कई शहरों में गर्मी और प्रदूषण से राहत पाने के लिए एंटी स्मोक गन से पानी की बौछारें डाली जा रही हैं, और अब छतरपुर प्रशासन भी इस उपाय को अपनाने का जा रहा है।
छतरपुर. राजस्थान से आ रही पश्चिमी शुष्क हवाओं से भीषण गर्मी का दौर जारी है। इस समय छतरपुर जिले में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जिससे शहरवासी गर्मी के कहर से परेशान हैं। शहर की सडक़ों पर चलने वाले लोगों और वाहन चालकों को राहत देने की आवश्यकता महसूस हो रही है। राजस्थान के कई शहरों में गर्मी और प्रदूषण से राहत पाने के लिए एंटी स्मोक गन से पानी की बौछारें डाली जा रही हैं, और अब छतरपुर प्रशासन भी इस उपाय को अपनाने का जा रहा है। नगरपालिका ने मिस्ट मैन के नाम से फुहार फेंकने वाली मशीन मंगवाई है। इस मशीन के माध्यम से पानी की बौछारें शहर की सडक़ों पर फेंकी जाएंगी, जिससे गर्मी के असर को कम किया जा सके और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
जयपुर नगर निगम में एंटी स्मोग गन का इस्तेमाल प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है, खासकर हेरिटेज क्षेत्र में प्रमुख चौपड़ों पर जहां धुंध और प्रदूषण के कण अधिक होते हैं। अब राजस्थान में यह गन गर्मी से राहत के लिए भी इस्तेमाल की जा रही है। यह प्रक्रिया प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ हवा को ठंडा भी करती है, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके। छतरपुर में भी इस कदम को लागू करने के लिए विचार किया जा रहा है, जिससे गर्मी के बीच कुछ राहत मिल सके।
एंटी स्मॉग गन को स्प्रे गन, धुंध गन या वाटर कैनन भी कहा जाता है। यह एक मशीन है, जो नेबुलाइज्ड पानी की बारीक बूंदों का हवा में छिडक़ाव करती है। यह पानी की बौछार हवा में फैलाए जाने वाले प्रदूषण और धुंध के कणों को अवशोषित करती है, जिससे वातावरण में साफग़ी आती है। इन मशीनों को पानी के टैंक से जोड़ा जाता है और हाई-प्रेशर प्रोपेलर के जरिए 50 से 100 माइक्रोन की छोटी बूंदों को हवा में फेंका जाता है।
पश्चिमी हवाओं के कारण अधिकतम तापमान बढऩे का सिलसिला जारी है। जिले में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम केंद्र खजुराहो के प्रभारी आरएस परिहार के अनुसार, तापमान पिछले कुछ दिनों में बढ़ता जा रहा है और गर्म हवाओं का असर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
एंटी स्मोग गन में एक हाई स्पीड पंखा होता है, जो मशीन को ऑन करने पर पानी की बौछार हवा में करता है। यह बौछार प्रदूषण और धुंध के कणों को जमीन पर लाने का काम करती है। इन मशीनों से 2.5 माइक्रोन तक के खतरनाक कणों को भी कम किया जा सकता है। इन मशीनों की ताकत इतनी है कि यह लगभग 100 मीटर तक लंबाई में पानी की बौछार कर सकती हैं और 150 फीट की ऊंचाई से भी प्रदूषण को कम कर सकती हैं।