
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना डॉ अंजना झा
खजुराहो. खजुराहो में 50वें नृत्य महोत्सव के दौरान 1484 नृत्यांगनाओं ने कथक का सामूहिक नृत्य का गिनी बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया है। गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी एवं शिष्य डॉ. अज्ञना झा की जोड़ी के प्रयास से ये रिकॉर्ड बनाया गया है। पहले ग्वालियर में सामूहिक तबला वादन का रिकॉर्ड बना और फिर खजुराहो में सामूहिक कत्थक नृत्य का रिकॉर्ड स्थापित कर दिखाया गया है।
मध्यप्रदेश में पर्यटन एवं संस्कृति विभागों तथा स्थानीय प्रशासन की ओर अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य महोत्सव की 50वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर 19 फरवरी को रिहर्सल और 20 फरवरी 2024 को हुए भव्य उद्घाटन समारोह में 1484 कत्थक नर्तकों ने सामूहिक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति कर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। कत्थक नृत्य प्रस्तुति का संगीत एवं नृत्य संरचना संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी द्वारा किया गया। संस्कृति संचालनालय द्वारा राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर मध्यप्रदेश के कत्थक नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष मध्यप्रदेश की एक मात्र टॉप ग्रेड कलाकार पं राजेन्द्र गंगानी की वरिष्ठ शिष्या जयपुर घराने की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना डॉ अंजना झा को इस हेतु संयोजन एवं समन्वय का दायित्व सौंपा गया था कार्यक्रम को सुन्दर आकर्षक बनाने में डॉ अंजना झा की विशेष भूमिका निभाई गई। गुरु और शिष्य की जोड़ी ने कार्यक्रम को विश्वपटल पर ऐतिहासिक बना दिया। साथ ही कत्थक नृत्य विभाग के देश- विदेश के विद्यार्थियों ने भी इस कीर्तिमान के निर्माण में हिस्सा लिया। राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय महाविद्यालय और प्राइवेट महाविद्यालय के गुरुओं और विद्यार्थियों ने प्रस्तुति में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। कत्थक कुंभ कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो राकेश कुशवाहा और कुलपति प्रो पं साहित्य कुमार नाहर भी मौजूद रहे।
नृत्य की झंकार से मुस्कुराई खजुराहो की धरा
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहों में राग बसंत की लय पर 1484 कथक नृत्य साधकों के थिरकते कदमों ने 20 फरवरी 2024 को गिनीज़ वल्र्ड रिकॉर्ड रच दिया। हाथो में दीपक लेकर जब लय और ताल के साथ घुंघरू साधकों के कदम मिले तब भारतीय संस्कृति और परंपरा एक साथ मुस्कुरा उठीं। प्राचीन वाद्य यंत्र नगाड़ा की ताल और नृतकों के घुंगुरुओं की झंकार ने 50वें खजुराहो नृत्य समारोह की ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बना दिया। प्रसिद्ध नृत्य गुरु राजेंद्र गंगानी की कोरियोग्राफी में प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए नर्तक नृत्यांगनाओं ने 20 मिनट की प्रस्तुति को राग बसंत में निबध्द कर प्रस्तुत किया।
Updated on:
25 Feb 2024 11:47 am
Published on:
25 Feb 2024 11:46 am
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