
अब पुलिस ही बनाने लगी अपराधी, बिना जांच के निर्दोषों थोप रहे केस
छतरपुर। जिले की पुलिस इन दिनों लोगों की आपसी रंजिश भुनाने का मजबूत हथियार बन गई है। इसी का फायदा उठाकर लोग अपनी आपसी रंजिश भुनाने के लिए किसी पर भी झूठा केस लगवा रहे हैं। नतीजतन अपराधी बच जाते हैं और निर्दोष लोग जेल जाने मजबूर हो रहे हैं। एक माह के अंदर तीन ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्दोष लोगों पर पुलिस ने बिना जांच के झूठा केस बना दिया और अब पीडि़त खुद की बेगुनाही के सबूत लेकर घूम रहे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला भी कोई नहीं है। पुलिस के विवेचना अधिकारी ऐसे मामलों में दोष भी साबित नहीं कर पाते हैं, जिसका परिणाम होता यह होता है कि कमजोर विवेचना के कारण अपराधी पुलिस कोर्ट से बरी हो जाते हैं। लेकिन बाहर आकर वहीं निर्दोष लोग अपना बदला लेने के लिए नया अपराध कर बैठते हैं।
केस 1.
गैंग रेप, अपहरण और पॉस्को एक्ट में फंसाया :
शहर की सीमा से सटे ओरछा रोड थाना क्षेत्र के ग्राम धमौरा में पिछले महीने २५ सितंबर को एक कुशवाहा परिवार की १४ वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक से लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसका फोन परिजनों के पास पहुंचा और उसने खुद के नोयडा में होने की जानकारी दी। इधर लापता होने के दिन ही लड़की के परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। परिजनों ने बेटी के नोयडा में होने की सूचना दी तो पुलिस जाकर उसे ले आई। लड़की ने अपने बयान में बताया कि उसके मनोज कुशवाहा, रवि पंडित और चैनू कुशवाहा जबरन अपने साथ ले गए थे और उसके साथ गैंगरेज किया। इस मामले में धमौरा निवासी जिस युवक चैनू का नाम आया है, वह घटना के दिन से लेकर लड़की के वापस आने तक अपने देवपुर तिराहा स्थित ढावा पर ही थी। चार दिन की सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग में चैनू पूरे समय ढावा पर काम करते नजर आ रहा है। लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ गैंग रेप, पॉस्को एक्ट सहित अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। जबकि चैनू इस घटना में शामिल ही नहीं था। वहीं मनोज और रवि भी खुद को बेगुनाह बता रहे हैं। चैनू के पिता फद्दू कुशवाहा ने एसपी को भी इस संंबंध में आवेदन देकर सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग की सीडी दी है। लेकिन उसकी कोई नहीं सुन रहा है।
केस 2.
पुलिस आरक्षक के बेटे को ही बना दिया लुटेरा-डकैत :
बमीठा थाना क्षेत्र की चंद्रनगर चौकी में पदस्थ महिला आरक्षक पुष्पा सिंह के बेटे सागर सिंह को उनके ही विभाग ने कुख्यात लुटेरा और डकैत बना दिया। सागर सिंह अपने परिवार के साथ चंद्रनगर में रहता था। वह प्राइवेट यात्री बस में कंडेक्टरी करता था। तीन माह पहले टीकमगढ़ के एक प्रभावशाली बस ओनर के स्टाफ से उसका विवाद हो गया था। सवारियों को लेकर हुआ मामूली विवाद थाना तक पहुंचा। बस स्टाफ ने सागर सिंह के खिलाफ रुपए लूटने और वसूली का आरोप लगा दिया। इस पर पुलिस ने बिना जांच किए ही उस पर लूट का मामला दर्ज कर लिया। इस मामले से वह निपट भी नहीं पाया था कि चंद्रनगर चौकी इलाके में पिछले महीने इलाके के प्रभावशाली गुड्डे खान द्वारा खिलवाए जा रहे जुआ फड़ को महाराजपुर से आए बदमाशों ने लूट लिया था। एक बंदूक भी लूटी गई थी। जो महाराजपुर में मिली थी। यह पूरा मामला दो जुआ माफियाओं के बीच की आपसी रंजिश का था, लेकिन पुलिस ने इस मामले में गुड्डे खान के कहने पर सागर सिंह सहित कुछ लोगों पर डकैती का झूठा मामला दर्ज करवा दिया। जबकि जिस घर में जुआ खिला रहा था और जो जुआ खिलवा रहा था, उनके खिलाफ पुलिस ने कोई भी मामला दर्ज नहीं किया। सागर सिंह पर केस लगा तो वह हाजिर होकर जेल चला गया। लेकिन उसके जेल जाने के बाद एसपी के ओर से उसके ऊपर इनाम भी घोषित हो गया। इसी मामले में राजनगर निवासी उमर खान और बंटे खटीक के खिलाफ भी केस दर्ज करवाया गया था। यह युवक भी एसपी से लेकर डीआइजी तक के पास गुड्डे खान की रिकॉर्डिंग लेकर गए थे, जिसमें वह केस से नाम हटवाने एसपी के नाम से दो लाख रुपए की मांग कर रहा था।
