ह्यूमन एंगल
छतरपुर. कुर्राहा गांव में एक समाजसेवी 2 साल से अनाथ बच्चों और असहाय-वृद्धों को मुफ्त में टिफिन भेजकर भोजन करा रहे हैं। जीवन के दूसरे पड़ाव में दिल्ली की प्रदूषित आवोहवा से दूर बुंदेलखंड के गांव में प्रकृति के बीच जीवन बिताने 2019 में छतरपुर के कुर्राहा गांव आए। जहां उन्होंने एक फॉर्म हाउस व छोटा सा व्यवसाय भी स्थापित कर लिया। इस दौरान समाजसेवी ने क्षेत्र के अनाथ बच्चों और गरीबों की स्थिति देखी। गरीबी के चलते उन्हों दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं हो रहा है, तो उन्होंने सभी जरूरतमदों को भोजन कराने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने जागरूक सेवा समिति बनाई। 2021 में कुछ कर्मचारी नौकरी पर रखे और भोजन बनवाना शुरू किया।
बाइक से देने जाते है खाना
इस समय उनके यहां 8 कर्मचारी तैनात हैं। जो सुबह भोजन तैयार कर 2 बाइक पर टिफिन लेकर जाते हैं। यह दोनों बाइक चालक कर्मचारी कुर्राहा, कनेरा, गढ़ीमलहरा, महाराजपुर, मऊ, नाथपुर, मनकारी, नैगुवां और ढिगपुरा सहित करीब 23 गांवों में जाकर अनाथ बच्चों एवं असहाय-वृद्धों को टिफिन बांटते हैं। जगमाल यादव ने बताया कि इस समय उनके यहां से 127 टिफिन से खाना वितरित होता है। खाना बनाने का काम करने वाले हरदयाल कुशवाहा ने बताया कि गांव-गांव में जरूरतमंदो की खोज की गई। अब उन्हें नियमित रुप से खाना पहुंचाया जा रहा है।
भूखे को भोजन कराने से मिलता है सकून
2019 से मूलत बजीराबाद गुडग़ांव के निवासी वकील जगमाल यादव गढ़ीमलहरा क्षेत्र के पास कुर्राहा गांव में निवासरत हैं। उन्होंने यहां 2019 में 7 एकड़ भूमि खरीद कर फार्म हाउस बनाया। यहां तार जाली बनाने की फैक्ट्री शुरू की। उन्होंने इसी वर्ष क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों, स्कूलों एवं अन्य शासकीय स्थलों पर 20 हजार पौधों का रोपण किया। समाजसेवी जगमाल बताते हैं कि यहां आकर देखा कि गरीबी बहुत है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके पास दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी काफी कठिन है। मेरा मानना है कि ऐसे लोगों को वह भोजन करवाना ईश्वर की पूजा से कम नहीं है। इस काम से सकून मिलता है।
अब गांव वालों से भी मिलती है मदद
वह बताते हैं कि फसल आ जाने पर वह गांव में या आसपास के गांवों में जाते हैं। वहां से लोग कुछ अनाज व अन्य खाद्य सामग्री दान देते हैं। हम उसे लाकर रखते हैं और वह गरीबों के भोजन में काम आती है। हमारा उद्देश्य है कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। इस मकसद को पूरा करने में अब गांव के लोग भी मदद करने लगे हैं।