छतरपुर. बिना लाइसेंस के चल रहे गोदाम में 48 कंपनियों के नाम से लोकल चावल की पैकिंग कर बाजार में महंगे दामों पर खपाया जा रहा था। असाटी बंधुओं द्वारा जिन बोगस कंपनियों के नाम पर चावल की पैकिंग की जा रही थी, इनमें एक का भी लेबल रजिस्ट्रेशन नहीं है। इतना ही नहीं असाटी गोदाम में बोरियों में पैक हजारों क्विंटल चावल में न तो बैच नंबर है और न ही निर्माण और एक्सपायरी डेट पाई गई है। इसके बाद भी कोतवाली पुलिस खाद्य सुरक्षा अधिकारी के दिए गए आवेदन पर दोषियों पर एफआइआर दर्ज नहीं कर पाई है।
नामचीन ब्रांड की बना रहे नकल
असाटी बंधुओं के गोदाम में इंडिया गेट बासमती चावल 9754 बोरियां मिली है। इनमें 10 से लेकर 20 किग्रा चावल की भी पैकिंग पाई गई है। गोदाम में इंडिया गेट सुप्रीम, इंडिया गेट रेगुलर, इंडिया गेट मेगरा, इंडिया गेट मिनी मोगरा का भारी मात्रा में स्टॉक पाया गया। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब असाटी बंधुओं के पास लाइसेंस ही नहीं है तो नामी कंपनियों का चावल का कैसे भंडारण किया गया है। असाटी बंधुओं के द्वारा बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल लंबे समय गोलमाल किया जा रहा था। फूड सेफ्टी ऑफिसर अमित वर्मा ने बताया कि गणेश असाटी इंडिया गेट चावल के खरीदने के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं।
यूपी, बिहार से हजारों टन चावल की खरीदी
असाटी बंधुओं की गोदाम में हुई जांच से यह बात सामने आई है कि उनके द्वारा बिहार और यूपी एवं राजस्थान से चावल की बड़ी मात्रा में खरीदी की गई है। इन्होंने यह चावल असाटी गोदाम भंडारित कराया है। छापे में प्रशासन को कई कंपनियों की बोरिया और रैपर मिले हैं, उनमें लूज चावल की पैकिंग कर खपाया जा रहा है।
ये है मामला
तहसीलदार सुनील वर्मा ने 18 मार्च की रात नारायणपुरा रोड में महेश असाटी राइस मिल में खड़े ट्रक क्रमांक सीजी 04 एमएल 4019 की जांच की थी। जांच में एमपीएससीएससी मार्का युक्त चावल की बोरियां ट्रक में लदी हुई पाई गई। जांच के समय वाहन चालक एवं गोदाम के चौकीदार के पास चावल के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं पाए गए। इसके चलते तहसीलदार ने ट्रक को जब्त करते हुए 208.20 क्विंटल चावल को वेयर हाउस में भंडारित कराते हुए वाहन को थाने में खड़ा कराया था। आरोप है कि तहसीलदार ने 19 मार्च को भी राइस मिल संचालक से दस्तावेज मांगे, लेकिन राइस मिल के संचालक महेश असाटी के द्वारा चावल की खरीदी और परिवहन के रिकॉर्ड टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए। चावल में सरकारी मार्का होने ने तहसीलदार ने पूरे मामले की जिला आपूर्ति अधिकारी बीके सिंह से कराई थी। जांच के दौरान कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ऋषि शर्मा ने मौके पर पंचनामा तैयार करते हुए जब्त शुदा चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली का होने का दावा किया।