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शहर के 11 तालाबों में 4 तालाब हो गए पूरी तरह खत्म, बचे 7 तालाबों के अस्तित्व पर भी संकट

200 इमारतें खड़ी हो गईं तालाबों की जमीन पर

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There are 4 ponds in 11 ponds of the city

There are 4 ponds in 11 ponds of the city

छतरपुर। रियासत काल से लेकर दो दशक पहले तक कभी छतरपुर को तालाबों का शहर कहा जाता था, लेकिन शहर के 11 में से 4 तालाब तो पूरी तरह खत्म हो गए हैं। बचे 7 तालाब भी भू-माफियाओं के निशाने पर है। तालाबों के अस्तित्व पर गहरा रहे संकट के साथ ही शहर में जलसंकट भी भयावह स्थिति में पहुंच गया है। अधिकांश कुएं, हैंडपंप और नलकूप सूखते चले जा रहे हैं। तालाबों का रकवा कम होता जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी प्रशासन तालाबों को बचाने की दिशा में काम ही नहीं कर रहा है।
जिला मुख्यालय में भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उनकी बुरी नजर से शहर के रियासतकालीन तालाब भी नहीं बच सके। शहर की मरघट, पहाड़ी, प्राचीन मंदिरों सहित गौचर की जमीनें भी अवैध कब्जों में खत्म होती चली गईं। अब शहर के रियासतकालीन तालाबों को निशाने पर हैं। आजादी के बाद शासन-प्रशासन ने शहर में नए तालाबों का निर्माण तो नहीं कराया बल्कि इसके उलट पुराने तालाबों को पाटकर इमारतें खड़ी करवाने में मदद जरूर कर दी। भू-माफियाओं ने शहर के राजनेताओं और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर शहर की ताल-तलैयों की जमीन पर प्लाटिंग कर करोड़ों रुपए कमाए। भू-मभियाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं की जुगलबंदी ने शहर को तालाबविहीन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब भी अगर वक्त रहते तालाबों की जमीन हड़पने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा नहीं कसा तो शहर के आधे खत्म हो चुके तालाब आने वाले कुछ दशकों में अपना पूरा अस्तित्व खो देंगे।
शहर के सभी तालाबों के खसरा नंबर एवं बन्दोबस्त का रकवा :
प्रताप सागर तालाब : खसरा नंबर- 2814, रकवा 35.10 एकड (14. 20 हेक्टेयर)
संकटमोचन तालाब : खसरा नंबर - 2384, रकवा - 12. 75 एकड ( 5. 163 हेक्टेयर)
ग्वालमगर तालाब : खसरा नंबर- 2643, 9 एकड (3.642 हेक्टेयर)
किशोर सागर तालाब : खसरा नंबर - 3087/1,3087/2,3087/3,3087/4 रकवा - 8.20 एकड़ ( 3.318 हेक्टेयर)
सांतरी तलैया : खसरा नंबर - 616/2, रकवा - 8.90 एकड ( 3.602 हेक्टेयर)
रानी तलैया - खसरा नंबर - 2523/2, रकवा - 7.50 एकड ( 3.035 हेक्टेयर)
विन्ध्यवासिनी मंदिर तलैया - खसरा नंबर -780, रकवा - 1.65 एकड ( 0.664 हेक्टेयर)
कुल रकवा - 83 एकड (33.6 हेक्टेयर)
आज न केवल बंदोबस्त के रिकॉर्ड में दर्ज यह रकवा कम हो चुका है अपितु बड़े पैमाने पर तालाबों की जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने अपने आर्थिक स्वार्थ के चलते रहवासी एवं व्यवसायिक इमारतें खड़ी कर दी हैं।
चार तालाब पूरी तरह हो गए खत्म :
अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे शहर के तालाबों की दयनीय स्थिति और रसूखदार भू-माफियाओं की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड में 11 तालाब दर्ज हैं लेकिन 11 में से 4 तालाब न केवल पूरी तरह खत्म हो चुके हैं बल्कि उन पर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गईं हैं। खसरा नंबर 779 आज भी शासकीय रिकॉर्ड में बंधान दर्ज है जिसका रकवा 0.162 बन्दोबस्त के रिकार्ड में दर्ज है। खसरा नंबर 1285 भी बंदोबस्त के रिकॉर्ड में बंधिया के नाम से दर्ज है जिसका रकवा 0.141 पूराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। खसरा नंबर 1413 एवं 1625 पुराने राजस्व रिकॉर्ड में बांध के नाम से दर्ज है जिसका रकवा क्रमश: 0.417 एवं 0.320 बंदोबस्त के रिकार्ड में दर्ज है। इसी तरह खसरा नंबर 2815 बंधान के नाम से आज भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है जिसका रकवा 0.522 बंदोबस्त के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि शहर के यह चारों तालाब सिर्फ रिकॉर्ड में दर्ज रह गए हैं, आज हकीकत यह है कि इन चारों तालाबों की जमीन पर बड़ी बड़ी इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। यह तालाब आज पूरी तरह विलुप्त हो चुके हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का भी नहीं हो रहा है असर :
