
Everyday life and livelihood of cattle in road accidents
धर्मेंद्र सिंह. छतरपुर। शहर हो या गांव, सभी जगह गौ-वंश की दुर्दशा हो रही है। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जिस दिन गौ-वंश सड़क दुर्घटना का शिकार न हो, जिस दिन किसी गाय की तड़प-तड़प कर मौत न होती हो। इन सड़क दुर्घटनाओं का शिकार लोग भी हो रहे हैं। इन सड़क दुर्घटनाओ में लोग या तो घायल हो रहे हैं, या उनकी भी मौत हो रही है। गौ-वंश के सड़कों पर आ जाने से सड़क जाम से लेकर, दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। हालात ये आ चुके हैं, कि दुर्घटना में रोजाना गाय और इंसान की मौत हो रही है। दो वक्त के दाना-पानी के बदले दूध देने और मरने के बाद शरीर के चमड़े से कई लोगों का रोजगार चलाने वाली गाय, सड़कों पर मारी-मारी इसलिए फिर रही हैं, क्योकि उनके रहने-खाने का इंतजाम इंसान ने छीन लिया। गाय सड़कों पर आ गईं, बस यहीं से गाय सड़क दुर्घटना की वजह और शिकार बनने लगी हैं।
शहर की सड़कों पर रहती हैं 3 हजार गाय :
दुर्घटना में घायल गौवंश का इलाज का काम करने वाली हरिओम गौशाल के आंकड़ो के मुताबिक छतरपुर शहर में लगभग तीन हजार गाय ऐसी हैं, जिनके न रहने का ठिकाना है, न खाने-पीने का इंतजाम है। शहर के हर वार्ड में कम से कम ७० गाय हैं, जो खाने की तलाश में सड़कों, गलियों में भटकती रहती है। हर सड़क पर इसी वजह से जाम लगता है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। सड़क के किनारे और सड़क पर बैठी गायों को बचाने के प्रयास में सड़क दुर्घटना हो रही है, जो रोजाना बढ़ती ही जा रही हैं। रात के समय सड़क पर बैठे गौ-वंश बड़ी सड़क दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं। लोग हादसों का शिकार होकर जान गंवा रहे हैं। गायों को बचाने के चक्कर में रोजाना 5 एक्सीडेंट शहर में हो रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में 2 से तीन गाय की रोजाना मौत हो रही है, कम से कम चार लोग घायल हो रहे हैं। ये तो आम दिनों की बात है,बारिश के मौसम में रोजाना कम से कम 15 एक्सीडेंट होते हैं,जिनमें 10 गायों की मौत हो जाती है, 12 लोग गंभीर घायल हो जाते हैं, 2 से 4 लोगों की मौत हो जाती है। समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, लेकिन राहत की बात अभी दूर की कौड़ी है।
छिन रहीं लोगों की खुशियां :
देश हो या प्रदेश या शहर, सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा मौतें हो रही है। सड़क दुर्घटना की दस वजह मुख्य हैं,जिसमें ओवर स्पीड,ओवर टेक, मोबाइल का इस्तेमाल, ड्रंक एंड ड्राइव, रेड लाइट जंप, सेफ्टी फीचर्स का इस्तेमाल नहीं, सड़क नियमों की अनदेखी, सड़क पर जानवर आ जाना, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, ड्राइवर का भ्रमित होना कारण हैं। जिनमें से एक बड़ी वजह सड़क पर जानवरों का आ जाना भी है। जानवरों के सड़क पर आने से भीषण हादसा होता है, ऐसी दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा बाइक सवार मौत का शिकार होते हैं। इसके अलावा ऐसे भी हादसे होते हैं, जिन्हें रोड एक्सीडेंट तो नहीं कहा जाता, लेकिन ये दुर्घटनाएं जानवरों की वजह से ही होती हैं। 4 माह पहले गल्ला मंडी में मटरू गुप्ता नाम के बुजुर्ग को बैल ने सींग मार दिया, जिसमें उनकी जान ही चली गई। तीन महीने पहले कारोबारी प्रभात अग्रवाल दो जानवरों की लड़ाई में फंस कर घायल हो गए, इनके पैर में फैक्चर हो गया। इसके अलावा कई परिवारों के मुखिया या इकलौते चिराग को जानवरों के बीच में आने से हुई दुर्घटनाओं ने छीन लिया।
बेेजुबान का भी हो रहा दर्दनाक अंत :
भूख-प्यास से बिलखते ये बेजुबान अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ बोल भी नहीं पाते, सड़क पर आवारा घूम रही किसी भी गाय की आंखों, शरीर के जर्जर ढांचे को देखने से ही महसूस हो जाता है, कि इन आंखों से बह रहे आंसूओं की वजह क्या है, कितनी तकतीफ में गुजरता है इनका हर पर, हर दिन। एक दिन कै से भी गुजर जाए, लेकिन अगले दिन भूख से या सड़क दुर्घटना से बच पाएंगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। घर या गौशाला में ठिकाना नहीं रहा, सड़कों पर कुछ देर के लिए ठौर मिलता तो है, लेकिन सड़क दुर्घटना में कब हमेशा के लिए बैठ जाएं या जान चली जाए, इसका बात का डर हर पल बना रहता है। गौ-वंश के हित की बात तो सभी करते हैं, लेकिन इनकी दुर्दशा देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं, यही वजह है कि गौ-वंश तिल-तिल कर जीते और तड़प-तड़प कर मर रहे हैं।
हर दिन हो रहे हादसे :
गौवंश सबसे ज्यादा बारिश के मौसम में सड़क हादसे का शिकार होते हैं,कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब दुर्घटना न हो,लोग और गाय घायल न हो, या उनकी जान न चली जाए। छतरपुर में गाय के इलाज की व्यवस्था भी सीमित है,ऐसे में जान बचाना बहुत मुश्किल होता है।
- पारस उर्फ डब्बू दुबे,गौ सेवक
समय-समय पर करते है कार्रवाई :
गाय सड़कों से हटाई जाए, इसके लिए नगरपालिका को पत्र लिखा गया है, इसके अलावा हमारे स्टाफ द्वारा भी गाय को सड़क से हटाया जाता है, ताकि इस वजह से सड़क जाम या दुर्घटना न हो।
- पूर्णिमा मिश्रा, यातायात प्रभारी
गौशाला की व्यवस्था है
गौ-वंश सड़कों पर न भटके इसके लिए गौशाला की व्यवस्था की गई है। व्यवस्था के प्रभारी ओमरे को व्यवस्था को और दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाएंगे। ताकि गौ-वंश और राहगीरों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
- हरिहर गंधर्व, सीएमओ नगरपालिका
Published on:
06 Oct 2018 11:53 am
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