
The village did not have water 70 year old man dug well in 18 month
अनूप भड़ैरिया. छतरपुर। जिले के लवकुशनगर जनपद क्षेत्र के ग्राम हडुआ के ७० वर्षीय किसान सीताराम लोधी ने बिहार के दशरथ मांझी की तरह ऐसा काम किया है जो लोगों के लिए मिसाल बन गया है। गांव में पानी नहीं था। एक हैंडपंप के भरोस गांव की तीन सौ की आबादी थी। गर्मियों में यह हैंडपंप भी सूख जाता तो गांव में विकराल संकट हो जाता था।
शासन-प्रशासन ने जब कोई मदद नहीं की तो बुजुर्ग किसान सीताराम ने खुद ही अपने खेत पर कुआं खोदने का बीड़ा उठाया। १८ महीने में खुद की दम पर एक ८० फीट का कुआं खोद डाला है। इस असंभव काम में उसे तमाम मुश्किलें आईं, लेकिन बिना हिम्मत हारे सीताराम ने अपनी जिद को पूरा करके ही दम लिया। इस काम में उसे न तो सरकारी मदद मिली और न ही गांव वालों ने साथ दिया। पहले लोग उसे पागल समझते रहे। बाद में जब कुआं आकार लेने लगा तो लोग उसके साहस को सलाम करने लगे।
इधर बजुर्ग किसान की मेहनत भी रंग लाई और कुएं में पानी निकल आया है। लेकिन बारिश में फिर से ढह जाने के कारण उसकी मेहनत बेकार चली गई। अब पिछले दो माह से किसान उसी कुएं को खोदने में लगा है। इसके पहले भी किसान ने दो कुएं खोदे हैं जिनमें आज भी पानी है। अब वह तीसरा कुआं खोदने में जुटा है।
जिला मुख्यालय से करीब ६५ किमी दूर है ग्राम हडुआ। लवकुशनगर जनपद मुख्यालय से महज ६ किमी दूर इस गांव में पेयजल के कोई इंतजाम नहीं है। गांव में केवल एक हैंडपंप है जो गर्मियों में सूख जाता था। पेयजल के कोई और स्त्रोत भी नहीं थे। ऐसे में गांव वालों को परेशान देखकर एक ७० साल के किसान सीताराम लोधी ने बिना किसी की मदद का इंतजार किए खुद ही कुआं खोद डाला। सीताराम बताते हैं कि उसने साल २०१५ में गांव वालों की परेशानी देखकर उसके मन में कुआं खोदने का विचार आया। इसलिए उसने सोचा क्यों न खुद के खेत पर कुआं खोदे। उसके पास २० एकड़ जमीन होने के कारण प्रशासन ने उसे अपात्र मानकार कोई मदद नहीं की। लिहाजा उसने खुद अकेले ही कुआं खोदना शुरू कर दिया।
पिछले साल जून २०१७ में कुएं से पानी निकल आया तो उसने कुआं खोदना बंद कर दिया। लेकिन बारिश होने की वजह से कुआं ढह गया। पूरी मेहनत बेकार होने से थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। दो माह पहले उसने फिर कुएं में उतरकर उसे खोदना शुरू कर दिया है। कुएं में पानी निकल आने के बाद बुजुर्ग को संतोष है। लेकिन उसे इस चिंता है कि अगर कुआं पक्का नहीं बंधा तो कहीं वह फिर से न ढह जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शासन-प्रशासन कुएं को पक्का करा देता है तो पूरे गांव के लिए यह कुआं वरदान साबित होगा। क्योंकि गांव में अभी भी पेयजल का संकट बना हुआ है।
खुद ने नहीं की शादी, पूरा जीवन गांव की भलाई में लगा दिया :
7० वर्षीय किसान सीताराम लोधी ने शादी नहीं की। उसके भाई और भतीजे हैं। सीताराम ने अपना जीवन पूरे गांव की भलाई के लिए लगा दिया। उसने अपने जीवन में अब तक तीन कुएं गांव में ही खोदे हैं। इसके पहले वह अपने खेत पर दो कुएं खोद चुका है। जिसका उपयोग उसके परिवार के भाई-भतीजे करते हैं। साल २०१५ से उसने गांव वालों के लिए अपनी जमीन पर तीसरा कुआं खोदना शुरू किया था। उसमें पानी तो आ गया, था लेकिन पिछले साल जून में वह कुआं बारिश में भिसक गया था। इस साल सीताराम उसी कुएं को खोदने में जुटा है।
Published on:
25 May 2018 03:59 pm
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