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आदिवासी गावों में हैजा का हल्ला, चार की मौत, हर घर में हड़कंप

 गांव में बीमार दूसरे मरीजों का स्वास्थ्य विभाग की टीम वहीं जाकर उपचार कर रही है। मंगलवार को जानकारी मिलने पर एसडीएम भी गांव पहुंचे और उन्होंने हालातों का जायजा लिया।

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Widush Mishra

Aug 24, 2016

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रफी अहमद सिद्दीकी@छतरपुर.बिजावर तहसील के आदिवासी बहुल गांव खुवा में एक सप्ताह से फैले हैजा ने चार बच्चों की जान ले ली। हर घर में कोई न कोई बीमार है। इलाके भर में हड़कंप मचा हुआ है। मंगलवार को दो नए बच्चे इस संक्रमित बीमारी से पीडि़त मिले, उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं कुछ बच्चों का बिजावर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार चल रहा है।

गांव में बीमार दूसरे मरीजों का स्वास्थ्य विभाग की टीम वहीं जाकर उपचार कर रही है। मंगलवार को जानकारी मिलने पर एसडीएम भी गांव पहुंचे और उन्होंने हालातों का जायजा लिया। एसडीएम ने यहां बच्चों के उपचार के लिए गांव के स्कूल और एक अन्य भवन को खाली कराने के निर्देश दिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आदिवासियों के घरों की हालत ठीक नहीं है।


इनकी हुई मौत
जिन बच्चों की मौत हुई उनमें सीता (9) पिता दिनेश सौर, सुमित्रा (6) पिता जमना सौर, सचिन (12) पिता बालचंद्र व बिरजू (8) पिता हरिदास शामिल हैं। वहीं लल्लू (4) पिता हरलाल, गौरा (8) पिता राजेश, मनोहर (14) पिता राजेश, पार्वती (8 ) पिता काशीराम, रामकली (12) पिता प्यारेलाल, राजकुमारी (8) प्यारे लाल, अजय (15) पिता नत्थु, मूलाबाई (34), सपना (8) पिता दरिया सौर, साधु (50) पिता लल्लू , कुसुम (4) पिता साधु, कस्तूरी (60) पति कडोरा, गुलाब बाई(3) बीमार हैं।

दो को किया रेफर
हालात नाजुक होने पर सपना व गुलाब बाई को सोमवार की रात करीब 10:10 बजे जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया था, लेकिन दोनों के परिजन उन्हें मंगलवार की सुबह वार्ड से अपने साथ ले गए। वार्ड में पदस्थ कर्मचारियों को पता तक नहीं चला कि ये दोनों मरीज कब चले गए।


बारिश बनी आफत, समय पर इलाज न करा पाना बनी मौत की वजह
पांच दिन तक लगातार हुई बारिश खुवा गांव के ग्रामीणों के लिए आफत बन गई। बिजावर तहसील क्षेत्र के इस बेहद पिछड़े गांव में बेहद गरीबी है। यहां रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए आवागमन के बेहतर साधन नहीं है। पिछले सप्ताह लगातार पांच दिनों गांव तक पहुंच या गांवों से निकलना मुश्किल गांव के पास गुजरी श्यामारी नदी के पास पुल नहीं होने से खुवा गांव तक पहुंचने में करीब डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है।बारिश के दौरान रास्ते से गुजरी श्यामरी नदी के चढ़ जाने से यातायात बंद हो गया था।इस बीच गांव में संक्रामक बीमारी से पैर पसार दिए।बीमारी की चपेट मेंं आने वाले लोग समय से इलाज नहीं करा सके। जिससे संक्रामक बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया।

मत्स्याखेट पर रोक
बताया जाता हैकि गांव के निकट से गुजरी श्यामरी नदी से आदिवासी समुदाय के लोग मछली पकड़ कर उसका सेवन करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के ग्रामीणों की माने तो रक्षा बंधन के दौरान इन ग्रामीणों ने मछली का सेवन किया था। तभी से उनमें उल्टी-दस्त की समस्या देखी जा रही है।

एसडीएम पहुंचे गांव, खुद के सामने कराया चेकअप
करीब छह सौ की आबादी वाले खुवा गांव में इस समय संक्रामक बीमारी फैली है। संक्रामक बीमारी आने वाले मरीजों की संख्या भी दर्जनों में है। हालांकि जिनकी हालत गंभीर है उनकी संख्या एक दर्जन से ज्यादा बताईजा रही है।जबकि अन्य मरीज मामूल रूप से बीमार हैं। एक -एक करके हुई चार मौतों ने सभी को हिलाकर रख दिया है।


गांव में आवाजाही के बेहतर संसाधन न होने से ग्रामीण समय से इलाज नहीं करा सके। जिससे गांव में उल्टी-दस्त का प्रकोप बढ़ता गया और गांव के चार बच्चों की बीमारी से जूझते हुए मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग को जब इसकी जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया।


सोमवार की शाम एसडीएम रविंद्र चौकसे गांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने हालात का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए अपने सामने ही गांव में मरीजों को चेकअप कराया। जिस मरीजों की हालत नाजुक थी्र उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजावर व जिला अस्पताल छतरपुर रेफर किया गया।


बीएमओ बोले: स्थिति नियंत्रित
बीएमओ डॉ. त्रिपाठी ने स्थिति को अब नियंत्रण में बताया है। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक भी गांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मरीजों का हाल-चाल लिया। ग्रामीणों को भरोसा दिया कि मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत जल्द से जल्द पुल तैयार कराया जाएगा। इसके साथ ही जिन ग्रामीणों के नाम बीपीएल सूची से हटाए गए हैं।

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