शहर की सरकारी जमीन के अस्तित्व को लेकर लम्बी लड़ाई लडऩे वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद शुक्ला द्वारा वर्ष 2011 में शहर के सभी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका क्रमांक 6373/2011 दायर की गई थी। उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 7 अक्टूबर 2014 को शहर के सभी तालाबों को तीन माह के अंदर अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश जिला प्रशासन को दे दिया था। उच्च न्यायालय द्वारा 7 जनवरी 2015 की कट ऑफ डेट यानी अंतिम तारीख भी अतिक्रमण हटाने के लिए सुनिश्चित कर दी थी। अगर तय समय सीमा पर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जाता तो तीन वर्ष पहले ही शहर के सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त हो चुके होते। बहरहाल भूमभियाओं की ऊंची राजनैतिक पहुंच के चलते हाईकोर्ट के आदेश हमेशा से ही नजरअंदाज होते आए हैं।
प्रशासन ने स्वमं चिन्हित किए 200 अवैध निर्माण :
उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में जो जांच पूर्व कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर एवं वर्तमान कलेक्टर रमेश भंडारी द्वारा कराई गई उसमें न केवल शहर के विभिन्न तालाबों में अतिक्रमण की पुष्टि हुई बल्कि जांच के उपरांत लगभग 200 अवैध निर्माण चिन्हित भी किए गए। गौर करने वाली बात यह है कि हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में पूर्व कलेक्टर डॉ. मसूद अख्तर ने 2 मई 2016 को 2 माह के अंदर शहर के सभी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया था। पूर्व कलेक्टर द्वारा जारी किए गए आदेश की भी समय सीमा बीतने के 2 वर्ष बाद भी अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई न होना भूमभियाओं पर प्रशासन की मेहरबानी को उजागर करता है।
एक नजर शहर के तालाबों की वर्तमान दुर्दशा पर :
1. प्रताप सागर तालाब के 109 अतिक्रमणकारियों को नोटिस
शहर के प्रताप सागर यानी बड़ा तालाब जिसका रकवा कभी 35 एकड़ हुआ करता था, अब सिमटकर महज 23 एकड़ रह गया है। तालाब के बाकी भूभाग में असरदार भू-माफियाओं का कब्जा है। उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में तहसीलदार आलोक वर्मा ने प्रताप सागर तालाब के 109 अतिक्रमणकारियों को अक्टूबर 2016 में नोटिस जारी किए थे लेकिन आज नोटिस जारी होने के एक वर्ष बाद भी बड़े तालाब की भूमि पर रसूखदार अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई इमारतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
2. ग्वालमगरा तालाब में स्थित 28 मकान अतिक्रमण में :
हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में जो जांच तत्कालीन कलेक्टर द्वारा कराई गई थी उसमें ग्वाल मगरा तालाब में स्थित 28 मकान अतिक्रमण में पाए गए। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश की समय सीमा बीत जाने के बाद भी अवैध भवनों को नहीं ढहाया गया।
३. किशोर सागर तालाब के आधा दर्जन मकान हुए चिन्हित
किशोर सागर तालाब में फैला अतिक्रमण हमेशा से ही जनचर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर सत्ताधारियों और कुछ समाजसेवियों द्वारा रसूखदार अतिक्रमणकारियों के अवैध निर्माणों को बचाने की साजिशें भी देखी गई हैं। किशोर सागर तालाब का रकवा बंदोबस्त के वक्त 8.20 एकड़ हुआ करता था और आज इस तालाब की वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वहीं जांच के दौरान इस तालाब में भी अतिक्रमण होना पाया गया एवं अतिक्रमण चिन्हित करके करीब आधा दर्जन लोगों को नोटिस जारी कर दिए गए थे लेकिन उसके बाद पूरी कार्रवाई ठंडे बस्ते में पहुंच गई।