हत्या के आरोपी आज तक नहीं पकड़े :
उधर लवकुशनगर थाना क्षेत्र के ग्राम पीरा में २९ जून २०१८ की रात कीरत विश्वकर्मा की हत्या गला रेतकर कर दी गई थी। इस मामले में उसके भाई सोहन लाल ने गांव के ही वीरेंद्र यादव, दुर्ग सिंह यादव, रामशरण उर्फ मुकेश यादव, बबलू यादव सहित दो अन्य आरोपियों पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में केवल दो लोगों को पकड़कर जेल भेजा गया। बाकी आरोपी आज तक नहीं पकड़े। जबकि घटना स्थल एक मोबाइल जब्त हुआ था और साक्ष्य भी जुटाए गए थे। लेकिन पुलिस ने मुख्या आरोपियों को बचाकर रखा। सोहनलाल विश्कवर्मा दर्जनों आवेदन अधिकारियेां से लेकर मुख्यमंत्री तक को दे चुका है। उसका परिवार गांव में भी नहीं रह पा रहा है। लेकिन पुलिस इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।
कुख्यात बदमाशों के संपर्क में रहते हैं पुलिसकर्मी :
सिटी कोतवाली, ओरछा रोड और सिविल लाइन थाना के कुछ पुलिसकर्मी शहर के कुख्यात और पेशेवर आरोपियों के संपर्क में रहते हैं। उन्हें अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को किसी झूठे केस में फंसाकर जेल भेजना होता है तो वह बदमाशों से संपर्क करके कट्टा, छुरा या मादक पदार्थ मंगवाकर निर्दोष व्यक्ति से इसकी जब्ती दिखाकर केस बना देते हैं। इस ट्रिक का इस्तेमाल पुलिस लंबे समय से करती आ रही है। कई बार पेशेवर अपराधियों को जेल भेजने के लिए पुलिस ऐसा हथकंडा इस्तेमाल करती है। लेकिन कानून से खिलवाड़ का यह तरीका समाज में अपराध को जन्म देता है। पुलिस के लिए यही कमाई का जरिया बन जाता है।
यहां तो पुलिसकर्मी ही कर रहे अपराध :
जिले में कई मामले ऐसे हुए हैं, जिसमें पुलिसकर्मी ही अपराधी के रूप में सामने आए हैं। सिटी कोतवाली में पदस्थ एक सिपाही की बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत सीधे तौर पर हत्या थी, लेकिन उस मामले को दबाकर पुलिस ने उसे शहीद का दर्जा दिला दिया। इसके पहले कुछ साल पहले घुवारा में हुई चोरी के मामले में पुलिसकर्मी ही आरोपी निकले थे। कई बार सिटी कोतवाली में पदस्थ सिपाहियों पर भी ऐसे आरोप लग चुके हैं कि वे अपराधियों से मिलकर जुआ फड़ चलवा रहे हैं। हालही में बक्स्वाहा में २४ भैंसों की चोरी के मामले में पुलिसकर्मियों ने ही 6 भैंसे चोरी कर ली थी। मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने अपने सिपाहियों को बचाने का प्रयास किया। उन्हें मामलू दंड तो दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें पुलिस की भूमिका कई बार अपराधियों जैसी ही रहती हैं। इन हालातों में समाज का भरोसा पुलिस पर से उठा जाता है।
जो निर्दोष होता है, जांच के बाद उनके नाम निकाले भी जाते हैं :
हर आपराधिक मामले में है विवेचना होती है। हर केस में जांच महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कई बार अगर निर्दोष लोग फंस भी जाते हैं तो उनके नाम विवेचना से अलग किए जाते हैं। पुलिस की कोशिश होती है कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति न फंसे। अगर कोई निर्दोश मेरे पास आता है तो जांच कराकर उसके साथ न्याय किया जाएगा।
- विनीत खन्ना, एसपी, छतरपुर
Published on:
26 Oct 2018 01:26 pm
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