
Chhatarpur
नीरज सोनी
छतरपुर। शहर की जानराय टौरिया पर ५१ फिट की अष्ठधातु से निर्मित भगवान हनुमानजी की विशाल प्रतिमा का निर्माण किया जाना है। बुंदेलखंड की पहली और अनोखी प्रतिमा के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। पहले चरण का काम प्रतिमा के मास्टर पीस को आकार देना था। इसी आधार पर ही पूरी प्रतिमा को तैयार कर गड़ा जाना है। इस प्रतिमा का मास्टर पीस बनाने का काम शहर के युवा कलाकार दिनेश शर्मा को दिया गया था। दिनेश ने चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद प्रतिमा का मास्टर पीस तैयार कर लिया है। उन्होंने ४२ इंच की हनुमानजी की खड़ी हुई प्रतिमा तैयार की है। इसी प्रतिमा के आधार इंच की लंबाई को फुट में बदलकर मुख्य प्रतिमा बनाई जाएगी। दूसरे चरण में मास्टर पीस के आधार पर ही मिट्टी की प्रतिमा तैयार होगी। इसके सांचे बनाए जाने के बाद तीसरे चरण में ढलाई का काम शुरू होगा। इस काम में करीब एक साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। मूर्ति निर्माण और ढलाई का काम जयपुर के कारीगरों को दिया गया है जो दिनेश की देखरेख में ही पूरी प्रतिमा को अंतिम आकार देंगे।
मंगलवार-शनिवार को किया काम :
हनुमानजी जी की प्रतिमा का मास्टर पीस बनाने के लिए दिनेश ने पिछले चार महीने में मंगलवार और शनिवार के दिन ही इस प्रतिमा को बनाने का काम किया। दोनों दिन हनुमानजी के होने के कारण उन्होंने इसी दिन अपने काम का करने का निश्चय किया था। इस मंगलवार को उन्होंने प्रतिमा को अंतिम रूप दे दिया। शनिवार को वे यह प्रतिमा श्रीजानराय टौरिया के महंत और मूर्ति निर्माण समिति को सौपेंगे।
महाराजा छत्रसाल, नारद और रत्नावली प्रतिमा को भी दिया आकार :
शहर के युवा कलाकार दिनेश शर्मा ने ही जिले के धुबेला में लगी महाराजा छत्रसाल की ५१ फीट ऊंची अश्वरोही प्रतिमा का मास्टर पीस तैयार किया था, जिस आधार पर ही पूरी प्रतिमा तैयार हुई थी। इसके लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिनेश को मूर्ति अनावरण समारोह के मौके पर विशेष रूप से सम्मानित किया था। इसके पहले दिनेश ने वृंदावन में बनाए गए देश के इकलौते भगवान नारद मंदिर के लिए नाराद जी की प्रतिमा बनाई थी, जिसे पीतल में ढाला गया है। वहीं राजापुर में बनाए गए गोस्वामी तुलसीदास जी की पत्नी रत्नावली की पहली मूर्ति का निर्माण भी दिनेश ने किया है।
संतों की प्रतिमाएं बनाने में है खास रुचि :
युवा कलाकार दिनेश शर्मा को अध्यात्म से गहरी रुचि है। वे अमूमन तो हर देवी-देवता से लेकर महापुरुषों की प्रतिमा तैयार कर लेते हैं, लेकिन संत-मनीषियों की प्रतिमाएं बनाने में उनकी गहरी रुचि है। नौगांव के प्रसिद्ध सूफी बाबा गुलाब शाह की उन्होंने सबसे पहले प्रतिमा बनाई थी। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद के परमार्थ आश्रम के लिए औघड़ बाबा भगवान राम और औघड़ बाबा कीनाराम की प्रतिमाआएं भी दो बार बनाईं। इसके बाद तो करपात्री महाराज, रामहर्षण दास महाराज, कृपालु महाराज, दयालु बाबा से लेकर जबलपुर के प्रसिद्ध संत की प्रतिमा को हुबहू आकार दिया। देशभर के मंदिरों-आश्रमों में दिनेश की गड़ी प्रतिमाएं पूजी जा रही हैं।
Published on:
31 Jan 2019 09:00 am
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