
Therefore, Rs 3 crore stuck in tenders
छतरपुर. लोकसेवा केन्द्र के संचालन के लिए नए लोगों को मौका देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। लोकसेवा केन्द्रों की निविदा प्रक्रिया शुरु से ही ढुलमुल तरीके से चल रही थीै। रोक के बाद केन्द्र के संचालन के जरिए रोजगार पाने वाले युवाओं के सामने संकट आ गया है। पहले निविदा के लिए 4 अप्रैल की तिथि तय की गई थी। लेकिन इसे बाद में बढ़ा कर 25 मई कर दिया। फिर निविदा जमा करने की तिथि 30 मई की गई। इसके बाद एक बार फिर निविदा जमा करने की तिथि 30 मई से बढ़ाकर 4 जून कर दी गई। 4 जून को ही टेंडर खोले जाना थे, लेकिन अचानक फिर राज्य शासन से पत्र आया और टेंडर खोलने की तिथि 7 जून कर दी गई। 7 जून को टेंडर की टेक्निकल बिड खोली गई और फिर 10 जून को प्रक्रिया संपन्न करने की तारीख दे दी गई। लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्य लोकसेवा अभिकरण के कार्यपालक संचालक ने पूरी प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी है।
लॉटरी में जिनके नाम आए हैं, उन्हें एक सप्ताह में वर्क ऑर्डर दिया जाना था, लेकिन इसके पहले ही प्रक्रिया रोक दी गई। छतरपुर में 10 जून को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्ष दीक्षित की मौजूदगी में रात साढ़े आठ बजे तक लॉटरी से ड्रा निकाले गए। इस ड्रा में बक्स्वाहा को छोड़कर किसी भी पुराने सर्विस प्रोवाइडर का नाम ड्रा में नहीं निकला। फिर अचानक 12 जून को संपूर्ण प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए समस्त निविदाओं को सील बंद कर जिला पंचायत में रखने का फरमान जारी कर दिया। केवल छतरपुर जिले में निविदाकारों ने 3 करोड़ 1 लाख रुपए सिक्योरिटी के रुप में जमा किए थे। छतरपुर जिले में 297 लोगों ने निविदा भरी है।
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रविवार को होगी बैठक
निविदाकार अवधेश शर्मा ने बताया कि, जिले के 297 निविदाकारों ने रविवार को इस संबंध में बैठक आयोजित की है। शासन द्वारा लगाई गई रोक पर निविदाकारों के अगले कदम की रणनीति बैठक में बनाई जाएगी। लॉटरी के जरिए छतरपुर में अवधेश शर्मा, नौगांव में प्रीति यादव, महाराजपुर में आशा गुप्ता, चंदला में ज्ञानेन्द्र कुमार अरजरिया, बिजावर में जानेश कुमार जैन, बड़ामलहरा में एसआरपी, गौरिहार में देशमुख शुक्ला, बक्स्वाहा में अखिलेश द्विवेदी, घुवारा में आइसेक्ट के नाम लॉटरी निकली है।
कार्यपालक संचालक ने लगाई रोक
राज्य लोकसेवा अभिकरण के कार्यपालक संचालक बी चन्द्रशेखर ने आगामी आदेश तक के लिए लोकसेवा केन्द्रों की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। सरकार की इस रोक से जहां सात साल से लोकसेवा केन्द्र चला रहे सर्विस प्रोवाइडरों को और समय मिल गया है, वहीं नए निविदाकारों के पूरे प्रदेश में 150 करोड़ रुपए फंस गए हैं। सरकार ने प्रदेश के आधे से भी अधिक जिलों में निविदा प्रक्रिया संपन्न होने के बाद यह फैसला लिया है। टेंडर प्रक्रिया के बाद असफल निविदाकारों के जब 150 करोड़ लौटाने की बारी आई तो सरकार ने अचानक पूरी प्रक्रिया जिस स्थिति पर है, उसी स्थिति पर रोक लगाने का फरमान सुना दिया। संचालक बी चन्द्रशेखर ने 11 जून को हुए आदेश क्रमांक 817/ लो.से.अ./ प्रशासन/ 2019 की प्रति 12 जून को मप्र के समस्त कलेक्टरों को भेजकर टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
Published on:
14 Jun 2019 09:29 am
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