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रोजगार की रेस में युवाओं का संघर्ष, जिले में 5323 ने कराया रजिस्ट्रेशन, 2908 को ही मिल सके ऑफर लेटर

रोजगार की आस में पंजीयन कराने वाले युवाओं में से केवल 55 प्रतिशत ही ऑफर लेटर तक पहुंच पाए हैं। यानी लगभग आधे युवाओं को अब भी एक अदद नौकरी का इंतजार है।

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एआइ फोटो

नौकरी की उम्मीद में रोजगार पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले युवाओं के लिए डगर अब भी मुश्किल भरी है। सरकारी दावों और करोड़ों के बजट के बावजूद छतरपुर सहित पूरे प्रदेश में रोजगार मिलने की रफ्तार काफी सीमित है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, छतरपुर जिले में रोजगार की आस में पंजीयन कराने वाले युवाओं में से केवल 55 प्रतिशत ही ऑफर लेटर तक पहुंच पाए हैं। यानी लगभग आधे युवाओं को अब भी एक अदद नौकरी का इंतजार है।

छतरपुर की स्थिति- 5323 आकांक्षी, अवसर मिले 2908 को


जिले में रोजगार की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है। 2025-26 के आंकड़ों पर नजऱ डालें तो छतरपुर में कुल 5323 आकांक्षी युवाओं ने रोजगार पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया था। इनमें से केवल 2908 युवाओं को ही ऑफर लेटर जारी किए गए। हालांकि, मुरैना (8 प्रतिशत) और धार (14 प्रतिशत) जैसे जिलों की तुलना में छतरपुर का प्रदर्शन 55 प्रतिशत के साथ बेहतर है, लेकिन 45 प्रतिशत युवाओं का अब भी खाली हाथ रहना चिंता का विषय है।

प्रदेश का हाल- हर 9 में से सिर्फ 1 युवा ही सफल

पूरे मध्य प्रदेश की बात करें तो 2022-23 से जनवरी 2026 तक कुल 27 लाख 64 हजार 27 युवाओं ने रोजगार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन सफलता सिर्फ 3 लाख 6 हजार 47 युवाओं के हाथ लगी। यानी कुल पंजीयन के मुकाबले मात्र 11.07 प्रतिशत युवाओं को ही नियुक्ति के अवसर मिल सके। औसत निकाला जाए तो हर 9 में से केवल एक युवा को ही ऑफर लेटर मिल रहा है।

बजट बढ़ा 114 प्रतिशत, पर प्लेसमेंट में मामूली बढ़त

उच्च शिक्षा विभाग की स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना की पड़ताल करें तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। विभाग ने इस योजना का बजट एक साल में ही 114 प्रतिशत बढ़ा दिया (87.41 लाख से बढ़ाकर 187.41 लाख रुपए), लेकिन प्लेसमेंट में केवल 3.7 प्रतिशत की ही बढ़ोत्तरी हुई। दो साल में 36 हजार से ज्यादा छात्रों ने मेलों और ट्रेनिंग में भाग लिया। नौकरी पाने वालों की संख्या 4931 रही।

सीमित रही नियुक्ति प्रक्रिया की रफ्तार


चार वर्षों के समग्र आंकड़े बताते हैं कि पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले युवाओं की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन निजी और सरकारी क्षेत्रों में नियुक्ति की प्रक्रिया एक सीमित दायरे में सिमटी हुई है। करियर मेले और प्लेसमेंट ड्राइव के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी आकांक्षी युवाओं और रोजगार के बीच की खाई को पाटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।