
Court refused to grant bail given the seriousness of the crime
छतरपुर. एसडीएम दफ्तर पर हमला की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने के तीन आरोपियों की जमानत याचिका सीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दी है। एडीपीओ शिवकांत त्रिंपाठी एवं अभय सिंह भदौरिया के अधिवक्ता आशाराम त्रिपाठी ने कोर्ट के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। जिस पर न्यायालय छतरपुर सीजेएम विपिन सिंह भदौरिया ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका निरस्त कर दी।वहीं, मामले में आइपीसी की धारा 307 के तहत केस होने से जिलाजज द्वारा ही इस धारा पर जमानत याचिका की सुनवाई की बात कही।
पैरालिसिस का दिया हवाला- सीजेएम विपिन भदौरिया की कोर्ट में अनिल सपकाले के वकील ने दलील दी कि सपकाले को वर्ष 2014 में पैरालिसिस का अटैक आया था। जिस कराण से उनके जबड़े और वाएं हाथ में पैरालिसिस का असर होने से उनकी शारीरिक अवस्था ठीक नहीं है। उन्हें जमानत दी जाए या उन्हे जिला अस्पताल में रखा जाए। बचाव पक्ष के वकील की दलील का विरोध करते हुए अभय भदौरिया के एडवोकेट आशाराम त्रिपाठी ने कहा कि सपकाले प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जमानत दी गई तो वो साक्ष्यों को प्रभावित करेंगे, वहीं उनके पक्षकार को जान का खतरा है। वहीं, दूसरे वकील बीएम चतुर्वेदी ने दलील दी कि सपकाले पर गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज है। गंभीर श्रेणी के अपराध में जमानत देना उचित नहीं हैे। दोनों वकीलों ने जावेद अख्तर की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी राजनीतिक पहुंच वाला है। जमानत दी गई तो केस को प्रभावित कर सकता है। पुष्पेन्द्र की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि प्रभावशाली लोगों को जमानत देने से केस प्रभावित हो सकता है। वहीं, एडीपीओ शिवाकांत त्रिपाठी ने जमानत अर्जियो पर विरोध करते हुए दलील रखी कि आरोपियो के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 336, 452, 427, 506/34, 120बी, 193, 182, 211 लोक संपत्ति निवारण अधिनियम की धारा 3 और आम्र्स एक्ट की धारा 25/27 का अपराध है। यदि आरोपीगण को जमानत का लाभ दिया जाएगा तो आरोपी मामले की साक्ष्य को प्रभावित करेगें।
जिससे विवेचना और आम जनमानस में विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
सीजेएम ने कहा, समाज पर गलत पड़ेगा असर
सीजेएम विपिन भदौरिया ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि, जमानत की सुविधा का लाभ देने से ऐसी घटनाओं में इजाफा होने की संभावना है। जिससे समाज पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसलिए आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि मामले में आइपीसी की धारा 307 भी है, जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान होने से जमानत याचिका पर सुनवाई डिस्ट्रिक्ट जज करेंगे।
कैदी वार्ड में चल रहा इलाज
अनिल सपकाले की हालत बिगडऩे पर जेल डॉक्टर आरपी गुप्ता और डॉ. फिरोज खान ने सोमवार की रात चेकअप करने के बाद जिला अस्पताल इलाज के लिए रेफर कर दिया। जिसके बाद से सपकाले का जिला अस्पताल के कैदी वार्ड में इलाज किया जा रहा है। वहीं, पुष्पेन्द्र, जावेद, राजू. अुर्जन और अमित जेल में बंद हैं।
Published on:
12 Feb 2020 07:13 am

बड़ी खबरें
View Allछतरपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
