
Street Vendor Zone Act Not followed
छतरपुर। शहर की सड़कों पर छोटी-छोटी दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन करने वाले स्ट्रीट वेंडर व्यवसाय की अनिश्चितता को लेकर हमेशा डरे रहते हैं। वेंडर जोन नहीं होने से शहर की सड़कों के किनारे निर्धारित जगह पर व्यवसाय करने का अधिकार इन्हें नहीं मिल पाया है। वेडर्स के व्यवसाय करने के अधिकार के साथ ही ट्रैफिक समस्या का जिक्र भी आता है। वेंडर जोन नहीं होने से न केवल ये छोटे-छोटे 500 दुकानदार परेशान है, बल्कि शहर का ट्रैफिक भी इस वजह से अक्सर वाधित होता है। सिर्फ एक व्यवस्था न होने से जहां शहर के स्ट्रीट वेंडर परेशान है,वहीं राहगीर भी ट्रैफिक समस्या से हलाकान होते हैं। पूरे देश में स्ट्रीट वेंडर और ट्रैफिक, एक-दूसरे से जुड़ी समस्या के रुप में सामने आए हैं। लेकिन जिन शहरों में इस समस्या का हल ढूंढ लिया गया, वहां न केवल लोगों को स्थाई स्वरोजगार मिला,बल्कि ट्रैफिक को रफ्तार भी मिली है। छतरपुर के प्रतापसागर की चौपाटी और मेला ग्राउंड में वेडर्स जोन बनाने की पहल तो हुई,लेकिन छतरपुर शहर में इस समस्या का कारगर समाधान अबतक नहीं खोजा गया है। दोबार पहल जरूर की गई,लेकिन समाधान होने से पहले ही पहल ठंड़े बस्ते में चली गई।
इसलिए बना सड़क विक्रेता संरक्षण कानून
स्ट्रीट वेंडर (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 भारत की संसद का एक अधिनियम है,जो सार्वजनिक क्षेत्रों में सड़क विक्रेताओं को नियंत्रित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाया गया है। इसे लोकसभा में 6 सितंबर, 2012 को केंद्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा पेश किया गया था। यह विधेयक लोकसभा में 6 सितंबर 2013 को और राज्यसभा में 1 9 फरवरी 2014 को पारित किया गया था। बिल को 4 मार्च 2014 को भारत के राष्ट्रपति की सहमति मिली। यह अधिनियम 1 मई 2014 से लागू हुआ था
शहरों में हॉकिंग जोन जरूरी है,क्योंकि यह लोगों के लिए गंभीर बाधा उत्पन्न करता है, यातायात की समस्या पैदा होती है। राज्य और नगर पालिका को उन स्थानों को नामित करने और आवंटित करने का अधिकार मिला है, जहां से सड़क व्यापार किया जा सकता है। शहरी स्ट्रीट विक्रेताओं 200 9 की राष्ट्रीय नीति को यूपीए सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था,जो शहरी खुदरा व्यापार और वितरण प्रणाली के वैध हिस्से के रूप में सड़क विक्रेताओं को मान्यता देता है। अधिनियम में प्रत्येक नगर पालिका में शहर वेंडिंग अथॉरिटी (टीवीए) स्थापित करने का प्रावधान है। जिसमें नगरपालिका आयुक्त/मुख्यकार्यपालन अधिकारी को अध्यक्ष, सड़क विक्रेताओं , गैर-लाभकारी संस्थाओं, पुलिसकर्मी और नगर नियोजन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। टीवीसी क्षेत्र का सर्वेक्षण करेगा, मौजूदा सड़क विक्रेताओं की पहचान करेगा और फिंगरप्रिंट, पता और फोन नंबर जैसे व्यक्तिगत विवरण एकत्र करेगा। फिर उन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके बाद, टीवीसी जोन बनाएगा जहां एक इलाके के सभी सड़क विक्रेताओं को रखा जाएगा। एक वेंडिंग जोन क्षेत्र की आबादी का 2.5 प्रतिशत होगा। वेंडिंग जोनों में पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी। सर्वे हर पांच साल में कम से कम एक बार आयोजित किया जाएगा।
