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अब गांवों में भी मुफ्त नहीं मिलेगा पानी, पंचायतों को मिला वाटर टैक्स वसूलने और कनेक्शन काटने का अधिकार

घर के सामने आंगन धोने या अन्य फिजूलखर्ची में पानी बहाता पाया गया, तो पंचायत उस पर 100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक का जुर्माना ठोक सकती है।

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एआई

मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने एक क्रांतिकारी और कड़ा कदम उठाया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का उपयोग मुफ्त नहीं होगा। सरकार द्वारा तैयार की गई नलजल योजना नियम 2026 के तहत अब हर घर तक पहुंची पाइपलाइन के बदले उपभोक्ताओं को जल कर चुकाना होगा। इस नई व्यवस्था में पंचायतों को न केवल टैक्स वसूलने, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का भी पूरा कानूनी अधिकार दे दिया गया है। पानी व्यर्थ बहाया तो 500 रुपए तक का जुर्माना, कनेक्शन भी कट सकता है.

500 रुपए तक का जुर्माना

नई वॉटर पॉलिसी के तहत नियमों की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पानी की बर्बादी अब जेब पर भारी पड़ेगी। यदि कोई ग्रामीण अपने घर के सामने आंगन धोने या अन्य फिजूलखर्ची में पानी बहाता पाया गया, तो पंचायत उस पर 100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक का जुर्माना ठोक सकती है। इतना ही नहीं, यदि किसी उपभोक्ता ने लगातार तीन महीने तक अपने पानी का बिल जमा नहीं किया, तो पंचायत के पास उसका कनेक्शन काटने का पूरा कानूनी अधिकार होगा।

श्रेणीबद्ध उपयोग: हर महीने 10 हजार लीटर की सीमा

सरकार ने गांवों में पानी के अंधाधुंध इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए उपयोग की श्रेणियां और सीमाएं तय की हैं। खास बात यह है कि हर महीने 10 हजार लीटर तक का एक मानक उपयोग तय किया गया है। अब ग्रामीण जितना पानी इस्तेमाल करेंगे, उसी के हिसाब से उन्हें बिल का भुगतान करना होगा। पंचायतें अपनी पानी समिति के परामर्श से जल कर की दरें तय करेंगी, जो प्रत्येक गांव के रखरखाव और संचालन खर्च के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।

सामाजिक सरोकार: गरीबों और दिव्यांगों को मिलेगी राहत

हालांकि, नियमों में सख्ती के साथ-साथ मानवीय पहलू का भी ध्यान रखा गया है। पंचायतों को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वे गांव के सबसे कमजोर तबकों को राहत दे सकें। इसके तहत पंचायतें गांव के 5 से 10 ऐसे परिवारों का चयन कर सकती हैं जो अंत्योदय श्रेणी, विधवा या दिव्यांग श्रेणी में आते हैं। इन परिवारों को पानी का कनेक्शन और मासिक सप्लाई पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जा सकती है।

जवाबदेही भी तय, सप्लाई रुकी तो सचिव होंगे जिम्मेदार

यह योजना केवल टैक्स वसूलने के लिए नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को शुद्ध पानी की गारंटी देने के लिए भी है। नई नीति के अनुसार, यदि गांव में पानी की सप्लाई रुकती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर पंचायत सचिव जिम्मेदार होंगे। यदि पानी पीने योग्य नहीं पाया जाता, तो पंचायत को तुरंत सप्लाई रोककर लैब टेस्ट कराना होगा। साथ ही, हर गांव में एक वाल्व-सह-पम्प ऑपरेटर तैनात रहेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि सप्लाई में कोई तकनीकी खराबी न आए।

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