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अनदेखी के चलते बीरान होता जा रहा जिला अस्पताल का हर्बल गार्डन, नहीं बचे औषधियों के पौधे

अनदेखी के चलते बीरान होता जा रहा जिला अस्पताल का हर्बल गार्डन, नहीं बचे औषधियों के पौधे

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बीरान होता जा रहा जिला अस्पताल का हर्बल गार्डन

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छतरपुर। जिला अस्पताल के हाईजीनिक वातावरण और पौधों के औषधीय गुणों का मरीजों, परिजनों व स्टाफ को लाभ देने के मकसद से हर्बल गार्डन बनाया गया था। लेकिन यहां पर ध्यान नहीं देने के चलते अब यह हर्बल गार्डन बीरान होता जा रहा है और पौधे सूखते जा रहे हैं। यहां पर शुरुआत में औषधीय गुण वाले 120 पौधे रोपे जाने का प्लान था और इसके बाद फलदार व छायादार पौधे भी लगाए जाने थे। लेकिन पहले यहां पर मात्र १९ औषधीय पौधे लगाए गए।
जिला अस्पताल में पुराने बच्चा वार्ड के पीछे स्थित खाली भूमि पर प्रबंधन ने हर्बल गार्डन तैयार किया गया था। इस दौरान यहां पर एलोवेरा, तुलसी, सदाबहार, बिलोय, पत्थरचटा, आंवला, बेलपत्र, कड़वी नीम, मीठी नीम, अशोक, अजवाइन, हर्र, बहेड़ा, अश्वगंधा, हल्दी, अदरक, पुदीना, लौंग, बौगन बेलिया आदि पौधे लगाए गए थे। जहां पर कर्मचारियों द्वारा देखरेख के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन इसके बाद यहां पर ध्यान नहीं दिया गया और अव यहां पर मात्र कुछ ही पौधे दिखाई दे रहे हैं। यहां पर मात्र बिलोय, अशोक के पौधे बचे हैं और वह भी सूखते जा रहे हैं।
वहीं बीते दिनों पुराना भवन गिरने के बाद से यहां पर और लापरवाही बरती जा रही है। हालात हैं कि यहां से प्रतिदिन कई बाद अधिकारी आते जाते हैं और हर्बल गार्डन कोि देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। यहां पर बीते कई दिनों से पानी तक नहीं दिया गया है। जिससे यहां पर लगाए गए औषधियों के पौधे सूख कर मर गए हैं।

यह थी पूरी योजना
मरीजों को चिकित्सकीय परीक्षण के बाद मिलने वाली टैबलेट, कैप्सूल के साथ ही रोगों की काट के लिए हर्बल गार्डन का सहारा लेने के लिए योजना थी और इसके लिए पुराने सीएस ऑफिस, रेडक्रॉस भवन की खाली जमीन समेत अस्पताल की अन्य खाली जमीन वाले हिस्से में पौधे लगाने थे। बुखार, खांसी और जुकाम समेत अन्य बीमारियों में रोगियों का इलाज हर्बल गार्डन से भी हो सकता है।

पहले चरण में लगने थे 120 पौधे
हर्बल गार्डन में पहले चरण में 120 पौधे लगाए जाने थे, जिसमें औषधीय गुण वाले पौधे, फलदार व छायादार पौधे शामिल किए गए थे। पहले चरण में तुलसी, पुदीना, आंवला, नीम, नीबू, गिलोय, हल्दी, घृतकुमारी, ऐलोवेरा, मीठा नीम, सदाबाहर, रतनजोत, सर्पगंधा, चिरैता, ब्रहमी, लजवंती, जामुन, अशोक, अमलतास, अनार, सफेद मूसली, गुरुच, पीपल आदि पौधे रोपे शामिल किए। जिनका जरूरत पडऩे पर जिला अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सक रोगियों का इलाज करने के लिए इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

IMAGE CREDIT: unnat pachauri
IMAGE CREDIT: Unnat Pachauri

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