४. संकट मोचन तालाब के 22 अवैध निर्माण चिन्हित :
इन दिनों संकट मोचन तालाब में अतिक्रमणकारियों पर औपचारिक कार्रवाई करके प्रशासन वाहवाही लूटने में लगा हुआ है। इस तालाब पर भी प्रशासन ने जांच के उपरांत 17 अतिक्रमणकारियों के 22 अवैध निर्माण चिन्हित किए हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज 2 या 3 अवैध निर्माणों को धराशायी करके प्रशासन ने बाकी अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर आगे की कार्यवाही करने की बात कही है।
यह है प्रताप सागर तालाब के अतिक्रमणकारियों की सूची :
सुनीता पत्नी विजय अग्रवाल, रचना पत्नी संजय अग्रवाल, प्रीति पत्नी अजय अग्रवाल, संतोष जैन, बिंदू अग्रवाल, नाथूराम साहू, प्रदीप साहू, इसरार अहमद, रामप्रकाश बाजपेयी, अब्दुल रहमान, रहीश, रानी तिवारी, प्रभात तिवारी, सुभाष तिवारी, योगेश तिवारी, रामकिशोर रैकवार, रामस्वरूप यादव, शिवचरण, छन्नूलाल पंडा, बिजारी रैकवार, हरप्रसाद राय, ममता खरे, मुल्लन बाई रैकवार, गोपाल रैकवार, राजेंद्र, हरिशंकर, पीडब्ल्यूडी ऑफिस, मूलचन्द्र, धर्मेन्द्र , महरून निशा, रामप्यारे रैकवार, संजू मिश्रा, मंदिर श्रीराम, रामकृपाल रैकवार, हीरालाल रैकवार, अनंत राम गंगेले, श्रीराम गंगेले, जगदीश प्रसाद गंगेले, संतोष शर्मा, मधुसूदन मिश्र, जागेश्वर मिश्र, महाराष्ट्र मंडल स्कूल अध्यक्ष डॉ. रवि केलकर, भास्कर केलकर, शरद पराडकर, जगदीश साहू, राजेश गुप्ता,उदय केलकर, बीएसएम नाथू, संगीता अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल, लक्ष्मी प्रसाद अग्रवाल, पवन यादव, तुलसीदास रैकवार, मन्नू रैकवार, कंछेदी, नत्थू रैकवार, क्रांति रिछारिया, प्यारेलाल यादव, रामनाथ रैकवार, गणेश रैकवार, भगवानदास, रामप्रसाद, बद्री,रामकिशुन पटैरिया, मोहन रैकवार, चन्द्र राम, अजय, माधव प्रसाद स्वर्णकार, दुर्गा देवी, उमाशंकर, जानकी प्रसाद, हेमलता, गणेश, मंगलेश्वर, अशोक, रामकृपाल, तुलसीदास, प्यारेलाल, पंचू, मदन, नत्थू, शिवशंकर, हरगोविंद सिंह, उमा श्रीवास्तव, कुमुद श्रीवास्तव, ओमप्रकाश शुक्ला, रमा त्रिवेदी, सुशील पाठक, संतोष दिवेदी, नवनीत, पृथवीपाल सिंह, केशव प्रसाद, टटम वाले ठाकुर साहब, सुनील केशव देवधर, शारदा करकरे, लक्ष्मण करकरे, जगन्नाथ करकरे, सुमित्रा, हनुमत शरण तिवारी, ओमप्रकाश रैकवार, हुकुम चन्द्र जैन, बाबूलाल बबेले, शिखरचंद्र जैन, गिरीशचंद जैन, रमेशचंद्र जैन, बिट्टी बाई सैनी, शहजाद खान, अशोक जैन, लक्ष्मण केलकर तथा मुन्ना लाल रैकवार।
ग्वाल मंगरा तालाब के अतिक्रमणकारियों की सूची :
ग्वाल मंगरा तालाब के अतिक्रमणकारियों की सूची में मजीद खां , शकीना बानो पत्नी मजीद शेख, शेहर बानो पत्नी हबीब, संतराम पिता घनश्याम सोनी, दीनदयाल सोनी, सत्यभान शुक्ला, सुरेश कुमार मोर पुत्र सुन्दर लाल मोर, मदारी पिता रमजान, मुस्तफा पुत्र गुलाब खां, चतुर्भुज -रमेश प्रकाश, धन्नूलाल पुत्र मोतीलाल पाठक, हरी प्रसाद पाठक, राजेंद्र प्रसाद पाठक, हफीज रंगरेज पुत्र रोशन, जुम्मन, रमेश सोनी पुत्र गोरेलाल सोनी, नीरज सोनी, मुन्ना लाल सोनी, सोनी जी, दीप चन्द-प्रकाश चन्द, सिकंदर अली रंगरेज, हाजरा खातून, सुरैया, हकीमुर रहमान, बरकत पिता खुदाबक्स, अली मो. पुत्र खुदा बॅक्स, अली मोहम्मद शामिल हैं।
संकट मोचन तालाब के अतिक्रमणकारियों की सूची :
संकट मोचन तालाब में भी अतिक्रमण कर घर बनाने वाले 17 लोग चिन्हित किए गए हैं। इस तालाब पर भी प्रशासन ने जांच के उपरांत 17 अतिक्रमणकारियों के 22 अवैध निर्माण चिन्हित किए हैं। अतिक्रमणकारियों में हसीना पत्नी इजहार खान, जरीना बानो पत्नी अब्दुल नईम, शायरा खातून पत्नी मोहम्मद फईम, शादिक पुत्र इस्माईल, फातमा पत्नी सगीर मोहम्मद, सादिक, गुलाम नबी पुत्र मुस्तफा, हबीब खान पुत्र बाबू खान, वकील खान पुत्र बाबू खान, मोहम्मद हनीफ पुत्र अब्दुल वहीद, इश्हाक खान, इस्माइल खान, यासीर अराफात पुत्र इस्लाम खान, रज्जब अली पुत्र अख्तर अली, रहमत, मुवीन अहमद सिद्दीकी पुत्र शमीम अहमद शामिल हैं।

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