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आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में बड़ा खेल- छात्राओं की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर डकारी जा रही लाखों की राशि, अधीक्षिकाएं गायब

कई छात्रावासों में ताले लटके मिले और अधीक्षिकाएं अपने कर्तव्यों से नदारद पाई गईं। पूरा तंत्र रसोइयों और चौकीदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

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छात्रावास में लटका ताला

जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का केंद्र बन गए हैं। विभाग के छात्रावासों में छात्र-छात्राओं की फर्जी उपस्थिति दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब निरीक्षण के दौरान कई छात्रावासों में ताले लटके मिले और अधीक्षिकाएं अपने कर्तव्यों से नदारद पाई गईं। पूरा तंत्र रसोइयों और चौकीदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

खाली हॉस्टल, लेकिन कागजों पर दर्ज है 50 प्रतिशत उपस्थिति

अकेले महोबा रोड स्थित 200 सीटर सीनियर कन्या छात्रावास (क्रमांक 3 और 4) की स्थिति डराने वाली है। यहां कागजों पर छात्राओं की उपस्थिति नियमित दिखाई जा रही है, लेकिन मौके पर एक भी छात्रा मौजूद नहीं मिली।

फर्जीवाड़ा- अप्रेल माह में भीषण गर्मी के कारण छात्राएं हॉस्टल में नहीं रुकीं, लेकिन अधीक्षकों ने रिकॉर्ड में 50 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति दिखाकर भोजन और अन्य सुविधाओं के नाम पर राशि का आहरण कर लिया।अधीक्षिका नदारद- इन छात्रावासों की जिम्मेदारी संभाल रहीं दीपशिखा तिवारी पिछले चार दिनों से गायब मिलीं। फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने छुट्टी का बहाना बनाया, जबकि विभाग में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी।उत्कृष्ट कन्या छात्रावास-एक माह से गायब है प्रबंधन

महत्वपूर्ण माने जाने वाले उत्कृष्ट सीनियर बालिका छात्रावास की स्थिति और भी बदतर है। यहां दोपहर के समय भी मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। स्थानीय जांच में पता चला कि यहां की अधीक्षिका माया पाठक पिछले एक महीने से हॉस्टल नहीं आई हैं। बताया जा रहा है कि रिटायरमेंट करीब होने के कारण उन्होंने ड्यूटी पर आना ही छोड़ दिया है। इसी तरह कन्या जूनियर छात्रावास 1 और 2 में भी ताले लटके मिले, जिससे छात्राओं की सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कमीशन का खेल- चौकीदार और रसोइयों का राज

शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक छात्रावास संचालित हैं, लेकिन अधिकांश में अधीक्षिकाएं अपने निजी आवासों पर रहती हैं। छात्रावासों का संचालन रसोइया और चौकीदार कर रहे हैं। सूत्रों का आरोप है कि जिला संयोजक कार्यालय के कुछ चहेते अधिकारी और अधीक्षक आपस में मिलीभगत कर फर्जी उपस्थिति के नाम पर वसूली करते हैं। हर छात्रावास से कमीशन का खेल फिक्स है, जिसके कारण इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।भोजन की राशि का बंदरबांट

बड़ा सवाल यह है कि जब छात्रावासों में विद्यार्थी मौजूद ही नहीं थे, तो भोजन किसके लिए बनाया गया? कागजों पर प्रतिदिन का मेन्यू अपडेट किया जा रहा है और राशन के पैसे डकारे जा रहे हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंधमारी का मामला है।

अधिकारी दे रहे जांच का आश्वासन

इस गंभीर मामले पर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक मनोज कुमार का कहना है छात्रावासों की स्थिति की जांच कराई जाएगी। यदि निरीक्षण में गड़बड़ी और फर्जी उपस्थिति के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधीक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।