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नेचुरल पकने वाला चित्तीदार केला बाजार से हुआ गायब, गैस से पकाकर हो रही सप्लाई

शहर की हर सडक़ के किनारे बिक रहा केला स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद है,ऐसा समझने की भूल मत करिए। शहर में सप्लाई हो रहा केला एथीलीन गैस से पकाया जा रहा है। एथलीन गैस का इस्तेमाल करके कच्चा केला दो दिन में पका लिया जाता है।

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इस तरह दिखता है एथलीन गैस से पका केला

छतरपुर. शहर की हर सडक़ के किनारे बिक रहा केला स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद है,ऐसा समझने की भूल मत करिए। शहर में सप्लाई हो रहा केला एथीलीन गैस से पकाया जा रहा है। एथलीन गैस का इस्तेमाल करके कच्चा केला दो दिन में पका लिया जाता है। लेकिन इससे भी जल्दी पकाने के चक्कर में ज्यादा मात्रा में एथलीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि सेहत के लिए फायदेमंद केला एथलीन के असंतुलित प्रयोग से बीमारी की वजह बन गया है। केला खाने से बीमारी भी छोटी-मोटी नहीं,बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को दावत दे रहे हैं। इसके साथ ही ये केला सेहत के लिए इतने नुकसानदायक हैं कि इससे पाचन, किडनी और न्यूरो सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। सेहत बनाने के नाम पर अक्सर लोग चमकदार व बिना दाग-धब्बे वाले पीले केले खाते हैं। जबकि इन फलों के रंग के पीछे बैन केमिकल और मानक से ज्यादा एथिलीन इस्तेमाल होना मुख्य वजह है। सुबह चमकदार दिखने वाले केले का रंग शाम तक एकदम फीका हो जाए तो समझिए इसे इथेफोन केमिकल के घोल में डूबोकर पकाया गया है।

पेट खराब,मुंह में छाले,अल्सर और कैंसर का खतरा


झांसी से आने वाला केला एथीलीन से पकाए जाने के वजह से सेहत पर असर डाल रहा है। कच्चे केला को तुरंत पकाने के लिए ेएथीलीन का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। अधिक मात्रा में एथीलीन के इस्तेमाल से कच्चे केले को कुछ ही घंटों में पका कर बाजारों में जहर के रूप में परोसा जाता है। इधर,कार्बाइड से भी केले पकाए जा रह्े हैं, कार्बाइड से पकाए गए केले खाने से कई तरह की दिक्कतेंं हो सकती हैं। कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फॉरस होता है, इससे एथिलिन ऑक्साइड गैस बनती है, जिससे फल पक जाते हैं। यह एक प्रकार का कैमिकल है, जो सेहत के लिए खतरनाक है। इससे पेट खराब, उलटी, लूज मोशन, मुंह में छाले जैसी परेशानी हो सकती है। लेकिन रेग्युलर इस तरह से पकाए गए फल खाने वाले को आंत की लाइनिंग में अल्सर हो सकता है। आगे जाकर यह अल्सर ठीक नहीं हुआ तो कैंसर का रूप ले सकता है। इसकी वजह से बच्चों में सांस की दिक्कत हो सकती है या आंखों की रोशनी कम हो सकती है।

सामान्य दिनों में 2250 कैरेट केला रोज की खपत


छतरपुर शहर में आम दिनों में केला की खपत लगभग 2250 कैरेट प्रतिदिन है, जो त्यौहार के दिनों में दो से तीन गुना बढ़ जाती है। बुरहानपुर इलाके में उत्पादित होने वाला कच्चा केला झांसी आता है,फिर वहां स्टोर्स में एथीलीन से पकाया जाता है,पके हुए केले को छतरपुर के थोक कारोबारियों को बेचा जाता है। थोक कारोबारियों से ठेले वाले और फल दुकानवाले केला खरीदकर ग्राहकों को बेचते हैं। एथीलीन के प्रवाव से केला चमकदार पीला हो जाता है,जबकि तना हरा रह जाता है। 12 घंटे में ही केले के छिलके में गहरे काले गलने या सडऩे के निशान बनने लगते हैं। जबकि नेचुरल पका चित्तीदार केला एक समान गलता या सड़ता है।

सेहत के लिए खतरनाक


कैमिकल से पके फल खाने से सेहत को लेकर समस्याएं आती हैं। पकाने में इस्तेमाल कैमिकल की मात्रा और प्रकार के हिसाब से हार्ट की प्रोबलम, ब्लड प्रेशर, मुंह में छाले,अल्सर की शिकायत होती है। इन फलों को लागातार खाने से कैंसर तक की समस्या हो सकती है।
डॉ.शिवम दीक्षित,एमडी