
ग्रामीण इलाकों में रहवासियों को नहीं मिल रहा पीने के लिए शुद्ध पानी
छतरपुर. भले ही सरकार शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे कर रही हो, लेकिन जिले में ग्राम पंचायतों के लिए यह दावा खोखला साबित हो रहा है। प्रदूषित जल ही यहां लोगों को मिल रहा है। ग्रामीण सरकारी हैंडपंप के प्रदूषित पानी को पीकर बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं। हालात हैं कि ग्राम पंचायत में मौजूद सरकारी नल दूषित पानी उगल रहे हंै और कुछ नल तो जर्जर व बदहाल अवस्था में बंद पड़े हैं। जिससे लोगों आसपास के कुओं से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं जहां पर भी लोगों शुद्ध पेय जल नहीं मिला पा रहा है। यही कारण है कि पेयजल दूषित होने के कारण क्षेत्र में अनेकों बीमारियों ने पाव पसार रखे हैं। इसमें खास तौर पर पेट से जुड़ी परेशानियों हो रहीं हैं।
जिले में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता से प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। बारिश में जिले में गंदा पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। जिले में पानी गुणवत्ता को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जबकि राष्ट्रीय पेयजल नीति ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेय जल मुहैया करवाने के लिए कार्य की अपेक्षा है।
ज्ञात हो पानी की अशुद्धियों से कई तरह की बीमारियां होती हैं। इन अशुद्धियों को जांचने का जिम्मा पीएचई के पास है। पीएचई के पास पानी जांच के लिए जिले में लेबोरेटरी भी हैं, हालांकि ऐसा कहा जाता है कि नियमित अंतराल पर पीएचई सेंपल लेकर लैबों में जांच के लिए पानी भिजवाते हैं। लेकिन जमीनी स्थिति में कोई सेंपल नहीं लिए जाते हैं। जिसके फलस्वरूप अस्पतालों में पेट से जुडी बीमारियों को लेकर लोगों की भीड़ आ रही है। एक औशतन जिला अस्पताल में प्रतिदिन १५० बच्चे पेट दर्ज सहित समस्यों से पीडि़त आ रहे हैं और कुल ऐसे मरीजों की संख्या जिला अस्पताल में प्रतिदिन ४ सौ है। डॉक्टरों का भी कहना है कि बदलते मौसम में लोगों को शुद्ध पानी पीना चाहिए, शुद्ध पानी नहीं होने से पेट सहित कई प्रकार की समस्याएं हो सकतीं हैं।
डॉक्टरों के अनुसार गंदे पानी का उपयोग करने से पेट संबंधी बीमारी बढ़ सकती हैं। जिसमें पेट दर्द, टाइफाइड, डायरिया, चर्म रोग भी हो सकता है। दूषित पानी में कीटाणु भी होते हैं। ऐसे में आरओ का पानी उपयोग करें। अगर घर में आरओ नहीं है तो पानी उबालकर उसे ठंडा करके पी सकते हैं, जो ज्यादा अच्छा रहेगा। साथ ही घर में पीने वाले पानी में फिटकरी भी घोल सकते हैं।
इन्हीं पर आश्रित गांव के लोग
ग्रामीण क्षेत्रों में जन समुदाय को सुरक्षित पीने के पानी के लिए मुख्यत: हैंडपंप व नल-जल प्रदाय योजनाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हैंडपंप व नल-जल प्रदाय योजनाओं के बंद रहने पर दूषित जल उपयोग में लाने की आशंका बनी रहती है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। इनमें पानी से फैलने वाले रोगों से बचने की प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है। पेयजल योजनाओं को निरंतर चालू रखना बेहद जरूरी है। वहीं गांवों में हैंडपंप चाराब होने की दशा में लोगों को कुएं का सहारा लेना पड़ता है।
स्वच्छ जल स्वस्थ जीवन की निशानी
स्वच्छ जल स्वस्थ जीवन की निशानी है, भारत में लगभग 80 फीसद बीमारियां अशुद्ध जल पीने से हो रही हैं। पानी घरेलू उपयोग में लेते हैं वह शुद्ध नहीं है तो हमारे बीमार पडऩे का खतरा बना रहता है। अतिसार, टाइफाइड, पीलिया, हैजा, खुजली, पोलियो, नारू व मलेरिया जैसे रोगों के कीटाणु दूषित पानी में पाए जाते हैं। इन रोगों को पानी से फैलने वाले रोग कहा जाता है। पीने व घरेलू उपयोग के लिए हम शुद्ध पानी का उपयोग कर स्वयं व अपने परिवार को भयंकर बीमारियों से बचा सकते हैं।
इनका कहना है
बारिश के दौरान पानी दूषित होने की संभानाएं अधिक होती हैं, इससे विभागद्वारा बारिश के पहले और बाद में पानी की जांच की जाती है। वहीं अभी सभी गांवों में कुओं के लिए लिक्विड क्लोरीन भेजी जा रही है, जो कुएं के पानी का साफ करेगा। वहीं हैंडपंप की जांच करने के सुधार कराया जाएगा।
संजय कुम्हरे, इइ, पीएचइ, छतरपुर
Published on:
22 Aug 2022 06:02 pm
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