
मेडिकल कॉलेज छतरपुर
बुंदेलखंड अंचल के लिए यह खबर उम्मीद और बदलाव का संकेत लेकर आई है। वर्षों से मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे छतरपुर जिले को अब वह सौगात मिलने जा रही है, जो न केवल शिक्षा बल्कि स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास की तस्वीर भी बदल देगी। छतरपुर मेडिकल कॉलेज में इसी वर्ष पहला शैक्षणिक सत्र शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। पहले ही सत्र में 250 एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश मिलेगा, जिससे जिले के होनहार विद्यार्थियों को अब डॉक्टर बनने के सपने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
छतरपुर-नौगांव रोड पर स्थित गौरगांव में बन रहा मेडिकल कॉलेज परिसर अब अपने लगभग पूर्ण स्वरूप में नजर आने लगा है। विशाल बहुमंजिला शैक्षणिक भवन, आधुनिक क्लासरूम, प्रयोगशालाएं, प्रशासनिक ब्लॉक, डीन कार्यालय और फैकल्टी कक्ष तैयार हो चुके हैं। परिसर में तेजी से अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है, ताकि मान्यता प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की कमी न रह जाए।
मध्य प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 532 पदों को स्वीकृति देकर यह साफ कर दिया है कि सरकार इस संस्थान को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने के मूड में है। इन पदों में डॉक्टर, प्रोफेसर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कॉलेज के लिए फर्नीचर, लैब उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीदी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 1200 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल की भी योजना तैयार है। कॉलेज परिसर में अस्पताल के लिए 14 एकड़ भूमि सुरक्षित रखी गई है। अधिकारियों के अनुसार कॉलेज शुरू होने के करीब एक वर्ष बाद अस्पताल का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा। अनुमान है कि जब पहला बैच अंतिम वर्ष में पहुंचेगा, तब तक अस्पताल भी बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद छतरपुर जिला एक बड़े रेफरल मेडिकल सेंटर के रूप में उभरेगा।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना से नौगांव रोड क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है। यह इलाका अब धीरे-धीरे मेडिकल हब के रूप में पहचान बना रहा है। कॉलेज के आसपास निजी निवेश भी बढ़ा है। क्षेत्र में दो बड़े निजी अस्पतालों का निर्माण चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और मेडिकल से जुड़ी अन्य संस्थाओं सहित करीब 16 बड़े स्वास्थ्य संस्थान विकसित हो सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज के कारण आसपास के गांवों में जमीनों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। गौरगांव, मवासी, धमौरा और कैंडी जैसे गांव अब निवेशकों की नजर में हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि बीते दो वर्षों में जमीनों के भाव लगभग दोगुने हो चुके हैं। जहां पहले एक एकड़ जमीन 40 से 50 लाख रुपए में मिल जाती थी, अब वही जमीन एक करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायियों ने भी यहां जमीन खरीदनी शुरू कर दी है।
मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन एवं सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र गुप्ता के अनुसार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें मार्च माह से तेजी आएगी। निर्माण एजेंसी पीआईयू का लक्ष्य मार्च 2026 तक पूरे कैंपस का निर्माण कार्य पूरा कर चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपने का है। कुछ आवासीय क्वार्टर और सहायक भवनों का कार्य अभी शेष है, लेकिन इन्हें भी समय रहते पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
Published on:
14 Jan 2026 11:24 am
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