
कोरोना काल में ज्यादा गिरावट
छतरपुर। यूनेस्को के विश्व धरोहर में शामिल 10वीं-11वीं सदी के खजुराहो के मंदिरों को देखने आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2012 से अबतक के आंकड़े बताते हैं कि दस साल में हर साल विदेशी पर्यटकों की संख्या घट रही है। विदेशी सैलानियों की उपेक्षा के बाद कोरोना महामारी के संकट ने दुनिया भर में मशहूर इस पर्यटन स्थल की स्थिति दयनीय कर दी है। विश्व मंच पर खजुराहो के नाम को भुनाया तो गया मगर कागजी योजनाओं के कारण जरूरी विकास यहां नहीं हो पाया। जिसके चलते पर्यटन पर प्रभाव पड़ा है।
कोरोना काल में ज्यादा गिरावट
बुनियादी जरूरतों के अभाव ने इस पर्यटन स्थल को सैलानियों की उपेक्षा का शिकार बना दिया है। परिणाम सामने है खजुराहो आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट हो रही है। बीते वर्ष 2021 में खजुराहो घूमने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या मात्र 162 थी जबकि देशी पर्यटकों की संख्या 228276 थी। वर्ष 2020 में 19999 विदेशी और 177510 देशी पर्यटकों को खजुराहो के मंदिरों ने आकर्षित किया था। बीते दो साल से कोरोना महामारी के प्रकोप चल रहा है जिसने खजुराहो को और अधिक तबाही की ओर धकेल दिया।
कोरोना के पहले ही घटने लगे सैलानी
कोरोना से पहले के आंकड़े भी खजुराहो के पर्यटन पर पड़ रहे असर को दिखाते हैं। खासकर विदेशी मेहमानों ने खजुराहो भ्रमण से दूरी बनाना शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 के बाद से खजुराहो आने वाले विदेशी मेहमानों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई। वर्ष 2012 में 97724 विदेशी पर्यटक खजुराहो आए। उसके बाद वर्ष 2013 में 89511, वर्ष 2014 में 74706, वर्ष 2015 में 65034, वर्ष 2016 में 66035, वर्ष 2017 में 66979, वर्ष 2018 में 60759 और 2019 में 51153 विदेशी पर्यटक ही खजुराहो घूमने आए।
कंधार हाईजैक के बाद बदली तस्वीर
खजुराहो गाइड एसोसिएशन के सचिव फ्रेंच गाइड विनोद सेन का कहना है कि वर्ष 2004 मे कंधार प्लेन हाइजैक के बाद खजुराहो की तस्वीर बदलने लगी। दिल्ली से आगरा,खजुराहो, बनारस होते हुए काठमांडू तक चलने वाला प्लेन बंद कर दिया गया। खजुराहो की केक्टिविटी आगरा से होने तक खजुराहो में विदेशी सैलानियों का ट्रैफिक अच्छा था। विमान की टाइमिंग भी ऐसी थी कि जो पर्यटकों की सहूलियत बढ़ाती थी।
इन उपायों से मिलेगी संजीवनी
विनोद का मानना है कि खजुराहो को आगरा से विमान सेवा से जोडऩे की जरूरत है। वहीं दिल्ली से खजुराहो के लिए राजधानी या शताब्दी जैसी ट्रेन की जरुरत हैं। विदेश से आने वाले ज्यादातर सैलानी 60 प्लस आयु वर्ग के होते हैं। जिन्हें पर्यटन के साथ कम्फर्ट की जरुरत होती है। ऐसे में खजुराहो की कनेक्टिविटी का असर पर्यटन पर पडता है। उनका ये भी कहना है कि रिलीजियस और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने से भी लाभ होगा। खजुराहो में वल्र्ड क्लास सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनने से भी लाभ होगा। खजुराहो के कारोबारी परवेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए महानगरों से संपर्क बढ़ाना होगा। साथ ही खजुराहो में सैलानी अधिक दिन तक रुक सकें इसके लिए आसपास के पर्यटन स्थलों को सड़कों से जोडऩा होगा। जैसे अजयगढ़, कालिंजर किला, पन्ना, नेशनल पार्क व अन्य दर्शनीय स्थलों को खजुराहो के सर्किट से जोडऩा होगा।
Published on:
16 Feb 2022 06:00 am
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