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नाबालिगों के हाथ में चाबी थमा रहे अविभावक, हादसों का डर सिर पर

छोटे बच्चों को बाइक, कार व बड़ी गाडिय़ों की चाबी थमाने का ट्रेंड शहर में बढ़ चुका है। आज शहर की सडक़ों पर नाबालिग बच्चे सरपट कार दौड़ा रहे हैं। जबकि व्हीकल एक्ट की गाइडलाइन के अनुसार 18 वर्ष की आयु से कम बच्चों को वाहन चलाना और देना दोनों दंडनीय अपराध हैं, लेकिन शहर में 14 से 16 वर्ष के बच्चे भी बेखौफ वाहन दौड़ा रहे हैं।

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ई-रिक्शा जैसे वाहन भी चला रहे

बदलते समय के साथ आजकल के माता-पिता भी एडवांस हो गए हैं, जहां पहले बच्चों की परवरिश को एक जिम्मेदारी समझा जाता था। आज बदलती पीढ़ी के साथ बच्चों को मशीन बनाने की होड़ लगी हुई है। छोटे बच्चों को बाइक, कार व बड़ी गाडिय़ों की चाबी थमाने का ट्रेंड शहर में बढ़ चुका है। आज शहर की सडक़ों पर नाबालिग बच्चे सरपट कार दौड़ा रहे हैं। जबकि व्हीकल एक्ट की गाइडलाइन के अनुसार 18 वर्ष की आयु से कम बच्चों को वाहन चलाना और देना दोनों दंडनीय अपराध हैं, लेकिन शहर में 14 से 16 वर्ष के बच्चे भी बेखौफ वाहन दौड़ा रहे हैं।

23 बच्चों ने अपनी जान गंवायी

बीते आठ माह में शहर में 273 नाबालिग सडक़ हादसे का शिकार हुए हैं। जबकि 23 बच्चों ने अपनी जान गंवायी है। इसके बावजूद भी अविभावक बच्चों को अपने वाहनों की चाबी थमा रहे हैं।गैरजिम्मेदार हरकतजिला अस्पताल में आए दिन नाबालिग बच्चों के सडक़ हादसे के मामले देखने को मिल रहे हैं। इसमें या तो बच्चे गंभीर रूप से शिकार हो रहे हैं। या फिर उन्होंने किसी को अपना शिकार बनाया है। जनवरी 2025 से अब तक 273 नाबालिग बच्चे सडक़ हादसों में घायल हुए हैं। वहीं 23 बच्चों की दुर्घटना में मौत हुई है। इसके बाद भी अविभावक चेते नहीं। नतीजन सडक़ पर आपको 18 वर्ष की कम उम्र के बच्चे वाहन चलाते दिख जाएंगे।

ई-रिक्शा भी चला रहे नाबालिग

शहर में महज कार व बाइक को चलाने में नाबालिग पीछे नहीं, बल्कि ई-रिक्शा जैसे वाहन भी चला रहे हैं। छत्रसाल चौक, स्टेशन और बस स्टैंड पर आपको दर्जनों की संख्या में नाबालिग बच्चे ई-रिक्शा चलाते हुए दिख रहे हैं। जबकि इनका ई-रिक्शा अविभावक के नाम पर रजिस्टर्ड है और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ये वाहन चला रहे हैं।

हादसों का बना रहता है डर

नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन को सरपट दौड़ाने से हादसों का खतरा बना रहता है। कई मामले ऐसे भी आए हैं जहां नाबालिग बच्चों ने बुजुर्गों और राहगीरों को अपना शिकार बनाया है। क्राइम रिकॉर्ड के अनुसार बीते वर्ष से अब तक 125 लोग बच्चों के द्वारा सडक़ हादसे का शिकार हुए।

अविभावक जा रहे साथ में

शहर में आपको कई ऐसे अविभावक देखने मिल जाएंगे जो नाबालिग बच्चों के साथ बाजार में बाइक व कार से आते हैं। इसमें नाबालिग बच्चे वाहन को चलाते दिखते हैं। समय के बदलते परिवेश में अविभावकों का कम उम्र के बच्चों को वाहन थमाना हादसों को न्यौता दे रहा है।

इनका कहना है

नाबालिग बच्चों को वाहन देने के संदर्भ में कार्रवाई की गई है और कुछ नाबालिग बच्चों पर 12 हजार रुपए का चालान किया गया है। बच्चों के अविभावकों को हिदायत दी गई है कि उन्हें वाहन न दिया जाए नहीं तो अविभावकों पर कार्रवाई की जाएगी।

बृहस्पति साकेत, यातायात प्रभारी

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