अपराध है सड़क बाधित करना
मोटर वाहन अधिनियम 1 988 की धारा 201 में सार्वजनिक राजमार्ग पर यातायात के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने वाले किसी भी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है। यह विशेष रूप से अनावश्यक यातायात ब्लॉक से बचने के लिए बनाया गया कानून है। आइपीसी की धारा 151 के तहत किसी भी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, व्यक्ति को पुलिस हिरासत में 24 घंटे से अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है।
ये कहना है सड़क विक्रेताओं का
स्थाई जगह और लाइसेंस मिले
सड़क किनारे ठेला लगाकर अपने परिवार को पालते हैं। हमेशा डर बना रहता है, कि कब हटा दिए जाएंगे। हमें स्थाई जगह मिल जाए,जहां गुमटी रखी जा सके और लाइसेंस मिले तो हमारे जैसे छोटे दुकानदारों का भला हो जाए।
जीतेन्द्र चौरसिया,स्ट्रीट वेंडर
परेशान होकर छोड़ दिया धंधा
सड़क किनारे दुकान लगाता था,लेकिन कोई न कोई आकर हटा देता था, हमारे लिए कोई जगह ही नहीं है,परेशान होकर मैने दुकान लगाना ही बंद कर दिया। स्वरोजगार नहीं होने से रोजी-रोजी के लाले पड़ गए हैं।
शंकर,चौरसिया,स्ट्रीट वेंडर
हमेशा बना रहता है डर
फुटपाथ के किनारे गुमटी रखने का अधिकार मिल जाता, तो नगर पालिका को इससे आय होती और हमारे मन का डर दूर हो जाता। अभी तो हर दिन डर बना रहता है,न जाने कब हटा दिए जाए। सड़क पर ठेले लगने से ट्रैफिक जाम होता है,इसके लिए हमारे चाहने से भी समस्या दूर नहीं हो पाती है,हम सभी को जगह मिल जाए तो,सबकी समस्या दूर हो जाती।
मुकेश कु मार,स्ट्रीट वेंडर
सबको एक जगह करें शिफ्ट
सड़क से हटाकर सभी दुकानदारों को एक जगह दे दी जाए,तो किसी को भी सड़क के किनारे दुकान लगाने की जरूरत नहीं पड़ती,साहब लोग रोज डांटते है,हमें भी परेशानी होती है। किसी को हटाएं,किसी को नहीं, तो समस्या बढ़ जाती है,सभी को एक साथ एक जगह कर दें। सबकों लाइसेंस भी दिए जाएं,सबकी समस्या हल हो जाएगी।
शशि कुशवाहा,स्ट्रीट वेंडर
वेंडर की किसी को परवाह नहीं
शहर की सड़कों के किनारे ठेेले लगाकर अपना पेट पालने वाले लोगों को परेशान करने के बजाए,उन्हें एक जगह दे दी जाए,तो सबकी समस्या का हल हो सकता है। लेकिन नगर पालिका ने न इन गरीबों के लिए कुछ किया और न यातायात समस्या के बारे में सोचा। इन्हें रोड से हटाने से बर से समस्या हल नहीं होगी,इनके हित को भी ध्यान रखना होगा।
नाजिम चौधरी,युवा वकील
नहीं हुई सुनवाई
हमने कई बार पत्र लिखकर ठेले वालों को जगह दिलाने की मांग रखी,लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम अबतक नहीं उठाया गया। इधर ठेले वाले परेशान है,उधर जाम से लोग हलाकान होते हैं।
नवनीत जैन,संरक्षक,हाथ ठेला संघ
फैक्ट फाइल
शहर में ठेलों की कुल संख्या- 500
मुख्य बाजार इलाका- २००
बस स्टैंड और आसपास - 100
छत्रसाल चौक-५०
पन्ना नाका व सटई रोड-१००
सागर रोड व आसपास-५०
Published on:
29 Oct 2018 01:18 pm
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