
किनारे पर सफाई अभियान अब भी जारी
छतरपुर. प्राचीन ग्वालमंगरा तालाब की दुर्दशा देखकर तालाब के जीर्णोद्धार के लिए जनप्रतिनिधियों व रहवासियों द्वारा उठाई गई मांग और उस पर की गई पहल के सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। तालाब से जलकुंंभी खत्म करने का अभियान 80 फीसदी पूरा हो गया है। घास के मैदान की तरह नजर आने लगे 9 एकड़ के तालाब को 10 दिन से जलकुंभी से मुक्त करने सफाई की जा रही है। संकटमोचन के बाद ग्वालमंगरा तालाब को भी जलकुंभी से मुक्ति दिलाकर नया जीवन दिया गया है।
30 हजार लोगों को मिलेगी राहत
9 एकड़ रकवा वाला तालाब का अब दो-ढाई एकड़ का कचरा मैदान नजर आने लगा था। तालाब में जलकुंभी, गंदगी, प्लास्टिक और जहरीला पानी परेशानी का सबब बन गया था। तालाब के आसपास 6 वार्ड की सीमाएं लगती हैं और इन वार्डों में रहने वाली लगभग 30 हजार आबादी तालाब की गंदगी से प्रभावित हो रही थी। तालाब में मौजूद गंदगी और जहरीले पानी में अनेक कीड़े पनप रहे हैं जो न सिर्फ बीमारियों को जन्म दे रहे थे। अब तालाब की सफाई होने से लोगों को राहत मिलेगी।
28 कब्जा मिले, अब तक हटे नहीं
हाईकोर्ट के आदेश पर अप्रेल 2022 में शहर के 7 तालाबों के अतिक्रमण हटाने की कवायद शुरु हुई। शहर के ग्वाल मंगरा, संकटमोचन, सांतरी तलैया, विध्यवासनी तलैया, रानी तलैया, प्रताप सागर और किशोर सागर तालाबों के सीमांकन के लिए 13 सदस्यीय टीम लगाई गई है। टीम ने ग्वाल मंगरा तालाब का सीमांकन किया और तालाब के पानी में मकान बनाकर कब्जा करने वाले 28 लोगों को नोटिस जारी किया। लेकिन तालाब का अतिक्रमण अब तक नहीं हट सका है।
विंध्यवासिनी तालाब व गायत्री तालाब की सफाई की जरूरत
महोबा रोड स्थित विध्यवासिनी तलैया में जानराय पहाड़ी सहित टौरिया मोहल्ले का गंदा पानी नालियों से पहुंचता है। इस कारण यहां का पानी हमेशा गंदा बना रहने के साथ ही दुर्गंध देता रहता है। इस पानी की दुर्गंध के कारण माता के मंदिर पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार महलों के पास स्थित रानी तलैया और सटई रोड स्थित छुई खदान तलैया की कई सालों से सफाई न होने से आसपास के घरों से निकलने वाला गंदा पानी सालों से भरा हुआ है। जवाहर रोड स्थित गायत्री मंदिर तलैया में दोनों बस स्टैंड सहित नौगांव रोड, फव्वारा चौक और दूध नाथ कॉलोनी के घरों का गंदा पानी आता है। पूरी तलैया का पानी गंध मारता है। इस तलैया में जल कुंभी का घेरा होने से घांस का मैदान जैसा लगने लगा है। अब इन तालाबों को बचाने की जरूरत है।
Published on:
08 Oct 2022 04:18 pm
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