ टेंडर
राज्य सरकार ने जिला अस्पताल की ब्लड सेपरेशन मशीन के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया कर दी। मशीन का संचालन निजी कंपनी द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही लाइसेंस की प्रक्रिया भी निजी कंपनी ही करेगी। टेंडर प्रक्रिया हो जाने के बाद अब 9 जनवरी को निजी कंपनी व शासन की एक टीम छतरपुर जिला अस्पताल आ रही है। ताकि मशीन को जनवरी में शुरु कराया जा सके।
अलग-अलग इस्तेमाल नहीं हो पा रहे कंपोनेंट
प्रत्येक व्यक्ति के ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं, चाहे उसका ब्लड ग्रुप कोई भी हो। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रॉयोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में इस ब्लड को डालकर घुमाते हुए जाता है। जिससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रयोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। यह चारों तत्व अलग-अलग मरीज को उसकी जरूरत के हिसाब से चढ़ाए जा सकते हैं। इस यूनिट के स्थापित न होने से एक यूनिट ब्लड सिर्फ एक मरीज को चढ़ाना पड़ रहा है।
हर महीने महानगरों की लगाना पड़ रही दौड़
बड़ामलहरा निवासी जीवनलाल अग्रवाल का के दो बेटों को माइनर थैलेसीमिया है। दोनों बच्चों को खून बदलवाने के लिए हर महीने 300 किलीमीटर दूर भोपाल जाना पड़ता है। महाराजपुर निवासी राजीव रंजन चौरसिया के बेटे आदि का भी यही हाल है। उसे भी खून बदलवाने भोपाल जाना पड़ता है। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में सुविधा नहीं होने से परेशानी बहुत है। महीने में दो बार भोपाल जाना पड़ता है। एक बार में करीब दस हजार रुपए का खर्च आता है। व्यवसायी भरत वाजपेयी का आठ साल का बेटा भी थैलेसीमिया से पीडि़त है। जब ढाई माह का था, तब बीमारी का पता चला। हर महीने बेटे का खून की जरूरत पड़ती है। माली हालत कमजोर है, इसलिए हर बार भोपाल नहीं जा सकते हैं। मजबूरी में जिला अस्पताल में खून चढ़वा रहे हैं। अस्पताल में फिल्टरयुक्त खून नहीं मिलता है, जबकि भोपाल सहित अन्य महानगरों में फिल्टयुक्त खून उपलब्ध रहता है।
इनका कहना है
मशीन के संचालन के लिए राज्य सरकार के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया हो गई है। 9 जनवरी को टीम आ रही है। जो पाटर््स व लाइसेंस की समस्त प्रक्रिया कराएगी। उम्मीद है कि जनवरी में ब्लड सेपरेशन मशीन शुरु हो जाएगी।
डॉ. जीेएल अहिरवार, सिविल सर्जन
फोटो- सीएचपी०५०१२३-71- ब्लड सेपरेशन मशीन
Published on:
05 Jan 2023 04:27 pm
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