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सर गौर को भारत रत्न दिलाने की अपील में आगे आए आईएएस, आईपीएस की तैयारी करने वाले युवा

प्रकृति आईएएस कोचिंग के छात्रों ने सर गौर को भारत रत्न से सम्मानित करने के लिए पोस्टकार्ड अभियान चलाया है।

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पोस्टकार्ड के साथ कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राएं व डायरेक्टर

छतरपुर. सर गौर डॉ. हरि सिंह गौर के योगदान को सम्मानित करने के लिए अब युवा भी आगे आए हैं। आईएएस, आईपीएस की तैयारी करने वाले छात्रों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत प्रयासों से एक अनूठी पहल की है। प्रकृति आईएएस कोचिंग के छात्रों ने सर गौर को भारत रत्न से सम्मानित करने के लिए पोस्टकार्ड अभियान चलाया है।

इन युवाओं ने लिखे पोस्टकार्ड


अभियान की शुरूआत प्रकृति आईएएस संस्थान के डायरेक्टर बीएस राजपूत ने करते हुए सर गौर के योगदान को लेकर जागरूकता फैलाने की शुरुआत की। छात्रों ने पोस्टकार्ड लिखने की मुहिम शुरू की, जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील कर रहे हैं कि सर गौर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। कोचिंग के छात्रों राजेन्द्र नामदेव, नीरज साहू,मुकुल अवस्थी, दिलीप अहिरवार, भूपेन्द्र यादव, सुरेश रैकवार, देशराज रजक, अमर सिंह राजपूत, रोहित चक्रवती, अखलेश लोधी, नकुल तिवारी, सीताराम राजपूत, सोना साहू, रीतेश बिंदुआ, नंदनी यादव, रुकसार खातून, पूजा अहिरवार, शिवांगी गुप्ता, कमला प्रजापति, नीता राजपूत, निशा रायकवार, प्रीति रैकवार, प्रभा कुशवाहा, अनुराधा साहू, खुशबू कुशवाहा, महक परवीन, पूजा रैकवार, संध्या पटेल, लक्ष्मी सिंह लोधी, काजल रिछारिया, माधुरी अहिरवार, मनीषा राजपूत, वंदना अहिरवार, कलावती आदिवासी, रुबी राजपूत, वीरेन्द्र सिंह का मानना है कि सर गौर ने भारतीय समाज के लिए असाधारण कार्य किए थे और उनके योगदान को सही सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए जो कदम उठाए, वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समान ही महत्वपूर्ण थे। इस अभियान में जुड़े छात्रों का कहना है कि सर गौर के योगदान को भारतीय शिक्षा और समाज के हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। उनकी प्रतिबद्धता और कार्यों को समाज के सभी वर्गों द्वारा सराहा गया है, और यही वजह है कि उन्हें भारत रत्न जैसी उच्चतम नागरिक सम्मान से नवाजना चाहिए।

शिक्षा नीति और समाज सुधारक


सर गौर, जिनकी शिक्षा नीति और समाज सुधारक पहल ने भारत के समाज में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भारतीय इतिहास में एक प्रेरणा के रूप में जीवित हैं। छात्रों का यह अभियान एक सशक्त प्रयास है, ताकि उनके कार्यों को नए भारत की युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके और उन्हें उचित सम्मान मिल सके। छात्रों का मानना है कि जब तक यह अभियान बड़े पैमाने पर नहीं फैलता, तब तक उनके उद्देश्य को पूरा करना संभव नहीं है। छात्रों ने इस पोस्टकार्ड अभियान को और भी व्यापक बनाने का निर्णय लिया है और अब इस मुहिम में जिले भर के हजारों युवा जुडऩे का प्रयास कर रहे हैं। यह कदम सर गौर के योगदान को न केवल सम्मान देने का एक तरीका है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हमारे युवा देश के इतिहास और उसके महान नायकों के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित हैं।

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